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जिनके पास खोने के लिए कुछ नहीं, वे आयरलैंड से सीखें

।। जयंत के. सिंह ।।

नई दिल्ली : सभी खेलों की तरह क्रिकेट में भी उलटफेर होते हैं। बीते दिनों विश्व कप मुकाबले में आयरलैंड के हाथों वेस्टइंडीज की हार कोई अनहोनी नहीं है। हर उलटफेट कमजोर टीम की बहादुरी की कहानी नहीं कहता लेकिन आयरलैंड की जीत एक मायने में काफी अहम है। आयरिश टीम की जीत सही मायने में इस बात की मिसाल है कि जिन टीमों के पास खोने के लिए कुछ नहीं होता, वे कम से कम मैदान में दिलेरी तो दिखा ही सकती हैं।

अफगानिस्तान, बांग्लादेश, आयरलैंड, स्कॉटलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और जिम्बाब्वे, ये ऐसी टीमें हैं, जिन्हें इस साल आईसीसी विश्व कप में खिताब का दावेदार नहीं माना जा रहा है। बड़ी टीमें इन टीमों को तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने का जरिया समझती हैं लेकिन यह परिपाटी कई मौकों पर टूटा है और आगे भी टूटता रहेगा।

आयरलैंड के हाथों वेस्टइंडीज की हार और मंगलवार को स्कॉटलैंड द्वारा न्यूजीलैंड को जीत के लिए संघर्ष कराना, इस बात का सबूत है कि कमजोर टीमें अब कुछ ना कुछ करने के इरादे के साथ विश्व कप खेलने पहुंचती हैं। उनका लक्ष्य बेशक विश्व कप खिताब नहीं होता लेकिन वे एक या दो उलटफेर का इरादा लेकर जरूरत खेलती हैं।

उलटफेर दो तरह के होते हैं। एक बड़ी टीम का बेहद खराब खेलना और हार जाना। दूसरा, कमजोर टीम का बड़ी टीम से कहीं बेहतर खेलना और जीत हासिल करना। आयरलैंड ने वेस्टइंडीज को अच्छा खेलकर हराया न कि वेस्टइंडीज खराब खेलकर हारी। उसके पास 304 रनों का योग था, जो आयरलैंड जैसी औसत टीम के लिए बहुत बड़ा लक्ष्य था लेकिन आयरिश टीम उम्मीद से अच्छा खेलकर वह मैच जीती।

2007 विश्व कप में बांग्लादेश के हाथों भारत की हार और आयरलैंड के हाथों पाकिस्तान की हार इस बात का सबूत हैं कि उलटफेर होते रहे हैं और आयरिश टीम को इसकी महारथ हासिल हो चुकी है। सम्पूर्ण पेशेवर माहौल में खेलने वाली आयरिश टीम ने इंग्लैंड को भी हराया था। इंग्लैंड की टीम 327 रन बनाने के बाद भी तीन विकेट से मैच हार गई थी। उसी साल आयरलैंड ने नीदरलैंड्स को भी हराया था।

दरअसल, जिन टीमों का लक्ष्य विश्व कप नहीं होता, उनका लक्ष्य एक या दो उलटफेर करने का होना चाहिए। पूल में अगर कोई औसत दर्जे की टीम तीन मैच जीत जाती है तो फिर उसका अभियान सफल माना जाएगा क्योंकि पांच-छह महारथी टीमों के रहते उसका विश्व कप जीतना तो सम्भव नहीं लेकिन तीन-चार मैच जीतकर अपने लक्ष्य को आंशिक रूप से हासिल किया जा सकता है।

सभी टीमें आयरलैंड जैसा साहस नहीं दिखा पातीं। दशकों से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सक्रिय होने के बावजूद बांग्लादेश टीम मजबूत टीमों के खिलाफ वह साहस नहीं दिखा पाती, जो अपेक्षित होता है। अफगानिस्तान ने हाल के दिनों में अपनी संघर्षशक्ति का परिचय दिया है लेकिन स्कॉटलैंड की टीम ऐसा करने में नाकाम रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ उसका अच्छा खेलना इक्का-दुक्के मौकों में गिना जा सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट के मैदान में बिल्कुल नया है और उसे अभी जीत-हार और उलटफेर का पहाड़ा सीखने में समय लगेगा लेकिन जिम्बाब्वे तो एक बार सेमीफाइनल में भी पहुंच चुका है। जिम्बाब्वे की टीम में भी कुछ कर गुजरने की क्षमता है और यह क्षमता उसे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ प्रदर्शित किया था लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता कि विपक्षी टीम का कप्तान यह कहे कि जिम्बाब्वे ने उसे सचमुच डरा दिया था।

जिनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता, वे दिलेरी दिखा सकते हैं। 1983 विश्व कप में भारत के पास खोने के लिए कुछ नहीं था। अपनी दिलेरी के दम पर भारतीय टीम आखिरकार चैम्पियन बनी थी। भारत की खिताबी जीत हालांकि अतिश्योक्ति के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि उसके बाद आंशिक तौर पर 1996 में श्रीलंकाई टीम ही ऐसा कर पाई।

आईसीसी विश्व कप 2015 में हिस्सा ले रही वे तमाम टीमें, जिनकी गिनती सम्भावित विजेताओं में नहीं होती, ऐसा करने की स्थिति में हैं क्योंकि दिलेरी दिखाने पर ही उन्हें उलटफेर का ईनाम मिल सकता है। बड़ी टीमों के खिलाफ उन्हें हारते हुए देखकर किसी को हैरानी नहीं होगी लेकिन आयरलैंड जैसी टीम के हाथों इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान को हारता देखकर पूरा क्रिकेट जगत उनकी बहादुरी की कहानी कहता है।

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