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‘चिपको आंदोलन’ की 45वीं वर्षगांठ, गूगल ने डूडल बनाकर दिलाई इसकी याद

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New Delhi : ‘चिपको आंदोलन’ की 45वीं वर्षगांठ पर सर्च इंजन गूगल ने डूडल बना लोगों को इस महत्वपूर्ण आंदोलन की एक बार फिर याद दिलाई और आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया. ग्लोबल वॉर्मिंग, जलवायु परिवर्तन जैसी कई समस्याओं के कारण आज भी न केवल इस आंदोलन की प्रासंगिकता कायम है बल्कि इसका महत्व पहले से कई अधिक बढ़ गया है. ऐसे में गूगल का यह डूडल हमें पर्यावरण के प्रति हमारी कम होती सतर्कता को एकबार फिर जीवित करने का एक प्रयास प्रतीत होता है.

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साल 1973 में चमोली में हुई थी चिपको आंदोलन की शुरूआत

मानव जीवन के लिए जंगलों और पेड़ों की अनिवार्यता को सशक्त रूप से पेश करने वाले ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत वर्ष 1973 में चमोली से हुई थी. पर्यावरणविद् और गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता चंडी प्रसाद भट्ट ने 1973 में मंडल गांव के पास इस आंदोलन का नेतृत्व किया था. इस आंदोलन से सुन्दरलाल बहुगुणा दुनिया भर में सुर्खियों में आए और आंदोलन विश्व में चर्चा का विषय बना. जंगल के ठेकेदारों के खिलाफ इस आंदोलन में लोग पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनसे चिपक कर खड़े हो जाते थे.

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चिपको आंदोलन में महिलाओं ने निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

‘चिपको आंदोलन’ में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं और इस तरह संघर्ष से दिक्षा प्राप्त कर महिलांए जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ी और इसी को ध्यान में रखते हुए गूगल ने अपने डूडल में ग्रामीण महिलाओं को पेड़ से चिपके हुए दिखाया है. ऐसा माना जाता है कि आंदोलन की प्रेरणा राजस्थान के बिश्नोई समाज के खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए किए गए आंदोलन से ली गई थी, जो कि अब लुप्त होने की कगार पर है.

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