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जल प्रबंधन नहीं होने से रांची शहर बना ड्राई जोन, निगम की योजनाएं घरातल पर नहीं

Ranchi :  रांची शहर इन दिनों विकराल पानी संकट से जूझने को विवश है. अंधाधुंध विकास कार्यों को लेकर वैसे तो कई इलाकों में डीप बोरिंग द्वारा भूजल से पानी निकाला जा रहा है, लेकिन जल प्रबंधन की दिशा में विशेष उपाय नहीं होने से शहरवासी पानी की किल्लत झेल रहे हैं. नीति आयोग द्वारा जारी जल समेकित सूचकांक रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि जल प्रबंधन की दिशा में झारखंड की स्थिति काफी खराब है. हालांकि निगम द्वारा इस दिशा में कुछ योजनाएं भी बनायी गयीं, लेकिन लापरवाही के कारण उक्त योजनाएं घरातल पर पहुंच ही नहीं पायी है. इसका साक्ष्य राजधानी के कई भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सुविधा का नहीं होना है. इस स्थिति में रांची शहर आज पूरी तरह से ड्राई जोन घोषित होने के कगार पर है.

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300 से 400 फीट की गहराई में पानी नहीं

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पर्यावरणविदों की मानें तो एक समय था, जब राजधानी में महज 50 से 60 फीट की गहराई पर ही पानी मिल जाता था. जबकि आज स्थिति यह है कि शहर के कई हिस्सों में 300 से 400 फीट बोरिंग की गहराई में भी शहरवासियों को पानी नहीं मिल पा रहा है. शहर के मुख्य इलाकों की स्थिति को देखा जाये, तो रातू रोड में 500 फीट, कांके व तुपुदाना में 400 फीट, हरमू इलाकों में 300 फीट की गहराई पर भी लोगों को पानी मुश्किल से ही मिल पाता है.  

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निगम की लापरवाही के कारण नहीं हो रहा जल प्रबंधन

शहर की सौंदर्यीकरण योजना के नाम पर निगम पहले ही शहर के कई तालाबों को सुखा चुका है. लेकिन उसके द्वारा जल संरक्षण की दिशा में जितनी भी योजनाएं बनाई गयी हैं, सभी योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हुई हैं. बात अगर वाटर हार्वेस्टिंग की की जाये,  तो खुद नगर निगम अपने भवन में इसे लागू नहीं कर सका है. नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक गत मार्च माह में स्पैरो सॉफ्टटेक एजेंसी के माध्यम से सभी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था के लिए एक असेसमेंट भी करवाया गया था, लेकिन निगम की यह कार्रवाई अभी तक कागज पर ही सीमित है.

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61 जलमीनारों की है जरूरत, वर्तमान में है कुल 22

जुडको से जुड़े प्रोजेक्ट डायरेक्टर (टेक्निकल) सुधीर कुमार साहू से न्यूज विंग रिपोर्टर ने जलापूर्ति की दिशा में किये जा कार्यों की जानकारी ली. उनके मुताबिक शहर के कुल 53 वार्डो में जुडको द्वारा दो फेज में जलापूर्ति योजना पर काम किया जा रहा है. योजना के तहत प्रथम फेज में 41 वार्ड को टारगेट किया गया है, जिसमें से कुल 18 वार्ड को पूरी तरह से कवर किया जा रहा है और 23 को पार्शियली. वहीं जुडको के सर्वें के मुताबिक 2050 तक इन 41 वार्ड में कुल जनसंख्या 13,17,116 अनुमानित है. इसी को लक्षित कर रांची शहर को 150 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी देने की योजना पर काम किया जा रहा है. शहर में हो रही पानी की किल्लत को लेकर वर्तमान में कम से कम 61 जलमीनारों की जरुरत है. इस दिशा में जब प्रोजेक्ट डायरेक्टर से शहर में कुल जलमीनारों की संख्या पर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि प्रथम फेज के तहत पहले से रांची शहर में कुल 22 जलमीनारें काम कर रही हैं. अब 14 जलमीनारों को बनाने का काम जुडको द्वारा किया जा रहा है. यह कार्य उन्हीं इलाकों में किया जा रहा है जहां निगम द्वारा पाइपलाइन बिछा दी गयी है.

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