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जहां बहुफसली खेती से किसानों ने बदल ली थी अपनी तकदीर, आज नगड़ी कोयला डंपिग यार्ड के कारण बेहाल हैं किसान (देखें वीडियो)

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Pravin Kumar

Ranchi, 03 December : नगड़ी रेलवे स्टेशन ने किसानों को यातायात का नया साधन मुहैया कराया था. आज वही स्टेशन आसपास के किसानों को नासूर बनता जा रहा है. रेलवे स्टेशन में बने कोयला डंपिंग यार्ड आस पास के किसानों के फसलों के विनाश का कारण बन रहा है. स्थानीय लोग बताते हैं कि  लगभग तीन माह पहले नगड़ी रेलवे स्टेशन में कोयला डंपिंग यार्ड बनाया गया था. यार्ड के बनने के बाद से स्टेशन के आस पास रहने वाले स्थानीय निवासियों का जीवन बद से बदतर होता जा रहा है. आसपास सब्जी की खेती करने वाले किसान काफी परेशान हैं. वे कहते हैं कि उनकी परेशानी और समस्याओं को हल करने वाला कोई नहीं. जिला के पदाधिकारियों की बात तो दूर, यहां के जन प्रतिनिधियों को भी इन समस्याओं के प्रति कोई रूचि नहीं है. इस वजह से किसानों में अक्रोश भरा हुआ है. नाराज किसान कहते हैं कि चुनाव के समय जब नेता गांव आयेगें तब उन्हें हम भी सबक सिखायेंगे.

दबंगों और प्रशासन की मदद से चल रहा कारोबार

नाम नहीं लिखने की शर्त पर एक जानकार ने बताया कि नगड़ी में जब डंपिंग यार्ड खुलने के वक्त कई बाहुबलियों में वर्चस्व की जंग छिड़ गयी थी. कहा कि इस पूरे कारोबार को कई दबंग लोग और पुलिस प्रशासन के सहायोग से संचालित किया जा रहा है. जिसके खिलाफ आवाज उठाने की कोई हिम्मत नहीं करता. अफसरशाह से लेकर पुलिस प्रशासन भी यहां गरीब किसानों को किसी प्रकार की मदद नहीं करते. प्रशासनिक महकमा खामोश है. कोयले का धंधा जोर-शोर से चल रहा है.

सब्जी की खेती के लिए जाना जाता है नगड़ी

नगड़ी वह इलाका है जो सब्जी की खेती के लिए पूरे राज्य भर में जाना जाता है. यहां के किसान अपने छोटे-छोटे जमीन के टुकड़ों पर मेहनत करके कई तरह के फसल उगाते हैं. शायद ही कोई मौसम ऐसा हो कि खेत वीरान रहता हो. हर मौसम में खेत में फसल लहलहाते हुए नजर आते हैं. लेकिन किसानों का यह दुर्भाग्य ही है कि जब से रेलवे ने कोयला डंपिंग यार्ड बनाया है फसलों की पैदावार घटती जा रही है. स्थानीय किसान अपने पालतु पशुओं को भी भोजन पूरी तरह उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं. कोयले की धूल से आसपास के इलाके में काली परत जम गयी है, जिस वजह से मवेशी भी घास नहीं खा पा रहे.

किसानों की आमदनी में आयी दस गुणा गिरावट

नगड़ी रेलवे स्टेशन कोयला डंपिंग यार्ड से प्रभावित होने वाली कुल आबादी लगभग एक हजार से अधिक है. टिकटोली, गोसाई टोली, स्वीटम टोली और सरना टोली के लोग इस यार्ड के प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित हैं. यहां के सभी परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन खेती है. एक बुजुर्ग किसान अपने खेतों में ले जाते हुए कहते हैं कि देखो हमारी फसल को, बैगन और सीम के पौधे को, जब से कोयला साइडिंग खुला है हमारी फसल बर्बाद होते जा रही है. जिस खेत से हमारी आमदनी दस हजार होती थी आज 1000 भी होने की संभावना नहीं है. फसल में फूल तो लगते हैं लेकिन धूल के कारण फल नहीं लग पाता. वहीं हमारी फरियाद कोई नहीं सुनता. दबंगों के डर से हम लोग चुपचाप बैठे रहते हैं. बुजुर्ग किसान ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हम कब तक हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहेंगे. हम अपने खेतों को बंजर होता हुआ और अपने बच्चों को भूखे मरता हुआ नहीं देख सकते. सरकार के लोग और रेलवे ने यह गलत किया है.

दुकान में सामान से ज्यादा दिखती है कोयले की धूल

स्थानीय दुकानदार सुबोध महतो कहते हैं कि रेलवे स्टेशन के करीब हम वर्षों से अपना दुकान चलाते आ रहे हैं. कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. लेकिन जब से कोयला डंप होने लगा हमारी दुकान में सामान से ज्यादा कोयले की धूल दिखायी पड़ती है. सभी किराना सामान को ढक कर रखना पड़ता है. पहले दुकान में सामान को बोरे में भी रखा करते थे लेकिन अब बोरी में रखे हुए सामान में कोयले की धूल चली जाती है, जिससे सामान बर्बाद हो जाता है. अब मजबूरीवस हम सामान नहीं रख पाते. हम स्थानीय बाशिंदे हैं, वर्षों से यहां रह रहे हैं. कोयला डंपिंग के कारण हमारी जिंदगी बदतर होती जा रही है.

मवेशियों के लिए चारा लाने में भी हो रही दिक्कत

गृहणी शांति देवी बताती हैं कि जब से कोयला साइडिंग खुला है हमारी फसलें तो बर्बाद हो ही रही है. हमें अपने मवेशियों के लिए चारा या घास लाने में काफी मेहनत करना पड़ रहा है. हमारी बकरी, बैल अब खेतों में जा कर घास नहीं चर रहे हैं. लगता है मवेशियों के साथ हमारे सामने भी भुखमरी की स्थिति आ सकती है.

कोयला डंपिंग ने जीवन बर्बाद कर दिया

बसंती उरांव अपने खेत में ले जाती हैं. फ्रेंचबीन तोड़ते हुए कहती है देखो बाबू इसमें कितना फसल लगा है. एक पौधे में सिर्फ दो-चार फ्रेंचबीन लगे हुए हैं. पहले तो खूब फसल लगते थे लेकिन अब फसलों की पैदावार बहुत कम हो गयी है. फसल तोड़ते हैं तो हाथ पूरा काला हो जाता है. ऐसे में हम अपने बच्चों को कैसे पालेंगे. हम लोगों के आय का एकमात्र साधन खेती है. खेत में काम करते हुए शाम को जब घर जाते हैं तो हमारे नाक से पानी गिरने लगता है. अधिकांश महिलाएं इस इलाके के इस समस्या की शिकार होते जा रही हैं. कोयला डंपिंग ने हमारा जीवन बर्बाद कर दिया है. हम क्या करें यह समझ में नहीं आता.

डंपिंग प्वाइंट नहीं हटा तो बेमौत मरेंगे किसान

नाथूराम उरांव बताते हैं कि कोयला डंपिंग और ट्रकों के आवाजाही से कोयले के धूल की परत करीब 2000 लोगों को प्रभावित कर रही है. कहा कि हमारे खेत की मिट्टी अब काली दिखने लगी है. आने वाला समय हम लोगों के लिए संकट भरा होगा. सरकार अगर यहां से डंपिंग प्वाइंट नहीं हटाती तो इस इलाके के किसान बेमौत मारे जाएंगे.

कहां है नगड़ी रेलवे स्टेशन

नगड़ी रेलवे स्टेशन एनएच 23 पर स्थित है. इसकी दूरी रांची से करीब 15 किलोमीटर है. पिछले तीन माह से रोहिणी, पुरनाडीह, पिपरवार, अशोका मगध, देवरिया, आम्रपाली कोलियरी से ट्रक के माध्यम से कोयला नगड़ी रेलवे स्टेशन लाया जाता है. इसके बाद ट्रेन के माध्यम से कई स्थानों पर भेजा जाता है.

क्या कहते हैं नगड़ी के स्टेशन मास्टर

जब स्टेशन मास्टर से जानना चाहा कि यह कोयला कहां से आता है तो उन्होंने इस संबंध में अपनी अनभिज्ञता प्रकट की. स्टेशन मास्टर ने कहा कि हम नहीं जानते हैं सारा मामला रांची से तय होता है. जब उनसे पूछा कि कोयला डंपिंग के लिए क्या भूमि अधिग्रहण किया गया तो इस संबंध में भी उन्होंने चुप्पी साध ली.

रेलवे डीसीएम नीरज कुमार का क्या कहना है

रेलवे प्रदूषण के सभी मापदंड को पूरा कर रहा है. अगर स्थानीय किसानों की किसी तरह समस्या हो रही है तो मैं पुन: जांच का आदेश दूगा. मैं सोमवार को स्वयं जाकर स्थिति का जायजा लूंगा.

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