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झारखंड के आदिवासी नेताओं ने राज्य में विस्थापन की समस्या से राष्ट्रपति को अवगत कराया

New Delhi : माकपा नेता वृंदा करात की अगुवाई में झारखंड के आदिवासी नेताओं ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं के कारण विस्थापन की समस्या से अवगत कराया. माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य करात ने आज यहां राष्ट्रपति से मुलाकात करने के बाद बताया कि आदिवासी नेताओं ने कोविंद के समक्ष राज्य के आदिवासी बहुल छोटानागपुर, पलामू और पश्चिमी सिंहभूमि जिलों में तीन परियोजनाओं के कारण लाखों आदिवासियों के विस्थापन का संकट उत्पन्न होने की समस्या रखी.

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा

झारखंड आदिवासी अधिकार मंच के सचिव प्रफुल्ल लिंडा, मोहन ओरांव, डा. अशोक और अनीता टिर्की सहित अन्य आदिवासी नेताओं की मौजूदगी वाले प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा. इसमें कहा गया है कि राज्य में बाघ संरक्षण, वनक्षेत्र विकास और फायरिंग रेंज बनाने से जुड़ी तीन परियोजनाओं के कारण इलाके के लगभग तीन लाख लोग विस्थापित होने को मजबूर हो गये हैं इनमें अधिकांश आदिवासी हैं.

लाखों दलित और आदिवासियों पर विस्थापन का साया

ज्ञापन के मुताबिक पलामू में बाघ संरक्षण क्षेत्र के विकास के चलते 191 गांवों के 1.49 लाख लोगों के सामने विस्थापन का संकट है. आठ गांवों को ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना वन विभाग ने गांव खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है, जबकि सिरसी पालकोट सारंडा में वन्यजीव क्षेत्र विकसित करने के लिये 214 गांवों की 1.87 लाख एकड़ जमीन अधग्रहीत की जा रही है. इससे लाखों दलित और आदिवासियों के विस्थापन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. वहीं नेतरहाट में फील्ड फायरिंग रेंज बनाने के लिये 245 गांवों के 2.5 लोग विस्थापन की जद में आ गये हैं. इन नेताओं ने आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुये राष्ट्रपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया .

 

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