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जामताड़ाः पदाधिकारियों और बैंककर्मियों को दिया गया क्यूआर कोड का प्रशिक्षण

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News Wing Jamtara, 27 November: जामताड़ा समाहरणालय सभागार में सोमवार को जिले के पदाधिकारी व बैंक कर्मियों को क्यूआर कोड का प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपायुक्त रमेश कुमार दूबे मौजूद थे. मौके पर डीआइओ अभय परासर ने भारत क्यूआर कोड के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दिया. उन्होंने बताया की क्यूआर कोड, जिसे क्विक रिस्पोंसिबल कोड भी कहा जाता है. यह ट्रेड मार्क के लिए एक तरह का मैट्रिक्स बार कोड होता है. इस मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी नवीन कुमार, जिला परिवाहन पदाधिकारी महेंद्र मांझी, जिला जनसंर्पक पदाधिकारी प्रतिभा कुजूर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

कैसे काम करता है क्यूआर कोड

क्यूआर कोड का इस्तेमाल कई व्यावसायिक क्षेत्रों में होने लगा है. आम तौर पर क्यूआर कोड स्कैनर के रूप में एक स्मार्ट फोन का प्रयोग होता है, जो इसे स्कैन करके उसे स्कैनिंग को वेवसाइट के अनुरूप उपयोगी फॉम में तब्दील कर देता है. मुख्यत: ये एक स्टैंडर्ड यूआरएल देता है. ये तकनीक एडवरटाइजिंग स्ट्रेटेजी के तौर पर बहुत महत्वपूर्ण हो चुकी है. उन्होंने बताया की वस्तु के ब्रांड वेबसाइट को यूआरएल से अधिक तेज रूप से अस्सेस करने की सुविधा देता है. कहा की इसका प्रयोग कमर्शियल, ट्रैकिंग, ट्रांसपोर्ट, मार्केटिंग आदि क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण हो चुका है.

भारत क्यूआर कोड कैसे उत्पन्न करें

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अब डिजिटल पेमेंट के लिए दुकानदार को पीओएस मशीन की कोई आवश्यकता नहीं पड़ने वाली है. डिजिटल पेमेंट ग्रहण करने के लिए अब सिर्फ भारत क्यूआर कोड बनाने की आवश्यकता है. इसके लिए दुकानदार को ऐसे बैंक अकाउंट की आवश्यकता पड़ेगी, जो आधार के साथ– साथ भीम एप से भी संलग्न हो. भीम ऐप से ही भारत क्यूआर कोड का निर्माण होता है. जब भी भीम एप्लीकेशन से प्राप्त होने वाले क्यूआर कोड प्रिंट करा कर दुकानदार अपने पेमेंट डेस्क पर चिपका के रख सकते हैं. जब भी किसी ग्राहक को भुगतान करना होगा, वे इस क्यूआर कोड को अपने मोबाइल के भीम एप्लीकेशन से स्कैन करके भुगतान कर सकेगा. 

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