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टूट रहा है पूर्वी अफ्रीका, बदल जायेगा दुनिया का नक्शा,  नया महासागर लेगा जन्म !

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New Delhi :  दुनिया का नक्शा बदलने वाला है. लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि इसमें लाखों वर्ष लगेंगे. हालांकि इसकी नींव पड़ चुकी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि पूर्वी अफ्रीका टूट रहा है. कारण यह कि इस  महाद्वीप के पूर्वी हिस्से में विशालकाय 5000 किमी लंबी टेक्टॉनिक प्लेट बाउंड्री है, जो ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट सिस्टम की सतह की तरह है. यह अफ्रीकन प्लेट सोमालियन और नुबियन टेक्टॉनिक प्लेटों में बंटी हुई है. दोनों प्लेटें एक-दूसरे को दूर धकेल रही हैं. इसका अर्थ लगाया जा रहा है कि है कि लगभग एक करोड़ वर्ष में वहां एक नया महासागर जन्म लेगा,  जो ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट सिस्टम पूर्वी अफ्रीका को महाद्वीप से अलग कर देगा.

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 वैज्ञानिकों के अनुसार 13 करोड़ 80 लाख वर्ष पूर्व भी इसी प्रक्रिया के तहत दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका महाद्वीप अलग हुए थे.  आज भी दोनों महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों की समानता इसकी पुष्टि करती है. बताया गया है कि दक्षिण पश्चिम देश केन्या में मीलों लंबी और काफी चौड़ी दरार पड़ चुकी है. इलाके में लगातार भूकंप आ रहे हैं. यहां तक की नैरोबी-नरोक हाईवे लगभग तहस-नहस हो चुका है.

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धरती का लिथोस्फेयर टेक्टॉनिक प्लेटों में बंटा होता है, जो स्थिर नहीं रहतीं

फाल्ट डायनामिक्स रिसर्च ग्रुप लंदन रॉयल होलोवे के लुसिया पेरेज डियाज ने इस संबंध में जानकारी दी है. उनकी थ्योरी के अनुसार धरती का लिथोस्फेयर (क्रस्ट और मैंटल का ऊपरी हिस्सा) टेक्टॉनिक प्लेटों में बंटा होता है और ये प्लेटें स्थिर नहीं रहतीं. प्लेटें अलग-अलग गति से एक-दूसरे की तरफ बढ़ती रहती हैं. ज्यादा चलायमान एस्थेनोस्फेयर (लिथोस्फेयर के नीचे की परत) के ऊपर सरकती रहती हैं. थ्योरी कहती है कि एस्थेनोस्फेयर के बहाव और प्लेटों की बाउंड्री से पैदा हुए बल इन्हेंगतिमान बनाये रखते हैं. कभी-कभी प्लेटों को तोड़ भी देती हैं. ऐसा होने से धरती में दरार पैदा होती है. साथ ही नयी प्लेट बाउंड्री का निर्माण होता है. ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट वैली उत्तर में अदन की खाड़ी से लेकर दक्षिण में जिंबाब्वे तक के 3000 किमी क्षेत्र के दायरे में फैली है. ये अफ्रीकी प्लेट को दो असमान हिस्सों सोमाली और नुबियन प्लेटों में बांटती है. 

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इथियोपिया, केन्या, तंजानिया में भूगर्भ हलचल तेज है

हार्न ऑफ अफ्रीका, इथियोपिया और सोमालिया में हिंद महासागर में एक आइलैंड बनने की संभावना है. इस रिफ्ट वैली के पूर्वी हिस्से यानी इथियोपिया, केन्या, तंजानिया में भूगर्भ हलचल तेज है. अफ्रीकन रिफ्ट वैली की पूरी सतह ज्वालामुखीय चट्टानों से बनी है. यहां लिथोस्फेयर बहुत पतली है जिसके दो टुकड़ों में बंटने की बहुत गुंजाइश है. जब ऐसा होगा तो खाली हुए स्थान में मैग्मा के जमने से नया महासागर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. एक करोड़ साल बाद समुद्र तल बढ़कर पूरी दरार को अपने लपेटे में ले लेगा.  महासागर का आकार बढ़ेगा और अफ्रीका महाद्वीप छोटा हो जायेगा.

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