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दुमका: दोहरे हत्याकांड में 23 लोगों को आजीवन कारावास, 2009 में पिता-पुत्र की घेरकर की गयी थी हत्या

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News Wing Dumka, 12 December: दुमका जिले के जामा प्रखंड के खिजुरिया गांव में धान रोपनी को लेकर 20 अगस्त 2009 को हुए विवाद में पिता-पुत्र की घेरकर हत्या करने के मामले में कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया है. हत्या के 27 में 23 आरोपियों को प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश रिजवान अहमद की अदालत ने दोषी पाने के बाद सश्रम आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनायी. जुर्माना नहीं भरने पर अभियुक्तों को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. फैसला होने से पहले तीन आरोपी की मौत हो गई और एक भी फरार है. अदालत ने अभियुक्तों को तीन माह के अंदर जुर्माना की राशि केस दर्ज कराने वाले पवन कुमार पाल को देने का आदेश दिया.

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जमानत पर थे 18 आरोपी

गौरतलब है मामले में 18 आरोपी जमानत पर थे और पांच की जमानत अबतक नहीं हुई थी. सरकार की ओर से सहायक लोक अभियोजक दिनेश कुमार ओझा और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सोमा गुप्ता व नंद लाल मंडल ने जिरह में भाग लिया. अदालत में 11 गवाह का बयान दर्ज हुआ था.

यह भी पढ़ेंः शीतकालीन सत्र ऐसा जैसे शराब और चुंबन प्रतियोगिता के अलावा झारखंड में कोई मुद्दा ही ना हो

क्या है मामला

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दुमका के जामा थाना क्षेत्र के खिजुरिया गांव में मलींद्र पाल की जमीन थी. इस जमीन पर जामा के संथाल टोला का धुमा टूडू भी अपना अधिकार जताता था. 20 अगस्त 09 को मलींद्र पाल अपने बेटे पवन कुमार पाल, अजीत कुमार पाल, रिश्तेदार दशरथ पाल और दिलीप पाल मजदूरों को लेकर धान रोपनी के लिए गया. दोपहर करीब पौने बारह बजे तीस की संख्या में लोग तलवार, तीर धनुष, भाला व कुल्हाड़ी लेकर वहां आए और कहा कि जमीन पर किसकी अनुमति से रोपनी कर रहे हैं. मलींद्र के यह कहने पर अपनी जमीन पर किसी से पूछने की जरूरत नहीं है, इस पर विवाद शुरू हो गया और आरोपियों ने सभी को घेर लिया और हथियारों से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया. तीर लगने की वजह से मलींद्र और उसके बेटे अजीत पाल की मौके पर ही मौत हो गई.

हमले में पवन, दशरथ और दिलीप बुरी तरह घायल हो गए. सदर अस्पताल में पुलिस ने पवन के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया. केस की सुनवाई के क्रम में आरोपी सरकल टुडू,  गुड़धा टुडू व गोरा टुडू की मौत हो गई. जबकि एरिक्शन को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी. अदालत ने गवाह के बयान और सरकारी वकील की दलील सुनने के बाद सभी 23 आरोपियों को दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी.

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