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ठेका में भ्रष्टाचार मामले में निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता पर एफआईआर दर्ज

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News Wing
Deoghar, 11 December:
गोड्डा के भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता पर एफआईआर दर्ज किया गया है. धोखाधड़ी व सरकार से साजिश कर सरकारी नियमों के विपरीत कार्य कराये जाने के आरोप पर एफआईआर दर्ज किया गया है. गोड्डा के नगर थाने में दर्ज किया गया है एफआईआर. पूरा का पूरा मामला 24 लाख की दो योजनाओं में बगैर टेंडर कार्य को लेकर है. उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री सीपी सिंह ने डीडीसी आवास जाकर अनियमितता को ऑन द स्पॉट पकड़ा था. जिसके बाद गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मंत्री की आलोचना की थी व कार्यपालक अभियंता का बचाव किया था. वहीं बीस सूत्री बैठक में गोड्डा विधायक अमित मंडल ने भी इस मामले को उठाया था.

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इसे भी पढ़ें- ठेका में भ्रष्टाचार पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह व सांसद निशिकांत आमने-सामने

क्या है मामला

नगर विकास मंत्री सीपी सिंह गोड्डा जिला के प्रभारी मंत्री भी हैं. सात नवंबर को वह गोड्डा में थे. शिकायत मिली कि वहां के डीडीसी के आवास की मरम्मती का काम पूरा किए जाने के बाद टेंडर निकाला गया था. 14 लाख रुपये की निकासी पहले ही कर ली गयी था. इस पर मंत्री ने भवन प्रमंडल के अभियंता राजेंद्र प्रसाद मंडल से जवाब मांगा. उन्होंने जवाब नहीं दिया. तब मंत्री श्री सिंह डीडीसी के आवास चले गए. जाकर देखा तो शिकायत सही पाया. उन्होंने निर्देश दिया कि संबंधित अभियंता पर प्राथमिकी दर्ज की जाये. जिसके बाद यह मामला दर्ज किया गया. हालांकि मंत्री श्री सिंह के इस निर्देश पर भी कई सवाल उठे कि क्या किसी सरकारी आवास में कोई अभियंता अपनी मरजी से मरम्मती का काम करा सकता है. ऐसा संभव नहीं है. संबंधित अधिकारी की सहमति के बिना एेसा होना संभव नहीं है. फिर मंत्री ने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की बात क्यों नहीं की.

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हाईजैक थी 20 सूत्री की बैठकः निशिकांत दुबे

सीपी सिंह कार्रवाई का निर्देश देकर रांची लौट गए. इसके बाद 11 नवंबर को गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कांफ्रेंस कर मंत्री श्री सिंह को निशाने पर लिया. मंत्री की जांच पर सवाल उठाया. सांसद ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा बतौर सांसद-मंत्री को किसी भी सरकारी अधिकारी के आवास की जांच करने का अधिकार नहीं है. सांसद ने 20 सूत्री की बैठक की तिथि बदलने पर भी सवाल उठाया. बैठक छह नवंबर को निर्धारित थी. लेकिन उसे सात तारीख को किया गया. जिसमें जिला के सांसद व दो-दो विधायक मौजूद नहीं थे. बैठक हाईजैक थी.  उन्होंने मंत्री सीपी सिंह के विभाग नगर विकास विभाग की भी जम कर आलोचना की. और कहा कि विधायक मद से कराए गए कामों की भी जांच होनी चाहिए. भ्रष्टाचार केवल किसी विभाग ने नहीं, बल्कि नेताओं व जन प्रतिनिधियों के कारण भी बढ़ रहा है. विधायक निधि से 15 लाख तक के काम के टेंडर की जांच क्यों नहीं की जाती है. मैं (निशिकांत दुबे) तो सांसद निधि भी बंद कर देने का पक्षधर हूं.

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