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जावड़ेकर ने किया ‘प्रेस इन इंडिया’ का विमोचन

नई दिल्ली, 5 नवंबर : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत के समाचारपत्र पंजीयक (आरएनआई) ने अपने क्रियाकलाप में पारदर्शिता पर मुख्य रूप से जोर देने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें से कुछ उपाय पहली बार शुरू किए गए हैं, और मुद्रण उद्योग से जुड़े हितधारकों ने काफी सराहना की है। मंत्री ने बुधवार को ‘प्रेस इन इंडिया’ प्रकाशन का विमोचन किया, जिसमें विश्व भर के अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए प्रेस और मीडिया की स्वतंत्रता को एक आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जबकि भारत में प्रेस काफी तेजी से उभरा, किंतु अपने कार्यकलाप में जवाबदेही होने के कारण उसकी रूपरेखा तैयार करना एक चुनौती रहा है।

मंत्री ने ‘प्रेस इन इंडिया 2013-14’ के विमोचन के लिए आयोजित समारोह में कहा कि आरएनआई ने वार्षिक विवरण की ऑनलाइन ई-फाइलिंग करने, शीर्षक के आवेदनों और पंजीकरण के मामले का शीघ्र निपटारा करने, प्रकाशकों और स्वामियों के ई-मेल और मोबाइल नंबर का डाटा तैयार करने, ऑटोमैटिक एसएमएस सुविधा प्रदान करने, लोगों के सवालों का ऑनलाइन उत्तर देने तथा सूचना और सुविधा काउंटर उपलब्ध कराने, पंजीकृत प्रकाशनों के वार्षिक विवरणों की ई-फाइलिंग शुरू करने जैसे कई उपाय किए।

भारत के समाचारपत्र पंजीयन (आरएनआई) द्वारा तैयार ‘प्रेस इन इंडिया 2013-14’ नामक मुद्रित समाचार माध्यम पर 58वीं वार्षिक रिपोर्ट के विमोचन के अवसर पर जावड़ेकर ने प्रौद्योगिकी को अपनाने के क्षेत्र में इन उपायों की सराहना की।

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पंजीकृत प्रकाशनों द्वारा दाखिल किए गए वार्षिक विवरणों के विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारतीय प्रेस के सामान्य रूझान का व्यापक विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट में अनेक अध्याय शामिल किए गए हैं, जैसे-समाचारपत्रों का स्वामित्व, दैनिक समाचारपत्रों का विश्लेषण, प्रेस का भाषा-वार अध्ययन और पंजीकृत समाचारपत्रों का विश्लेषण आदि।

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यह प्रकाशनों द्वारा किए गए दावे के अनुसार वितरण संबंधी आंकड़े का एक संकलन भी है। प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम 1867 के अधीन एक वैधानिक दायित्व के रूप में आरएनआई द्वारा प्रतिवर्ष यह रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रिंट मीडिया ने वर्ष 2013-14 के दौरान कुल 5642 नए प्रकाशनों के पंजीकरण के साथ विगत वर्ष की तुलना में 5.95 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है। 31 मार्च 2014 तक कुल 99,660 पंजीकृत प्रकाशनों में से 40,159 प्रकाशन हिंदी में हैं, जो किसी भारतीय भाषा में पंजीकृत समाचारपत्रों और आवधिक पत्रिकाओं की तुलना में सबसे अधिक हैं। अंग्रेजी में समाचारपत्रों और आवधिक पत्रिकाओं की संख्या 13,138 के साथ दूसरे स्थान पर है।

दावे के अनुसार समाचार पत्रों का कुल वितरण 45,05,86,212 रहा, जबकि 2012-13 में यह 40,50,37,930 प्रतियां थीं। वर्ष 2013-14 के लिए आरएनआई में प्राप्त वार्षिक विवरणों की संख्या 19,755 थी, जबकि 2012-13 में यह संख्या 19,007 थी, जो 3.93 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। (आईएएनएस)

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