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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट जारी, इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म के लिए न्यूज विंग को अवार्ड, RTI एक्टिविस्टों को किया गया सम्मानित

RTI कानून बनने के 13 साल बाद आया देश में झारखंड का पहला रिपोर्ट

Ranchi : झारखंड राज्‍य सूचना के अधिकार कानून के तहत आने वाले शिकायतों और उसके निपटारे को लेकर वार्षिक रिपोर्ट पेश करने वाला पहला राज्‍य बन गया है. सूचना का अधिकार कानून 2015 के अनुसार राज्‍य के सूचना आयोग को साल के अंत में वार्षिक रिपोर्ट पेश का प्रावधान है, लेकिन पिछले 13 सालों में देश में किसी भी राज्‍य के सूचना आयोग ने कोई रिपोर्ट पेश नहीं किया था. रांची में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया द्वारा झारखंड राज्‍य के लिए स्‍टेट ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट जारी की गई. कार्यक्रम के दौरान न्‍यूज विंग के एडिटर सुरजीत सिंह को इंडिपेंडेंट जर्नलिज्‍म के लिए सम्‍मानित किया गया, वहीं मीडिया फेलो व सोशल एक्टिविस्‍ट को सम्‍मानित किया. मीडिया फेलो पाने वालों में सुमित कुमार झा, रंजीत कुमार नीरद, अक्षय तिवारी, ब्रजेश मिश्रा हैं. इसके अलावा 25 नागरिकों और आरटीआई एक्टिविस्‍ट को सम्‍मानित किया गया. इस मौके पर झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आरके मरेठिया, सूचना आयुक्‍त हिमांशु शेखर चौधरी, ट्रांसपेरेंसी इंडिया इंटरनेशल के निदेशक रामनाथ झा समेत कई लोग मौजूद थे.

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संविधान में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत : जस्टिस मरेठिया

सूचना का अधिकार के संबंध में स्‍टेट ट्रांसपरेसी रिपोर्ट जारी होने के बाद झारखंड हाईकोर्ट के जज आरके मरेठिया ने कहा कि भारत में भ्रष्‍टाचार की भूल-भूलैया है. यहां भ्रष्‍टाचार की धारा उपर से नीचे की ओर बहती है. हैरानी की बात है कि आजादी के 70 साल बाद भी प्रधानमंत्री को भ्रष्‍टाचार पर बोलना पड़ता है. उन्‍होंने सिस्‍टम पर कई सवाल खड़ा किये और कहा कि सरकार कहती है अधिकारी बात नहीं मानते, तो इसका ईलाज क्‍यों नहीं किया. सरकार कहती है अधिकारी नपेंगे, अब तक कितने नपे. कई पुल बनते ही टूट गये कितने ठेकेदार नपे.

जस्टिस मरेठिया ने कहा कि हमारे यहां कानून में सेफ गार्ड बहुत हैं. इस सेफगार्ड का गलत इस्‍तेमाल बहुत होता है. लोगों के पास बचने के 72 रास्ते हैं, जिसके चलते लोगों को न्‍याय मिलने में देरी होती है. संविधान में आमूल चूल परिवर्तन की जरूरत है. इसके लिए जन आंदोलन की जरूरत है. देश में राजनीतिक दलों की संख्‍या भी सीमित होना चाहिये. जब तक ऐसा नहीं होगा, भ्रष्‍टाचार पर नियंत्रण कठिन है.

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सूचना देने में झारखंड अव्‍वल : राज्‍य सूचना आयुक्‍त

झारखंड राज्‍य के सूचना आयुक्‍त हिमांशु शेखर चौधरी ने कहा कि देश के दूसरे राज्‍यों के मुकाबले सूचना उपलब्‍ध कराने में झारखंड राज्‍य अव्‍वल है. जन सूचना संपर्क अधिकारी अगर सूचना नहीं देते हैं तो उनपर जुर्माना या कार्रवाई करने से मांगी गई सूचना मिलना रूक सकता है. ऐसे में लोगों को उपरी बेंच में अपील दाखिल करना चाहिये. अगर किसी आरटीआई कार्यकर्ता को सूचना मांगने के दौरान कोई डराता धमकाता है तो प्रमाण के साथ शिकायत करें, कार्रवाई होगी.

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ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी तो आरटीआई की जरूरत कम होगी : रामनाथ झा

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के निदेशक रामनाथ झा ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ना आसान नहीं है, इसके लिए मजबूत होना जरूरी है. आरटीआई में श्रीलंका की स्थिति भारत से कहीं बेहतर है. सूचना का अधिकार में बहुत सारे राज्‍यों में कोई रिपोर्ट ही नहीं है. झारखंड में पहली ऐसी रिपोर्ट बनाई गई है. ऐसी ही रिपोर्ट हर राज्‍य के लिए तैयार की जायेगी, उसके बाद रैंकिंग भी होगी.रामनाथ झा ने कहा कि अगर वर्क कल्‍टचर में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी. इंटरनेट पर सभी के वेबसाइट पर सभी तरह की जरूरी जानकारी अपडेट मिलेगी तो लोगों को कम से कम आरटीआई इस्‍तेमाल करने की जरूरत होगी.

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अपने यूनिवर्सिटी में आरटीआई की व्‍यवस्‍था को बेहतर किया : डॉ रमेश शरण

विनोवा भावे यूनिर्सिटी के वीसी डॉ रमेश शरण ने कहा कि मेरे आने से पहले यूनिवर्सिटी में आरटीआई का खस्‍ता हाल था. जन सूचना अधिकारी के बैठने के लिए जगह तक नहीं दी गई थी. मैंने वहां पर इसे दुरूस्‍त किया. वहां सभी से कहा कि जिसे जैसी सूचना चाहिये वो दे, उन्‍हें तय समय से पहले वह सूचना मिल जायेगी.

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