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झारखंड में अब नहीं खुलेगी प्रज्ञान यूनिवर्सिटी, फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद बैकफुट पर संस्थान, बड़ा सवाल क्या मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

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Ranchi: 25 नवंबर 2016 को झारखंड में खूलने वाले प्रज्ञान यूनिवर्सिटी की लॉन्चिंग कोलकाता के पार्क स्ट्रीट होटल में हुई. विवि खोलने के लिए जरुरी प्रक्रिया का पालन किये बगैर सीधे विधानसभा एक्ट के तहत मंजूरी दे दी गई. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय का प्रोस्पेक्टस विवि के कैंपस में ना लॉन्च करा कर सीधे मुख्यमंत्री के हाथों उनके कार्यालय में लॉन्च करा दिया गया. कोलकाता में इसी संस्थान के द्वारा फर्जी एमबीबीएस की डिग्रियां बांटी गई. उपर लिखे तथ्यों को पढ़कर मामले से ये समझा जा सकता है कि प्रज्ञान यूनिवर्सिटी पूरी तरह से फर्जी तरीके से झारखंड में संचालित होने वाला था, या संचालित किया जा रहा था. न्यूज विंग द्वारा इसपर खबर लिखे जाने के बाद ये मामला पूरी तरह से उजागर हुआ. अब प्रज्ञान यूनिवर्सिटी ने राज्य के उच्च शिक्षा तकनीकी एवं कौशल विकास विभाग को ये लिखित तौर पर दिया है कि वो अब झारखंड में अपनी यूनिविर्सिटी नहीं खोलेंगे. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता, अब सवाल ये उठता है कि जिन अधिकारियों के दवारा झारखंड में प्रज्ञान विवि खोलने की अनुमति दी थी, उनपर कोई कार्रवाई होगी या नहीं. क्योंकि ये तो साफतौर पर देखा जा सकता है कि नियमों की अनदेखी हुई, तो क्या नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों के इस कारनामे के लिए उन्हें बगैर किसी कार्रवाई के छोड़ देना चाहिए. 

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kumar gaurav

Ranchi: 25 नवंबर 2016 को झारखंड में खूलने वाले प्रज्ञान यूनिवर्सिटी की लॉन्चिंग कोलकाता के पार्क स्ट्रीट होटल में हुई. विवि खोलने के लिए जरुरी प्रक्रिया का पालन किये बगैर सीधे विधानसभा एक्ट के तहत मंजूरी दे दी गई. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय का प्रोस्पेक्टस विवि के कैंपस में ना लॉन्च करा कर सीधे मुख्यमंत्री के हाथों उनके कार्यालय में लॉन्च करा दिया गया. कोलकाता में इसी संस्थान के द्वारा फर्जी एमबीबीएस की डिग्रियां बांटी गई. उपर लिखे तथ्यों को पढ़कर मामले से ये समझा जा सकता है कि प्रज्ञान यूनिवर्सिटी पूरी तरह से फर्जी तरीके से झारखंड में संचालित होने वाला था, या संचालित किया जा रहा था. न्यूज विंग द्वारा इसपर खबर लिखे जाने के बाद ये मामला पूरी तरह से उजागर हुआ. अब प्रज्ञान यूनिवर्सिटी ने राज्य के उच्च शिक्षा तकनीकी एवं कौशल विकास विभाग को ये लिखित तौर पर दिया है कि वो अब झारखंड में अपनी यूनिविर्सिटी नहीं खोलेंगे. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता, अब सवाल ये उठता है कि जिन अधिकारियों के दवारा झारखंड में प्रज्ञान विवि खोलने की अनुमति दी थी, उनपर कोई कार्रवाई होगी या नहीं. क्योंकि ये तो साफतौर पर देखा जा सकता है कि नियमों की अनदेखी हुई, तो क्या नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों के इस कारनामे के लिए उन्हें बगैर किसी कार्रवाई के छोड़ देना चाहिए. 

इसे भी पढ़ें: ना बिल्डिंग, ना कार्यालय, दे दी विश्वविद्यालय की मान्यता, रघुवर दास ने प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दी

 

कौन जिम्मेदारयह पता लगाने की नहीं हो रही कोशिश

 

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प्रज्ञान यूनिवर्सिटी पर बढ़ते विवाद के बादद अब सवाल यह भी उठने लगा है कि अगर पश्चिम बंगाल में इस संस्था को फर्जी एमबीबीएस डिग्रियां बेचने के आरोप में पकड़ा नहीं  गया होतातब झारखंड में विश्वविद्यालय खोलने के नाम पर चल रहे इस गोरखधंधे का पता भी नहीं चल पाता. हैरानी इस बात की भी है कि इतना बड़ा मामला सामने आने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक यह पता लगाने का आदेश नहीं दिया है कि राज्य सरकार के कौन-कौन से अफसर या नेता इस पूरी गड़बड़ी में शामिल हैं.

जो पाठ्यक्रम चलाने की घोषणा की गयी

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 विभाग ने कभी नहीं देखा क्या चल रहा है विश्वविद्यालय में 

हैरानी की बात यह भी है कि एक बार इस विश्वविद्यालय के स्थापना की अनुमति  देने के बाद विभाग ने यह पता लगाने की भी जरुरत नहीं समझी कि आखिर इस विश्वविद्यालय द्वारा किस प्रकार के कोर्स चलाये जा रहे हैं. कोर्स चलाने के लिए विश्वविद्यालय के पास भौतिक संरचना या मानव संसाधन भी है या नहीं. एसके अग्रवाल पर एमबीबीएस की फर्जी डिग्री बांटने का आरोप है. जिसके लिए वह पहले इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन नामक संस्था के नाम का उपयोग करता था. लेकिन झारखंड विधानसभा से विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाने के बाद उसके लिए यह काम बेहद असान हो गया था. उसके द्वारा डिपार्टमेंट ऑफ अल्टरनेटिव एंड होलिस्टिक मेडिसन संस्था खोल कर सिर्फ चिकित्सा के क्षेत्र में 100 से भी कोर्स की घोषणा कर दी गयी. यहां तक कि पांच तरह की मास्टर डिग्री कोर्स शुरु किए जाने की भी घोषणा कर दी गयी थी.

विश्वविद्यालय झारखंड में, लॉन्चिंग कोलकाता के पार्क होटल में

प्रज्ञान इंटरनेशल विश्वविद्यालय के मामले में हैरानी की बात यह है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के बगैर कोई प्रक्रिया किए सीधे विधानसभा से एक्ट पास करने के बाद राज्य सरकार ने कभी यह देखने की जरुरत नहीं समझा कि इस विश्वविद्यालय के नाम पर क्या फरजीवाड़ा हो रहा है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना झारखंड के नाम पर की गयी थी. लेकिन इसकी लॉंचिंग का कार्यक्रम 25 नवंबर 2016 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट होटल में आयोजित की गयी थी. इसके अलावा इस विश्वविद्यालय का प्रोस्पेक्टस मुख्यमंत्री के कार्यालय में जाकर उनके हाथ से जारी करा दिया गया. जबकि मंत्री से ब्रोसर जारी करा दिया. विभाग के अधिकारियों ने कभी यह पूछने की जहमत नहीं किया कि जब विश्वविद्यालय रांची में खुला हैतो लॉंचिंग कार्यक्रम कोलकाता में क्यों

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