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झारखंड राज्यसभा चुनाव का कैल्कूलसः यूपीए को एक विधायक ने दिया धोखा,  बीजेपी को कोसने वाले ने ही दिया एनडीए का साथ

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: राजनीति में राज बहुत दिनों तक राज नहीं रहता. हां पब्लिक भूल जरा जल्दी जाती है. लेकिन यह समझना कि पब्लिक से कुछ छिप जाएगा,  जरा मिथक लगता है.क्योंकि ये पब्लिक है सब जानती है”.  झारखंड के राज्यसभा चुनाव के दौरान जो हुआ वो पूरे देश के लिए उदाहरण साबित हो रहा है. चुनावी नतीजों का रुख अपनी तरफ मोड़ देने वाली बीजेपी को मिल रही लगातार जीत पर रोक झारखंड में लगी. हालांकि जीत के अंतर को देखा जाए तो वो बेहद मामूली और चौंकाने वाला है. चुनावी नतीजों के बाद जो बातें छनकर सामने आ रही हैं,  वो राजनीति करने वालों के चरित्र को जनता के सामने रख रही हैं. कैसे एक नेता जनता के सामने बोलता कुछ है,  और करता कुछ है. जो विधायक अपनी पार्टी के ना हो सके वो जनता के कैसे हो सकते हैं, यह लाख टके का सवाल है.

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कैसे प्रदीप सोंथालिया के 20 वोट 25 हो गए ?

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राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से दो उम्मीदवार उतारे गए थे. समीर उरांव को जीत मिली और प्रदीप सोंथालिया को हार. बीजेपी के पास कुल 43 विधायक हैं. चार आजसू के पास. कुल मिला कर 47 वोट एनडीए के पक्के थे. 47 में से 27 वोट पड़ गए समीर उरांव को बचे 20. चाहे किसी भी कारण से लेकिन एनडीए को खुलकर गीता कोड़ा, एनोस एक्का और भानूप्रताप शाही का साथ मिला. यानि प्रदीप सोंथालिया के 23 वोट पक्के हो गए. लातेहार के जेवीएम विधायक प्रकाश राम ने खुलकर क्रॉस वोटिंग की. ऐसे में सोंथालिया के खाते में 24 वोट आ गए. प्रदीप सोंथालियो को 25 वोट मिले. ऐसे में सवाल उठता है कि 25 वां वोट प्रदीप सोंथालिया को किसने दिया.

कैसे यूपीए का 25 वोट 26 हो गया ?

राज्यसभा चुनाव में यूपीए की तरफ से मैदान में धीरज साहू थे. बड़े ही रोमांचक तरीके से उन्हें जीत मिली. एक बार तो वो भी अपनी हार स्वीकार कर चुके थे. बकायदा उन्होंने प्रदीप सोंथालिया को बधाई भी दे दी थी. लेकिन अचानक खबर आयी कि वो 0.01 वोट से जीत गए. धीरज साहू को 26 वोट मिले. 18 विधायक झामुमो और 7 विधायक कांग्रेस के हैं. दोनों मिला कर 25 हो गए. निरसा से मासस विधायक अरूप चटर्जी ने कांग्रेस और झामुमो को भरोसा दिलाने के लिए वैलेट पेपर पर जिस तरीके से एक लिखा था उससे साबित होता है कि अरूप चटर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया है. पुख्ता सूत्र की मानें तो गिनती के दौरान अरूप चटर्जी का वैलेट कांग्रेसियों ने पहचान भी लिया. ऐसे में धीरज साहू के 25 वोट हो गए. ऐसे में सवाल उठता है कि यूपीए को जेवीएम का साथ मिला की नहीं.

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दो वोट कैंसिल हो गए, अजय कुमार ने कहा बसपा का साथ उन्हें नहीं मिला

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80 विधायकों ने वोट किया. राजधनवार से माले विधायक राजकुमार ने खुले तौर पर माना है कि उन्होंने वैलेट पेपर पर प्रथम वरीयता के पास भी वन लिख दिया और नोटा में भी वन लिख दिया. ऐसे में उनका वैलेट कैंसल हो गया. दूसरा वैलेट पेपर जो कैंसल हुआ उसमें शिव जैसा कुछ लिख कर सिगनेचर किया हुआ था. इस वजह से इस वैलेट को भी कैंसल कर दिया गया. जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने साफ तौर से हुसैनाबाद के बसपा विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता पर फरेब का आरोप लगाया. मीडिया को दी गयी बाइट में उन्होंने साफ कहा कि हाथी ने उनका साथ नहीं दिया. जबकि वोट देने के बाद कुशवाहा ने कड़ी आवाज में कहा था कि उन्होंने पार्टी के आलाकमान मायावती के कहने पर उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया है. 

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सवाल अब भी मौजूं प्रदीप सोंथालिया को 25 वां वोट किसने दिया

 

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मकड़जाल में फंसा राज्यसभा का चुनावी समीकरण अब पानी की तरह साफ है.

धीरज साहूः झामुमो 18 + कांग्रेस 7 + मासस 1= 26

प्रदीप सोंथालियाः बीजेपी 16 + आजसू 4 + गीता कोड़ा 1 + भानूप्रताप शाही 1 + एनोस एक्का 1 + प्रकाश राम 1 + ? 1 = 25

तो वो कौन है जिसने यूपीए का साथ देने का राग अलापते हुए एनडीए का साथ दे दिया. वोटिंग के दौरान क्रॉस वोटिंग करते हुए एजेंट ने ऐसा करने पर आपत्ति क्यों नहीं जतायी. जैसे बंधु तिर्की ने प्रकाश राम के वोट पर आपत्ति जतायी थी. राज्यसभा चुनाव को बारीकी से जानने वाले और समझने वालों का मानना है कि प्रदीप सोंथालिया को सिंगल नहीं बल्कि डबल पी (P) का साथ मिला है.

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