न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

दिवाला कानून: आईबीबीआई ने शिकायत निपटान के लिये नियम अधिसूचित किये

26

News Wing

mi banner add

New Delhi, 11 December: दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता के तहत शिकायत निपटान प्रक्रिया के लिये नियमनों को अधिसूचित कर लिया गया है. इसमें यदि शिकायत द्वेषपूर्ण भावना से अथवा हल्की प्रकृति की नहीं पाई जाती है तो उसे गंभीरता से लिया जायेगा और शिकायत फीस भी संबंधित पक्ष को रिफंड कर दी जायेगी.

सभी हितधारकों पर लागू होंगे नियम 

भारतीय दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) इस संहिता को लागू कर रहा है. उसने कानून के तहत नियमनों को अधिसूचित किया है. यह नियम सभी हितधारकों पर लागू होंगे जिसमें ऋणदाता, कर्ज लेने वाले और सेवा प्रदाता शामिल हैं. शिकायत के आधार पर आईबीबीआई संबंधित इकाई को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है अथवा जांच का आदेश दे सकता है.

यह भी पढ़ें: तेंदुलकर का मोदी को पत्र: सीजीएचएस योजना में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को करें शामिल

पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निपटारे की व्यवस्था की गई 

कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने सोमवार को जारी विज्ञप्ति में कहा है, ‘‘नियमनों में आईबीबीआई द्वारा शिकायतों के उद्देश्यपरक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निपटारे की व्यवस्था की गई है. इसमें किसी भी शातिर सेवा प्रदाता को छोड़ा नहीं जायेगा जबकि किसी भी ईमानदार सेवा प्रदाता को परेशान नहीं किया जायेगा.’’ आईबीबीआई कारपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन आता है.

Related Posts

पूर्व सीजेआई आरएम लोढा हुए साइबर ठगी के शिकार, एक लाख रुपए गंवाये

साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

सूचना सेवा के खिलाफ 

दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता, जो कि पिछले साल लागू हो चुकी है, के तहत बड़ी संख्या में मामले दायर किये जा चुके हैं. इस दौरान दिवाला प्रक्रिया में शामिल इकाइयों के खिलाफ कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं. नियमन रूपरेखा के तहत दिवाला पेशेवर सेवायें देने वाली एजेंसी, दिवाला पेशेवर, दिवाला पेशेवरों की इकाई और सूचना सेवा के खिलाफ शिकायत की जा सकती है.

2,500 रुपये की फीस देकर भरा जा सकता है विशिष्ट फार्म

शिकायत 2,500 रुपये की फीस देकर एक विशिष्ट फार्म में भरकर दी जा सकती है. ‘‘शिकायत यदि द्वेषपूर्ण भावना अथवा हल्की फुल्की नहीं लगती है तो फीस को रिफंड कर दिया जायेगा. ’’आईबीबीआई को यदि लगता है कि इसमें शुरुआती नजर में उल्लंघन का मामला दिखता है तो वह जांच और निरीक्षण का आदेश अथवा कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है.
 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: