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डेबिट कार्ड लेनदेन में कारोबारी शुल्क बढ़ाने के फैसले से खुदरा विक्रेता नाराज

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News Wing
New Delhi, 12 December :
  डेबिट कार्ड के जरिये लेनदेन पर शुल्क दरों में संशोधन के निर्णय पर खुदरा कारोबार करने वाली फर्मो विक्रेताओं ने नाराजगी जताई है और सरकार और मांग की है कि मर्चेंट डिस्काउंट दर (एमडीआर) को तर्कसंगत रखा जाए. उनका कहना है कि प्रतिष्ठानों पर एमडीआर यानी कार्ड से भुगतान स्वीकार करने पर लगाया जाने वाला शुल्क बढ़ाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों को झटका लगेगा.

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सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना चाहती है

संगठित क्षेत्र के खुदरा कारोबारियों के संगठन ‘रिटेलर्स एसोसियेसन आफ इंडिया (आरएआई) के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा है कि डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिये भुगतान करने पर एक प्रकार से राशि का हस्तांतरण होता है. राशि एक खाते से दूसरे खाते में हस्तांतरित की जाती है. ‘‘सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना चाहती है तो इसके लिए एमडीआर को कम रखा जाना चाहिये ताकि सभी को इसका फायदा हो.’’ एमडीआर शुल्क वह शुल्क होता है जो डेबिट कार्ड से भुगतान लेने वाले विक्रेता को बैंक को देना होता है. कुमार राजगोपालन ने कहा है कि इस संबंध में वह वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और नीति आयोग को पत्र लिखेंगे और खुदरा विक्रेताओं की पीड़ा को सरकार तक पहुंचायेंगे.

नई व्यवस्था एक जनवरी 2018 से लागू करने का प्रस्ताव

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक की छह दिसंबर को जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिये भुगतान को तर्कसंगत बनाने का दावा करते हुये 20 लाख रुपये से कम कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिये एमडीआर दर को बढ़ाकर 0.40 प्रतिशत कर दिया गया. हालांकि, इसमें 200 रुपये की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है. इसी प्रकार 20 लाख रुपये से अधिक कारोबार करने वाले बड़े व्यासायियो के मामले में एमडीआर को 0.90 प्रतिशत करते हुये 1,000 रुपये की अधिकतम सीमा तय की गई है. यह नई व्यवस्था एक जनवरी 2018 से लागू करने का प्रस्ताव है. क्यूआर कोड के जरिये होने वाली बिक्री पर ये शुल्क क्रमश: 0.30 प्रतिशत और 0.80 प्रतिशत तय किये गये हैं.

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सरकार ने पिछले साल नोटबंदी के बाद अब डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रही है

राजगोपालन ने कहा कि चीन जैसे बड़े देशों में यह दर मात्र 0.25 प्रतिशत तक ही है. उन्होंने कहा,‘‘खुदरा कारोबार करने वाले छोटे-बड़े सभी विक्रेता आज 2 से 3 तीन प्रतिशत के मामूली मार्जिन पर काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें यदि 0.9 प्रतिशत तक कार्ड भुगतान का खर्च उठाना पड़ेगा तो उनका मार्जिन और कम होगा और वह इस बोझ को खरीदार पर डालने के लिये मजबूर हो जायेंगे या फिर कार्ड से लेनदेन करने के बजाये नकद राशि में लेनदेन को प्राथमिकता देंगे.’’ सरकार ने पिछले साल नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये एमडीआर को 1,000 रुपये तक की खरीदारी पर मूल्य का 0.25 प्रतिशत और 1,000 रुपये से अधिक लेकिन 2,000 रुपये से कम पर खरीद मूल्य का 0.50 प्रतिशत कर दिया था. इससे पहले 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर एमडीआर 0.75 प्रतिशत और इससे अधिक की खरीद फरोख्त पर एक प्रतिशत था.

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