न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

छोटानागपुर खादी ग्रामोद्योग ने बिना अनुमति काट डाले सात हरे-भरे पेड़

82

Subhash Shekhar, Ranchi : एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधे लगाने के लिए अरबों रुपये पानी की तरह खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर रांची में हरे-भरे पेड़ों को बिना अनुमति के काटा जा रहा है. खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा प्रमाणित छोटानागपुर ग्रामोद्योग संस्‍थान के सर्वोदय आश्रम तिरिल के पास एक-दो नहीं सात पेड़ों को काट दिया गया.

पेड़ की डाली और पत्‍तों से ढंक रहे थे प्रचार होर्डिंग्‍स

स्‍थानीय लोगों ने बताया कि इन पेड़ों को खादी वालों ने कटवाया है. पेड़ों की टहनियों और पत्‍तों की वजह से उनका प्रचार का होर्डिंग बोर्ड छिप जा रहा था, इसलिए सर्वोदय आश्रम के लोगों ने 17 दिसंबर के दिन अहले सुबह दो मजदूर लगाकर पेड़ों को कटवा दिया.

hosp3

इसे भी पढ़ेंः घर-घर बिजली का नाम होगा भगवा क्रांति, जनता इसका दूसरा अर्थ ना लगा लें : रघुवर दास

पेड़ काटने के लिए स्थानीय लोग जिम्मेदार

इधर, छोटानागपुर खादी ग्रामोद्योग संस्‍थान के सर्वोदय आश्रम के जिम्‍मेदार लोग पेड़ काटने के मामले पर खुद को अनजान जाहिर कर रहे हैं. सर्वोदय आश्रम के सचिव अभय कुमार चौधरी ने बताया कि हमें नहीं मालूम कि रोड साइड के पेड़ किसने काटे हैं. इस तरह आश्रम के अंदर भी पेड़ कटते रहते हैं. उन्‍होने इसके लिए स्‍थानीय लोगों को जिम्‍मेदार बताया.

बड़ा सवाल

यह तो तय है कि सर्वोदय आश्रम के सामने जो सात पेड़ काटे गये हैं, वह बिना अनुमति के काटे गये हैं. इसीलिए इसकी जिम्‍मेदारी और जवाबदेही के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है. लेकिन इन हरे-भरे पेड़ों को किसने काटे यह जांच का विषय है.

इसे भी पढ़ेंः गुजरात, हिमाचल में बीजेपी की जीत पर बोले हेमंत – जल्दी ही यह टाइटेनिक की नांव डूब जायेगी

क्‍या कहता है कानून

बिना सरकारी अनुमति के पेड़ों को कटना एक दंडनीय अपराध है. अगर पेड़ काटना जरूरी है तो भी इसके लिए एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका पालन करना अनिवार्य है. नियमों का उल्लघंन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है. इसके लिए एक अधिकारी होता है जिसे ट्री ऑफिसर कहा जाता है. फॉरेस्ट ऑफिसर ही यह ट्री ऑफिसर का काम देखता है.

दो स्थिति में काटे जाते हैं पेड़

एक तो विशेष परिस्थिति दूसरे साधारण परिस्थिति. अगर आंधी तूफान या किसी अन्य प्राकृतिक कारणों से पेड़ की डाली टूट गई हो या फिर आधा पेड़ सड़क पर आ गया हो तो ऐसे पेड़ काटे जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए कानूनी प्रावधान यह है कि अगर समय है तो इस बारे में संबंधित अधिकारी यानी ट्री ऑफिसर को सूचित किया जाना चाहिए या इसके लिए भी समय नहीं है तो पेड़ काटने के बाद इसके बारे में तुरंत ट्री ऑफिसर को सूचित किया जाए.

सामान्य तौर पर भी पेड़ काटने के पहले ट्री ऑफिसर को यह बताना होता है कि पेड़ काटना क्यों जरूरी है. कारण अगर जायज होगी तो ट्री ऑफिसर पेड़ काटने की इजाजत दे सकता है. लेकिन किसी भी परिस्थिति में काटे गए पेड़ के बदले ट्री ऑफिसर पेड़ काटने वालों को यह आदेश दे सकता है कि एक पेड़ के बदले उन्हें इतने पेड़ लगाने होंगे. अगर बिना इजाजत और तय नियम का उल्लघंन करते हुए कोई पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: