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झारखंडी भाषा बचाव मंच ने मगही, भोजपुरी, मैथिली को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने का किया विरोध, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

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Ranchi : मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका को झारखंड राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित करने के झारखंड मंत्रिपरिषद के फैसले पर झारखंडी भाषा बचाव मंच ने विरोध किया है. मंच ने इसके खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. ज्ञापन में नौ बिंदुओं पर चर्चा की गयी है. ज्ञापन में कहा गया है कि बिहार की जिन चार भाषाओं को झारखंड में द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है, वह अभी तक बिहार की भी द्वितीय राजभाषा नहीं है. ऐसे में आदिवासी बहुल झारखंड में इन भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देना न्याय संगत नहीं है. इन भाषाओं को बोलने वाले कुछ दशक पहले रोजी रोटी के लिए यहां आये थे.

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इससे झारखंडवासियों की अस्मिता और अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग जायेगा

2001 की जनगणना को आधार मानकर द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिये जाने का फैसला भ्रामक और वास्तविकता से परे है. इससे झारखंडवासियों की अस्मिता और अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग जायेगा. झारखंडी भाषा बचाव मंच ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग की है. साथ ही झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की स्कूलों में प्राइमरी लेवल पर पढ़ाई शुरू कराने और इसके लिए शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है. 2001 की जनगणना के अनुसार झारखंड में मगही बोलने वालों की संख्या 18,35,273 है. भोजपुरी बोलने वालों की संख्या 6,56,393 है. मैथिली बोलने वालों की संख्या 1,41,184 है. वहीं अंगिका जो झारखंड के संथाल परगना के सभी जिलों में ज्यादातर बोली जाती है, उसकी संख्या स्पष्ट नहीं है, क्योंकि 2001 में अंगिका बोलने वाले लोगों का जनगणना में उल्लेख नहीं है.

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