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झारखंड में 47.8% बच्चे कुपोषित, बिहार और छत्तीसगढ़ के आंकड़े भी हमसे बेहतर

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Saurabh Shukla/News Wing

Ranchi,30 November : झारखंड के करीब आधे नौनिहाल कुपोषित हैं. यहां के 47.8% बच्चों में कुपोषण का लक्षण पाया गया है. बच्चों के कम वजन के कारण कुपोषण के मामले में हम पर देश में अव्वल होने का धब्बा लगा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. यदि देश की बात करें तो कम वजन के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या 35.7%  है. वहीं पड़ोसी बिहार और छत्तीसगढ़ के आंकड़े भी इस मामले में हमसे बेहतर ( क्रमश: 43.5% और 37.5%) हैं.

रांची जिला में 4 एमटीसीएस सेंटर का हो रहा संचालन

राज्य की राजधानी रांची में कुल 4 एमटीसीएस सेंटर बेड़ो, माण्डर, बुंडू और डोरंडा में संचालित हैं. जहां कुपोषण से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाता है. शहर के डोरंडा स्थित सब डिवीजनल अस्पताल में 15 बेड की सुविधा उपलब्ध है. जहां कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है.

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डोरंडा सब डिविजनल अस्पताल में कुपोषण पीड़ित बच्चों के इलाज का आंकड़ा 

वर्ष 2014-15 

कुल बच्चों की जांच-128 

इलाज-94 

वर्ष 2015-16 

कुल बच्चों की जांच-129 

इलाज-58 

वर्ष 2016-17 

कुल बच्चों की जांच- 889(फील्ड मिला कर)

इलाज-117 

वर्ष 2017-18(अप्रैल-अक्टूबर)

कुल बच्चों की जांच-224 

इलाज-56 

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कुपोषण का लक्षण एवं जांच का तरीका 

बच्चा देखने में गंभीर, सूखा (विज़िबल सीवियर वेस्टिंग),हाथ-पैर के साथ शरीर का अंग पतला और कमजोर दिखना कुपोषण की श्रेणी में आता है.कुपोषित बच्चों की जांच में यदि जेड स्कोर 3 एसडी(स्टैण्डर्ड डेविएशन) और मिड अपर आर्म की मापी में 11.5 सीएम से कम पाया गया तो बच्चा कुपोषित हो सकता है.    

इस दिशा में महत्वाकांक्षी कार्यक्रम और गंभीर कार्य योजना के बिना कोई सार्थक पहल नहीं की जा सकती. उपेक्षा जारी रही तो बच्चों का कुपोषण, एक मसला भर ना रह कर भविष्य का गंभीर संकट बन जायेगा.

 

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