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तत्कालीन भवन निर्माण विभाग की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा ने टेंडर मैनेज करने वाले इंजीनियरों को दिया संरक्षण, सरयू राय ने जांच के लिए सीएम को लिखी चिट्ठी

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Ranchi : 2013-14 में बनी विधानसभा की समिति ने कुछ सूचनाओं की मांग भवन निर्माण विभाग से की थी. लेकिन यह सूचनाएं समिति को नहीं दी गयी. समिति ने टिप्पणी की कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद विभाग की प्रधान सिचव राजबाला वर्मा ना तो समिति की बैठक में आयी और ना ही जो सूचनाएं मांगी गयी थीं, उसे समिति को दिया. समिति का कहना है कि प्रधान सचिव राजबाला वर्मा का यह काम समिति को अपमानित करने वाला है और साथ ही वो विभागीय गड़बड़ियों को छिपाने के लिए जानबूझ कर ऐसा कर रही हैं. समिति ने पाया है कि भवन विभाग के टेंडर को मैनेज किया जाता है. यह महज संयोग नहीं है कि विधानसभा समिति के प्रतिवेदन में और भवन निर्माण की फाइल में जिन इंजीनियरों को चिन्हित किया गया है वो अभी भी उसी विभागों में महत्वपूर्ण पद पर है.

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Ranchi : 2013-14 में बनी विधानसभा की समिति ने कुछ सूचनाओं की मांग भवन निर्माण विभाग से की थी. लेकिन यह सूचनाएं समिति को नहीं दी गयी. समिति ने टिप्पणी की कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद विभाग की प्रधान सिचव राजबाला वर्मा ना तो समिति की बैठक में आयी और ना ही जो सूचनाएं मांगी गयी थीं, उसे समिति को दिया. समिति का कहना है कि प्रधान सचिव राजबाला वर्मा का यह काम समिति को अपमानित करने वाला है और साथ ही वो विभागीय गड़बड़ियों को छिपाने के लिए जानबूझ कर ऐसा कर रही हैं. समिति ने पाया है कि भवन विभाग के टेंडर को मैनेज किया जाता है. यह महज संयोग नहीं है कि विधानसभा समिति के प्रतिवेदन में और भवन निर्माण की फाइल में जिन इंजीनियरों को चिन्हित किया गया है वो अभी भी उसी विभागों में महत्वपूर्ण पद पर है. उक्त बातें सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने एक चिट्ठी के माध्यम से सीएम रघुवर दास को लिखी है. अपने पत्र में श्री राय ने मामले पर सीएम से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.
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सचिव और विकास आयुक्त की अनुशंसा का भी पालन नहीं हुआ

अपने पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि तत्कालीन भवन विभाग के सचिव और विकास आयुक्त की अनुशंसा के बाद भी भवन निर्माण के इंजीनियरों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई. विभाग के सचिव और विकास आयुक्त के अनुशंसा के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री की तरफ से कार्रवाई करने का निर्देश विभाग को दिया गया. लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. दरसल बिना प्रशासनिक स्वीकृति के विभाग की तरफ से टेंडर निकाला गया था. जांच के बाद मुख्य अभियंता दोषी पाए गए थे. कार्रवाई करने के निर्देश में मुख्य अभियंता से विज्ञापन में खर्च हुई राशि भी वसूलने की बात हुई थी. लेकिन विभाग की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा ने ऐसा नहीं किया. नतीजतन आज भी ये इंजीनियर विभाग के कई महत्वपूर्ण पद पर विराजमान हैं. ऐसी ही स्थिति पथ निर्माण विभाग की भी है. वरीयता क्रम में काफी नीचे होने के बावजूद यह समूह एक साथ कई महत्व वाले पदों पर लंबे समय से है.

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कार्य विभाग सूचनाएं क्यों नहीं करते अपलोड

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अपने पत्र में मंत्री सरयू राय ने कहा है कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने पथ विभाग सहित भवन विभाग, जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, कृषि विभाग, कृषि एवं पशुपालन विभाग और उर्जा विभाग को पत्र लिखकर योजनाओं की विस्तृत जानकारी सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा था. लेकिन ये सूचनाएं उपलब्ध नहीं करायी गयी. लंबे समय तक इन निर्देशों को नहीं पालन करने वालों पर कार्रवाई नहीं होना, समझ से परे और रहस्यमय है. श्री राय ने पत्र में लिखा है कि पिछले चार-पांच सालों में बने और निर्माणाधीन पथों का ट्रैफिक सर्वे, एक्सल लोड सर्वे, लोड कैरिंग कैपिसिटी की गणना और मिट्टी जांच की रिपोर्ट देख लेने पर सड़कों के रोड क्रस्ट डिजाइन और निर्माण की गुणवत्ता पता चल जाएगा. गड़बड़ी होने की बात सामने आ जाएगी. इस वजह से आदेशों का पालन नहीं हो रहा है.  

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रास बिहारी सिंह की भूमिका शक पैदा करती है

सरयू राय ने सीएम को लिखे पत्र में कहा है कि विधानसभा समिति ने पाया है कि भवन निर्माण विभाग में टेंडर मैनेज किया जा रहा है और इस काम में अभियंता प्रमुख के तकनीकी सचिव रास बिहारी सिंह की भूमिका संदेहास्पद है. उन्होंने टेंडर मैनेज किया है. ऐसे में उनकी संपत्ति की जांच निगरानी विभाग से तीन महीने के अंदर करानी चाहिए. साथ ही इसकी जांच भी की जाए कि प्रधान सचिव ने इन्हें संरक्षण क्यों दिया.

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