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झारखंड में 7 अप्रैल को रोटा वायरस टीका होगा लांच, शिशु मृत्‍युदर में 10 प्रतिशत आयेगी कमी

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Ranchi : सात अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे के अवसर पर झारखंड में रोटा वायरस का टीका लांच किया जाएगा. इस टीके के उपयोग से झारखंड के शिशु मृत्युदर में 10 प्रतिशत की कमी आ जाएगी. ये टीका छोटे बच्चों को तीन डोज के माध्यम से किया जाएगा. जो ऑरेंज फ्लेवर में होगा. इस वायरस को लांच करने वाला झारखंड देश का दसवां राज्य है, साथ ही राज्य में बच्चों को दिए जाने वाले वैक्सीनेशन का भी यह दसवां टीका होगा. ये टीका पूरी तरह से मुफ्त होगा, जिसे यूनिसेफ, डब्लयूएचओ, यूएनडीपी और आईएसआई के सहयोग से केंद्र सरकार लांच कर रही है, जो हर तरह के स्वास्थ्य केंद्रो में उपलब्ध होगा. उक्त बातें स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही. मौके डॉ सुमंत मिश्रा, डॉ. वीणा सिन्हा, डॉ. मधुलिका जोनाथन, एसएस हरिजन मौजूद थे.

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झारखंड में रोटा वायरस से 3200 बच्चों की प्रतिवर्ष मौत 

दुनियाभर में संयुक्त रूप से एड्स, मलेरिया और खसरा की तुलना में डायरिया से अधिक बच्चों की मृत्यु होती है. वैश्विक रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की डायरिया से होने वाली मृत्यु का दस प्रतिशत (78 हजार) बच्चों की मौत भारत में होता है. इनमें से पांच वर्ष से कम उम्र के 3000 से 3200 बच्चों की मृत्यु झारखंड में होती है. भारत में रोटा वायरस डायरिया, हल्के से लेकर गंभीर डायरिया के चालिस प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेवार है.

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बच्चों को तीन डोज पड़ेगा, एक महीने के अंतराल में पड़ेगा टीका

बच्चों के लिए ये रोटा वायरस का टीका तीन महीने के अंतराल में दिया जाएगा. पहला टीका 1.5 महीना, दूसरा टीका2.5 महीना, और तीसरा 3.5 महीने में दिया जाएगा. ये टीका 2.5 एमएल दिया जाएगा. जो ऑरेंज फ्लेवर में दिया जाएगा. इसे सिरिंज में तैयार किया जाएगा और बच्चों को मुंह के द्वारा दिया जाएगा. रोटा वायरस झारखंड से पहले हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिसा, असम, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू और त्रि‍पुरा में लांच किया गया है.

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क्‍या है रोटा वायरस

  • रोटा वायरस एक संक्रमण है, इसका संक्रमण मलमुख मार्ग से होता है, यह बच्चों दवारा संक्रमित जल एवं भोजन के संपर्क में आने से होता है.
  • रोटा वायरस हाथों और स्तहों पर काफी लंबे समय तक जीवित रह सकता है.
  • सभी बच्चों में रोटा वायरस का खतरा रहता है, चाहे वो किसी भी सामाजिक आर्थिक परिस्थिति का क्यों न हो. 
  • संकम्रण प्रायः काफी छोटे बच्चों में होता है, उनमें पानी की कमी का खतरा रहता है.
  • रोटा वायरस संक्रमण का वर्तमान में कोई दवा उपलब्‍ध नहीं है, समान्यतः इसका इलाज 14 दिनों तक ओआरएस और जिंक की गोली देकर किया जाता है. 
  • स्वच्छता, साफसफाई, पेयजल के अलावा रोटा वायरस डायरिया से प्रभावी बचाव रोटा वायरस टीके से किया जा सकता है.

भारत में रोटा वायरस डायरिया का आर्थिक बोझ

रोटा वायरस डायरिया के प्रत्येक एपिसोड में भारतीय परिवारों को औसतन अपनी आय का सात प्रतिशत तक इलाज में खर्च करना पड़ता है. इसके कारण कम आय वाले परिवार गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं. एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष एक हजार करोड़ रुपये से अधिक रोटा वायरस डायरिया के प्रबंधन पर खर्च होता है. तकरीबन 4700 करोड़ रुपये प्रति वर्ष अस्पताल में बीमारी के उपर खर्च होता है, जबकि 5 सौ करोड़ रुपये रोटा वायरस डायरिया के इलाज में खर्च हो जाता है.

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