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जमीन के दस्तावेज देखे बिना सरकार ने दिया अमेटी को यूनिवर्सिटी का दर्जा, प्रबंधन और अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं

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Kumar Gaurav
Ranchi, 01 December : 16 मार्च 2016 को विधानसभा के बजट सत्र में पांच शैक्षणिक विधेयक को पास किया गया था. इनमें से एक प्रज्ञान यूनिवर्सिटी का फर्जी मामला न्यूज विंग पहले ही उजागर कर चुका है. निजी विश्वविद्यालयों के फर्जीवाड़े की विस्तार से छानबीन करने पर पता चला कि अमेटी यूनिवर्सिटी यूजीसी के मापदंडों को पूरा किये बिना झारखण्ड में चल रहा है. इस मामले में अमेटी प्रबंधन से संपर्क करने उन्होंने सवालों के जवाब देने से साफ़ इनकार कर दिया. 
सरकार की तरफ से भी इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया. दरअसल अमेटी यूनिवर्सिटी को बिना जमीन चिन्हित किये ही झारखण्ड में निजी विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया. यह यूजीसी के नियमों के खिलाफ है. ऐसे में झारखण्ड सरकार ने अमेटी को यूनिवर्सिटी का दर्जा कैसे दे दिया? 

जमीन, कैंपस, बिल्डिंग संबंधी जानकारी नहीं दी

मालूम हो कि मार्च 2018 में अमेटी यूनिवर्सिटी को झारखण्ड में तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे. लेकिन अभी तक सरकार जमीन नहीं दे पाई है. मामला यह है कि अगर सरकार जमीन तुरंत मुहैया करा भी देती है तो क्या दो साल में यूजीसी के नॉर्म्स के हिसाब से ब्लिडिंग व कैंपस तैयार हो पायेगा. बिल्डिंग और कैंपस को लेकर यूजीसी के गाइडलाइन्स काफी विस्तृत हैं. उनको फॉलो करते हुए अगर दो साल में बिल्डिंग तैयार भी दी जाती है दिखाने के लिए तो गुणवत्ता मापदंडों पर वह केवल खानापूर्ती होगी. ऐसे में छात्रों के जान पर हमेशा खतरा बना रहेगा. हमारी झारखण्ड सरकार के पास फिलहाल ना तो निजी विश्वविद्यालयों के फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए कोई सक्रिय मुस्तैद बॉडी या एजेंसी है और ना ही कोई मैकेनिज्म. प्रज्ञान विवि के मामले में भी हमने देखा है कि खुद सरकार के लोग ही यूनिवर्सिटी के समारोह में फोटो खिंचवा रहे हैं. इसी तरह इक्फाई यूनिवर्सिटी के मामले में भी डेडलाइन पार होने के बाद कैंपस का निर्माण नहीं हो पाया है. लेकिन झारखण्ड सरकार विवि पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. 

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25 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का किया है अनुरोध

अमेटी यूनिवर्सिटी रांची की स्थापना हेतु जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने मुख्यमंत्री के सचिव सुनील कुमार वर्णवाल को पत्र भी लिखा है. अवगत कराया है कि प्रासंगिक पत्र के माध्यम से डाॅ. अतुल चैहान अध्यक्ष,  रितानंद बालदेव एजुकेशन फाउंडेशन के दवारा सरकार से अपनी शर्तो पर यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए 25 एकड़  जमीन उपलब्ध करवाने की मांग की है.  इस संबंध में केके सोन के दवारा 11 नवंबर को प़त्र लिखा गया है. इससे ये प्रमाणित होता है कि सरकार अभी तक जमीन मुहैया करा पाने में सफल नहीं हो पाई है.

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निजी विवि स्थापना के लिए यूजीसी का नियम

यूजीसी नियमावली के अनुसार प्राईवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्रपोजल में कुल 27 प्वाइंटस का जिक्र है. इन्हें पूरा करने के बाद ही यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जा सकता है. इनमें से एक यह है कि विवि को प्रपोजल में जमीन से संबंधित पूर्ण दस्तावेज मुहैया कराना होगा. दस्तावेज में जमीन के मालिकाना हक,  ढांचागत विकास,  ढांचागत सुविधाओं से संबंधित कई जानकारियां देनी पड़ती हैं. उसके बाद ही यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल सकता है. 

अमेटी यूनिवर्सिटी फिलहाल रेंट के मकान में

रांची में अमेटी यूनिवर्सिटी का पहला बैच 2016 से शुरु हुआ है. फिलहाल अमेटी यूनिवर्सिटी रांची की पढाई रेंट के बिल्डिंग में हो रही है. यह बिल्डिंग मेन रोड ओवरब्रिज के पास निवारणपूर में है. इसे सिटी कैंपस के रूप में दर्शाया जा रहा है. जबकि हकीकत यह है कि अमेटी की अपनी कोई स्थाई ब्लिडिंग तो दूर कोई जमीन भी नहीं है. अगर ये सिटी कैंपस है तो इसकी मेन ब्लिडिंग का कोई न कोई पता तो होगा. ये बता पाने में अमेटी यूनिवर्सिटी असमर्थ है.
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यूजीसी की वेबसाइट पर अमेटी से संबंधित नहीं है कोई सूचना
यूजीसी की प्राईवेट यूनिवर्सिटी की साइट पर अमेटी यूनिवर्सिटी का नाम तो है पर इससे संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. न तो कोई नंबर है और न ही किसी तरह की और जानकारी मिल पाती है. किस तरह के कोर्सेज का संचालन यह यूनिवर्सिटी झारखण्ड में कर रही है, इससे संबंधित भी कोई जानकारी नहीं है. 

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अधिकारी की चुप्पी छात्रों के भविष्य के लिए खतरनाक
इस मामले में कोई जानकारी मैं अभी नहीं दे पाउंगा. ये पूछने पर कि क्या आपने ही खत लिखा है तो भी उनका कहना था की मैं कोई जानकारी साझा नहीं कर पाउंगा. – केके सोन
हम यहां अभी रेंट की बिल्डिंग में कोर्सेज का संचालन कर रहे हैं. हमें जमीन मिल गयी है. दिसंबर माह से स्थाई कैंपस का निमार्ण कार्य चालू हो जाएगा. प्रबंधन ने स्थान बताने से साफ़ इंकार कर दिया. कहा हम इसे डिसक्लोज नहीं कर सकते. – अमेटी प्रबंधन
 

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