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डालटनगंज: जान हथेली पर लेकर पढ़ते हैं बच्चे, विद्यालय के भवन से लेकर शौचालय तक की हालत जर्जर

Daltonganj: बच्चों की शिक्षा पर सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर रही है ताकि बच्चों को गुणवतायुक्त और अच्छे भवन में उन्हें शिक्षा मिले सके. लेकिन बावजूद इसके कई स्कूल अब भी ऐसे हैं, जिन्हें भवन तक मयस्सर नहीं हैं और अगर भवन हैं भी तो उसकी हालत बेहद दयनीय है.पलामू जिला मुख्यालय डालटनगंज के हमीदगंज इलाके में स्थित राजकीय मध्य और प्राथमिक विद्यालय में कुछ इसी तरह की लापरवाही बरती जा रही है. विद्यालय का भवन इतना जर्जर है कि बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने मजबूर हैं. हमीदगंज मुहल्ले में स्थित राजकीय बालक मध्य विद्यालय और राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय दोनों एक ही भवन में संचालित होता है. इस स्कूल भवन की स्थिति काफी जर्जर है. बच्चे जर्जर भवन में भयभीत होकर पढ़ने को विवश हैं. भवन की हालत इतनी दयनीय है कि कभी भी छत गिर सकती है या कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है.

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स्कूल में  150  बच्चे आते हैं  पढ़ने

मध्य विद्यालय में कक्षा एक से लेकर आठ तक, जबकि राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में वर्ग एक से पांच तक के बच्चे पढ़ने आते हैं. इन दोनों विद्यालयों को मिलाकर यहां करीब 150 बच्चे नामांकित हैं और इन बच्चों पर छह शिक्षक कार्यरत हैं. जबकि तीन कमरों वाले इस विद्यालय में से एक कमरे में मिडडे मील का चावल सहित अन्य सामग्री रखी जाती है. जबकि दूसरे कमरे में मध्याहन भोजन बनता है और बाकि बचे एक जर्जर कमरे में ही बच्चों को पढ़ाई करायी जाती है.

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अभिभावकों को बनी रहती है  किसी भी अनहोनी की आशंका 

दूसरी ओर बच्चों के अविभावक भी किसी अप्रिय घटना आशंका से हमेशा भयभीत रहते हैं.जबकि शिक्षक भी अपनी जान को जोखिम में डालकर बच्चों को पढ़ाते हैं. स्कूल के शौचालय की हालत भी इतनी दयनीय है कि छात्राओं को बाहर जाना पड़ता है. इससे सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं को होती है. वहीं मध्याहन भोजन के लिए शेड नहीं होने के की वजह से विद्यालय के क्षतिग्रस्त हिस्से में ही भोजन पकाया जाता है. इस समस्या पर मोहल्लावासी सतेन्द्र पासवान, शवारथ शर्मा, मंजु शर्मा, प्रमोद कुमार, विशुनदेव प्रसाद के आलावा अन्य लोगों ने बताया कि बच्चों को पढ़ने के लिए सरकार ने स्कूल तो खोल दिया, लेकिन भवन का निर्माण नहीं किया गया.

बालक मध्य विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका माया सिन्हा और राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय की टीचर नौशाबा खातून ने बताया कि बरसात के समय तो इस विद्यालय की स्थिति और भी गम्भीर हो जाती है. स्कूल की छत से पानी इतना टपकता है कि स्कूल के बच्चों को पढ़ाना काफी मुश्किल हो जाता है. बच्चों को भोजन करने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस स्कूल के जर्जर होने की शिकायत कई बार डीएसई से की गयी. लेकिन अभी तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है.

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