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जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से पीएमसीएच में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, बगैर इलाज लौटे 1500 मरीज

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Dhanbad: धनबाद के पीएमसीएच में शुक्रवार को मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. ओपीडी सेवा पूरी तरह से ठप रही. और आमतौर पर 18 सौ मरीजों की जगह मात्र 212 मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन हुआ. लगभग 1500 मरीजों को बगैर इलाज के लौटना पड़ा. दरअसल गुरुवार रात को जूनियर डॉक्टर्स के साथ हुई मारपीट के बाद विवाद बढ़ा और मामले को शांत कराने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. अब पीएमसीएच में पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में जूनियर डॉक्टर व इंटर्न हड़ताल पर हैं. हालांकि इमर्जेंसी व इंडोर सेवा बहाल रही.

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क्या है मामला

बता दें कि गुरुवार की रात केंदुआ निवासी चार साल की जाह्नवी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी थी. लेकिन परिजनों का कहना था कि बच्ची मरी नहीं थी, उसके शरीर में हरकत थी. लेकिन चिकित्सक ने इसे भ्रम बताया. इसे लेकर चिकित्सक के साथ मारपीट की गयी. सूचना पाकर मेडिकल छात्रों का दल पहुंचा और मृतका के परिजन और फिर पुलिस से भिड़ गया. पुलिस ने मेडिकल छात्रों पर रात साढ़े दस बजे लाठी चार्ज कर दिया. कई जूनियर डॉक्टर व इंटर्न चोटिल हो गये. विरोध में जूनियर डॉक्टर आधी रात से हड़ताल पर चले गये.

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

लाठीचार्ज से नाराज जूनियर डॉक्टर्स दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं. शुक्रवार सुबह से ही जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी के मेडिसिन, सर्जनी, गायनी, स्कीन, नेत्र, इएनटी विभाग को बंद करा दिया और दरवाजे में ताला जड़ दिया. गायनी गेट पर नारेबाजी की गयी. साथ ही प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टर्स एसडीएम और प्रभारी डीसी-सह-डीडीसी के आवास पर फरियाद करने पहुंचे. इधर, पीएमसीएच में हंगामा व लाठीचार्ज को लेकर सरकार ने अस्पताल प्रबंधन से जानकारी मांगी है. 

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इन सबके बीच जिला प्रशासन और हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के बीच वार्ता का दौर जारी है. लेकिन इस हड़ताल का सबसे ज्यादा खमियाजा मरीजों और उनके परिजनों को झेलना पड़ रहा है. आये दिन होते ऐसे विवाद और उसके बाद डॉक्टर्स की हड़ताल से गरीब मरीजों को काफी मुसीबत होती है. फिलहाल हड़ताल को देखते हुए पीएमसीएच प्रबंधन ने सभी चिकित्सकों व कर्मियों की छुट्टी कैंसिल कर दी है. तत्काल के लिए 20 मेडिकल अफसर की मांग सिविल सर्जन से की गयी. 

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