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जामताड़ाः मिनी जलापूर्ति योजना नहीं बुझा पा रही ग्रामीणों की प्यास

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Jamtara, 07 December : सरकार की योजना धरातल पर उतरे चाहे नहीं उतरे लेकिन कागज पर जरूर उतर जाती है. जिले के हर गांव में मिनी जलापूर्ति योजना के तहत मिनी जलमिनार का निर्माण कराया गया. ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेय जल मुहैया करया जा सके. लेकिन अफसोस की बात यह है कि बनने के साथ ही यह योजना खटाई में चली गयी. कमोबेस जितने भी मिनी जलापूर्ति योजना है आज खराब पड़ा हुआ है. विभाग द्वारा यही बताया जाता है कि मोटर जल गया है, बिजली नहीं पहुंच पाया है, स्टार्टर जल गया है. बनने के साथ ही मोटर और स्टार्टर जल जाना ये विभाग और संवेदक के कार्य की गुणवत्ता को दर्शता है.

आंधी-पानी में गिर गया टंकी

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मजे की बात तो यह है कि मिनी जलापूर्ति योजना के तहत बनाया गया जलमिनार आंधी-पानी में गिर जाता है. लेकिन विभाग कि ओर से कोई कार्रवाई नहीं किया जाता है. आंधी पानी से जलमिनार का गिर जाना कार्य की गुणवक्ता को दर्शाता है. फतेहपुर प्रखंड के अंगुठिया गांव में बना मिनी जलमिनार 20-06-2017 को आयी आंधी पानी में गिर गया. तब से अभी तक गांव में जलापूर्ति योजना का पानी बंद है.

जिला परिषद की बैठक में महज खनापूर्ति

उल्लेखनीय है कि यह रिपोर्ट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जिला परिषद की बैठक में जमा किया था. जिस बैठक में जिला अध्यक्ष से लेकर जीप सदस्य, सांसद प्रतिनिधि, विधायक प्रतिनिधि और जिले उपविकास आयुक्त सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद होते हैं. लेकिन इस बात पर किसी का ध्यान नहीं गया. आखिर क्यों मिनी जलापूर्ति योजना की टंकी आंधी-पानी में गिर गयी. सभी जनप्रतिनिधि अपने–अपने कार्य में व्यस्त रहते हैं. बैठक में मिलने वाली विभागीय रिपोर्ट की समीक्षा पर किसी के द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता है. बस बैठक में रिपोर्ट के तौर पर जो मिला उसे संभालकर घर ले आते हैं. चाय-नास्ता के बाद बैठक खत्म हो जाता है. पदाधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि यही दावा करते हैं कि जनहित में कार्य करते हैं.

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