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जनजातीय भाषा विभाग रांची विश्वविद्यालय में आयोजित सरहुल महोत्सव में नहीं पहुंचे सीएम रघुवर दास

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Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की नींव पड़ने के समय से ही वहां कर्मा एवं सरहुल महोत्सव का आयोजन होता रहा है. झारखंड बनने के बाद इस कार्यक्रम में अबतक जितने भी मुख्यमंत्री बने हैं, सभी ने शिरकत की है. रघुवर दास भी पूर्व में आयोजित महोत्सव में शिरकत कर चुके हैं. पिछले दो वर्षों से आदिवासी समुदाय द्वारा सत्तारूढ भाजपा के मुख्यमंत्री रघुवर दास का विरोध कई मौकों पर किया जा चुका है. हाल में कुरमी समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने की अनुशंसा किये जाने से आक्रोशित विभिन्न आदिवासी संगठनों ने मुख्यमंत्री का विरोध कर रहे हैं. जनजातीय विभाग द्वारा आयोजित आज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, खेल मंत्री अमर कुमार बाउरी को इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. जिसे मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर विभागध्यक्ष त्रिवेणी नाथ साहु को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना दी गयी थी. कार्यक्रम की शुरुआत तक विभागाध्यक्ष के द्वारा कहा गया कि मुख्यमंत्री थोड़ा विलंब से पहुंचेंगे, मगर विरोध के भय से मुख्यमंत्री समेत सरकार के कोई भी मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हुये.

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मुख्यमंत्री रघुवर दास को भेजा गया आमंत्रण पत्र

आदिवासी संगठनों ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध का एलान किया था

विभिन्न आदिवासी संगठनों ने मुख्यमंत्री के सरहुल कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध करने का एलान किया था. आदिवासी संगठन कुरमी को आदिवासी में शामिल करने की अनुशंसा करने के बाद से सरकार से नाराज चल रहे हैं.

जनजातीय विभाग में आयोजित सरहुल महोत्सव में अब तक के सभी मुख्यमंत्री होते रहे हैं शामिल

जनजातीय विभाग में हर वर्ष सरहुल व करमा महोत्सव का आयोजन होता रहा है, और इस कार्यक्रम में अबतक के झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत सभी मुख्यमंत्री शामिल हुये हैं. मगर इस वर्ष विभिन्न आदिवासी संगठनों के द्वारा कुरमी को आदिवासी में शामिल करने की अनुशंसा करने के बाद नाराज संगठनों के द्वारा विरोध की आशंका को देखते हुये मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल ही नहीं हुये. इस कार्यक्रम में कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय, विधायक गंगोत्री कुजूर आदि शामिल हुये.

2015 में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कार्यक्रम में सरहुल महोत्सव में की थी ये घोषणा

2015 में आयोजित सरहुल महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि भाषा व संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार कृत संकल्प है. भाषा व संस्कृति हमें जोड़ने का काम करती है. भाषा और संस्कृति को बचाये रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा था कि क्षेत्रीय भाषाओं में शोध के लिए शोध संस्थान की स्थापना की जायेगी ताकि, यहां पढ़ रहे विद्यार्थी इन भाषाओं पर शोध कर सके. मुख्यमंत्री ने माना था कि राज्य में शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं है. आज भी गांव में आदिवासी महिलाएं अशिक्षित हैं. पांचवीं क्लास के बाद बच्चियां पढ़ाई छोड़ रही हैं. उन्होंने कहा था कि इस सत्र के बाद गांव-गांव में जाकर ऐसी बच्चियों को खोज कर उन्हें स्कूल लाने का काम किया जायेगा.

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