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जिस बीजेपी ने चारा घोटाले का पर्दाफाश किया था, अब उसी की सत्ता में रहते झारखंड में भी हो गया चारा घोटाला   

Ranchi: जिस राजनीतिक पार्टी ने संयुक्त बिहार में हुए चारा घोटाला का पर्दाफाश किया था, उसी बीजेपी की सरकार में झारखंड में चारा घोटाला हुआ है. घोटाला करीब पांच करोड़ रुपए का हुआ है. चारा खरीदी के नाम पर एक निजी एजेंसी को कृषि विभाग ने नियमों की अनदेखी कर चारा खरीदने का टेंडर दे दिया. एजेंसी को घोटाला करने में विभाग ने पूरी मदद की. इसके सारे प्रमाण सामने आ चुके हैं. एजेंसी और टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा करने से यह साफ हो चुका है कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट, विजिलेंस, झारखंड फाइनेंशियल रूल, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के नियमों के खिलाफ जाकर जानबूझ कर एजेंसी के पक्ष में सारे फैसले लिये. विभाग ने जिस कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए चारा घोटाला को अंजाम दिया, वो कंपनी आंध्रप्रदेश की कंपनी M/s KPR Agrochem Ltd. है. 

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कैसे हुई घोटाले की शुरुआत

 टेंडर

Sanjeevani

30 अक्टूबर 2016 को एक स्थानीय अखबार में टेंडर संख्या 15063 प्रकाशित किया गया. टेंडर में जानवरों के लिए खनिज युक्त फूड सप्लीमेंट (Mineral Mixture Amino Acid and Vitamin) पांच लाख किलो खरीद कर सरकार को देने की बात थी. हर बैग पांच किलो का होना था. सरकार की तरफ से कोई भी टेंडर NIT Format में निकाला जाता है. लेकिन यह टेंडर NIT Format में नहीं था. इस टेंडर को निकालने के लिए वित्त विभाग का अनुमोदन दरकिनार कर दिया गया और विधि विभाग से भी टेंडर निकालने से पहले अनुमति नहीं ली गयी. टेंडर में आयकर रिर्टन को लगाना अनिवार्य नहीं किया गया. जो हर सरकारी टेंडर निकालने में किया जाता है. सिर्फ कहा गया कि कंपनी अपना टर्नओवर बता दे. पांच लाख पशु पोषाहार खरीदने के लिए 4.65 करोड़ का टेंडर निकाला गया था.

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4.65 करोड़ के टेंडर के लिए टर्नओवर कर दिया 25 करोड़

पशुओं के लिए चारा

टेंडर डालने के लिए काफी सारी कंपनियां ना आ जायें इसलिए जानबूझ कर टेंडर उसी कंपनी को डालने की अनुमति मिली, जिसका टर्नओवर 25 करोड़ का था. ऐसा इसलिए किया गया ताकि आंध्रप्रदेश की कंपनी M/s KPR Agrochem Ltd. को टेंडर दिया जा सके. यहां यह जानना जरूरी है कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश (दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है) में पशुओं के लिए चारा खरीदने से पहले सरकार विभाग राज्य के नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड, मिल्क फीड या फिर कृषि युनिवर्सिटी से जांच कराने के बाद ही चारा खरीदा जाता है. लेकिन झारखंड के पशुपालन विभाग ने चारा खरीदने से पहले किसी तरह की कोई जांच नहीं करायी. चारा की पूरी गुणवत्ता कंपनी के ऊपर छोड़ दी गयी.

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NDDB ने चारे को निगेटिव और निचले दर्जे का बताया

चारे की गुणवत्ता

मार्च 2017 में जब NDDB (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड) ने चारे की गुणवत्ता की जांच की तो चारे को निगेटिव और निचले दर्जे का बताया.  अक्टूबर 2017 में मिल्कफीड ने जब चारे की गुणवत्ता की जांच की, तो अपनी रिपोर्ट में कहा कि कृत्रिम पौष्टिक आहार वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, क्योंकि इसकी लाइफ लो शेल्फ है. लंबे समय तक अगर इस चारे को रखा जाए तो इसका पौष्टिक तत्व यानि Mineral & Vitamin खत्म हो जायेगा. इन सबके बावजूद पशुपालन विभाग ने M/s kpr Agrochem Ltd. को सारा भुगतान कर दिया. जिसे अब एक चारा घोटाला कहा जा रहा है.

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कृषि मंत्री हैं रंणधीर सिंह और सचिव हैं पूजा सिंघल

जब चारा खरीदने के लिए टेंडर निकाला गया तो उस समय से लेकर अबतक कृषि एवं पशुपालन विभाग के मंत्री रंणधीर सिंह हैं. वहीं आजकल अखबारों की सुर्खियां बन रहीं पूजा सिंघल विभाग की सचिव हैं. ये कहा जाना गलत होगा कि इन बातों की जानकारी मंत्री और सचिव को नहीं होगी. करीब पांच करोड़ के इस घोटाले को जिस तरह से अंजाम दिया गया है, उससे साफ है कि यह एक सोची-समझी साजिश है. इस घोटाले के तहत राज्य के पांच करोड़ का बंदरबांट हुआ है.

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(कल पढ़िएः किस हद तक जाकर विभाग ने की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए गड़बड़ी.)

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