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दलितों को इंटरकास्ट मैरिज करने पर मिलेंगे 2.5 लाख, सरकार ने कुछ नियमों में किये बदलाव

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NEW DELHI, 06 DECEMBER : केंद्र की मोदी सरकार ने दलितों के लिए शादी से संबंधित एक योजना डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटिग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज की शुरूआत की है. इस योजना के अंतर्गत इंटरकास्ट मैरेज करने पर सरकार ढ़ाई लाख रूपये की मदद करेगी. बस शर्त इसके लिए इतना है कि दुल्हा या दुल्हन में से कोई भी एक दलित होना चाहिए. सरकार की ओर से इसमें आय सीमा का भी ऐलान किया गया था, जो सलाना 5 लाख रूपये थी. लेकिन अब इससे आय सीमा हटा दिया गया है.

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योजना से आय की सीमा को केंद्र ने हटाया

सरकार की ओर से इस योजना की शुरूआत साल  2013 में की गयी थी और इसके तहत जोड़ों का सलाना आय 5 लाख से कम होना चाहिए. तभी जोड़ों को ढ़ाई लाख रूपये की मदद मिल पायेगी . लेकिन अब आय की सीमा को सरकार ने समाप्त कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने 2013 में जब योजना की शुरूआत की थी, तब 500 जोड़ों को हर साल इसके तहत प्रोत्साहन राशि देने का लक्ष्य रखा गया था , जो कि पूरा नहीं हो पाया.

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योजना के लाभ के लिए आधार से बैंक का लिंक होना चाहिए

इस योजना के पीछे उद्देश्य यह है कि सामाजिक तौर पर जोडों के द्वारा उठाये गये कदम की सराहना करना और साथ ही वैवाहिक जीवन के लिए जोड़ों को सक्षम बनाना था. लेकिन इसमें सरकार के द्वारा यह शर्त रखी गयी थी कि जोड़ों की यह पहली शादी होनी चाहिए. साथ ही हिंदू मैरिज एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन भी होना चाहिए. साथ ही शादी के एक साल के अंदर इस योजना का फायदा उठाने के लिए प्रस्ताव सबमिट करना किया हुआ हो. वहीं पुरानी योजना में सरकार ने नये बदलाव किये हैं, उसके तहत दंपत्ति को इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपना आधार नंबर बैंक से लिंक कराना होगा.        

सरकार के पास फिलहाल कोई डाटा उपलब्ध नहीं

इसके अलावा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अपने निर्देश में कहा है कि इस स्कीम के तहत आय सीमा को इसलिए भी समाप्त किया जा रहा है क्योंकि कई राज्यों में इस स्कीम के तहत कोई आय सीमा नहीं है. साल 2013 में शुरू हुई इस योजना के तहत 2014 – 2015 में मात्र 5 जोड़ों को ही प्रोत्साहन राशि मिली थी. साथ ही इस साल सरकार को 409 प्रपोजल मिले हैं और इसमें से मात्र 74 को ही अप्रूव किया गया है. हालांकि अंतर –जाति विवाह पर फिलहाल कोई डाटा उपलब्ध नहीं है. इसके पीछे वजह यह है कि केंद्र सरकार ने सामाजिक – आर्थिक और जाति जनगणना से जाति के आंकड़ें जारी नहीं किये गये हैं.             

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