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झामुमो ने तेज की मिशन 2019 की तैयारी, विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कवायद

Ranchi: राज्य में राजनीतिक दलों के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गयी है.  लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी होने की संभावना राजनीतिक पंडित व्यक्त कर रहे है. उधर राज्य के राजनीतिक दल चुनाव में उतरने का ताल ठोंक रहे हैं. ऐसे में झारखंड मुक्ति मोर्चा कहां पीछे रहने वाली है. पार्टी ने चुनावी दंगल में उतरने के लिए अभी से ही तैयारी करना शुरु कर दिया है. पार्टी पिछले कुछ महीने से प्रत्येक विधानसभा स्तर पर बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कर रही है. पार्टी  के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने अपने राज्यभर की सभाओं में कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए कह चुके हैं.

 झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा की रघुवर सरकार झारखंड की जनता की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर पायी है. सरकार के नीतिगत निर्णय के विरोध में झारखंडी जनता के जनविरोध के कारण सरकार को अपने कई नीतिगत मुद्दों से पीछे भी हटना पड़ा है. चाहे सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन का सवाल हो या भूमि अधिग्रहण बिल का सवाल. सरकार को मुंह की खानी पड़ी है. भाजपा सरकार से परेशान झारखंडी जनता जेएमएम की ओर आशा भरी निगाहों से  देख रही है. पार्टी झारखंड के जनमुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक उठाने का काम करती रही है.

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आरएसएस और भाजपा से राज्य को मुक्ति दिलायेगा जेएमएम

विनोद पांडेय ने कहा कि राज्य में संघ संचालित भाजपा सरकार से मुक्ति दिलाने के लिए पार्टी राज्य में तीसरे मोर्चे के गठन का प्रयास लगातार कर रही है. पार्टी का मानना है कि  आनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में  विपक्षी दल आपसी एकजुटता के साथ भाजपा और आजसू के खिलाफ लड़ें और राज्य की निक्कमी रघुवर सरकार से जनता को मुक्ति मिल सके. कहा कि झामुमो के कार्यकर्ता पार्टी के नीति और सिद्धांतो को राज्य की सवा तीन करोड़ जनता तक पहुंचने का काम कर रहे हैं. हमने झारखंड को बनाया है और हम ही इसे संवारेंगे के नारों के साथ झामुमो के कार्यकर्ताओं ने गांव, शहर और कस्बों का दौरा शुरू कर दिया है.

चलो गांव की ओर,खोलें सरकार की पोल

इस कार्यक्रम के तहत झारखण्ड मुक्ति ने जुलाई 2017 से राज्य के विभन्न लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले विधानसभा में बूथ स्तरीय कार्यकर्त्ता सम्मलेन सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है. अब तक दुमका, गिरिडीह, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू,राजमहल,बोकारो और धनबाद लोकसभा के चंदनकियारी में सम्मलेन कर चुकी है. 

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चुनाव में झामुमो के विधायकों की संख्या  

2000: 12 सीट      

2004: 18 सीट

2009: 17 सीट

2014: 18 सीट

झामुमो ने बनायी थी सरकार, लेकिन पूरा नहीं  कर पायी कार्यकाल

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को राज्य की बागडोर पहली बार 2005 में दस दिनों के लिए मिला था. 02 मार्च 2005 से 12 मार्च 2005 तक शिबू सोरेन ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में  कार्यभार संभाला. एक बार फिर से गेंद झामुमो के ही पाले में गिरी और गुरु जी 27 अगस्त 2008 से 18 जनवरी 2009 तक 144 दिनों के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए. अब बारी हेमंत सोरेन की थी, जो 30 दिसंबर 2009 से 31 मई 2010 तक 152 दिन के लिए झारखण्ड के मुख्यमंत्री पद पर रहे. सबसे लंबा कार्यकाल झामुमो के नेतृत्व में 528 दिनों के लिए रहा जब एक बार फिर से हेमंत सोरेन 13 जुलाई 2013 से 23 दिसंबर 2014 तक झारखण्ड के मुख्यमंत्री बनाए गए.   

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