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जिले के कई अधिकारियों को भाता है बोकारो, तबादले के कुछ महीने या साल के बाद फिर वापस यहीं आ जाते हैं

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Prakash Mishra
Bokaro 11 December :
बोकारो जिले में एक बार किसी अधिकारी की पोस्टिंग हो जाती है, तो वह यहां से जाना नहीं चाहता है. अगर उनका तबादला कहीं और भी हो जाता है तो एक-दो साल दूसरे जिले में गुजार कर फिर से बोकारो आ जाते हैं. जिले में कई ऐसे भी अधिकारी हैं जो यहां अपना घर तक नहीं छोड़ते. तबादले के बाद भी यहीं से दूसरी जगह ड्युटी करने जाते हैं. शायद उन्हें पता रहता है कि किसी ना किसी तरीके से इंतजाम करके वो वापस बोकारो आ ही जाएंगे.

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इन अधिकारियों का नहीं टूटता बोकारो से मोह

जिले के डीपीएलआर निदेशक एस.एन उपाध्याय, पहले यह पंचायती राज पदाधिकारी और बियाडा के सचिव भी रह चुके थे. यहां से धनबाद गए, उसके बाद बोकारो वापस आ गये. डीआरडीए के निदेशक संदीप कुमार पहले जिला भू-अर्जन पदाधिकारी थे. यहां से तबादले के बाद दूसरे जिला में गये, लेकिन फिर चास नगर निगम के सीईओ बनकर वापस आ गये. और अब वह चास से भी हटकर डीआरडीए में आ गए हैं. अपर समाहर्ता जुगनू मिंज कई वर्षों से बोकारो के ही चक्कर लगाते रहे हैं. यहां एनडीसी, जिला कल्याण पदाधिकारी रह चुके हैं. वहीं बियाडा के सचिव मनोज जायसवाल बोकारो में कार्यपालक दंडाधिकारी रह चुके हैं. इसी जिले के कसमार में बीडीओ भी रह चुके हैं. लेकिन पिछले कुछ साल दूसरे जिले में काम करने के बाद वापस बोकारो हीं पहुंचे. इसी तरह चास अंचल सीओ वंदना शेजवलकर कई वर्षों से बीडीओ, सीओ बनकर इसी जिले में कार्यरत हैं. साथ ही मेनका कुमारी भी तबादले के बाद फिर से बोकारो जिले में ही आ गयी हैं.

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सुनील कुमार की डीसी पद पर दोबारा हुई थी पोस्टिंग

उपायुक्त सुनील कुमार जिले के एकमात्र ऐसे उपायुक्त हैं, जो दो बार इस जिले के उपायुक्त रहे हैं. इनके अलावा अब तक कोई भी डीसी और डीडीसी इस जिले में दोबारा नहीं आया है. वहीं इसी जिले में अपर समाहर्ता रहे बलदेव राज पैरवी सागर यहीं डीडीसी हो गए और यहीं से रिटायर भी हो गए.

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