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चार माह बाद रघुवर ने फिर अलापा 2015-16 का राग, पिछले साल भी कहा था 2017 में खत्म होगा उग्रवाद, अब कहा 2018

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Ranchi :सीएम रघुवर दास ने घाटशिला के मऊभंडार में आयोजित रंकिणी महोत्सव में रविवार को 93 करोड़ 31 लाख की 43 योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन और शिलान्यास किया. उस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड में 2018 के अंत तक राज्य से उग्रवाद का सफाया हो जायेगा. उग्रवाद के खत्म होने से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा. झारखंड अलग राज्य बनने के साथ ही उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रेरित हिंसाएं इसे विरासत में मिली थीं. तभी से बहुत कोशिशों के बावजूद भी इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है. झारखंड में समस्याओं की कोई कमी नहीं है. शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी, कुपोषण जैसी समस्याएं तो हैं ही लेकिन इन सबसे बड़ी और गंभीर समस्या है- नक्सलवाद. इसने झारखंड राज्य के लिए बड़ी चुनौती पेश की है.

Manjusha Bhardwaj

Ranchi :सीएम रघुवर दास ने घाटशिला के मऊभंडार में आयोजित रंकिणी महोत्सव में रविवार को 93 करोड़ 31 लाख की 43 योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन और शिलान्यास किया. उस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड में 2018 के अंत तक राज्य से उग्रवाद का सफाया हो जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि उग्रवाद के खत्म होने से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा. झारखंड अलग राज्य बनने के साथ ही उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रेरित हिंसाएं इसे विरासत में मिली थीं. तभी से बहुत कोशिशों के बावजूद भी इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है. झारखंड में समस्याओं की कोई कमी नहीं है. शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी, कुपोषण जैसी समस्याएं तो हैं ही लेकिन इन सबसे बड़ी और गंभीर समस्या है- नक्सलवाद. इसने झारखंड राज्य के लिए बड़ी चुनौती पेश की है. वर्ष 2017 में भी उन्होंने यही बातें कही थी. फिर करीब चार माह तक इस मुद्दे पर चुप रहने के बाद फिर से वही बातें कही जाने लगी है. इससे पहले वर्ष 2016 में भी मुख्यमंत्री और डीजीपी पूरे साल यह कहते रहे थे कि बस इस साल के अंत तक नक्सलवाद खत्म हो गया. 

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उग्रवाद खत्म करने की योजना पर सरकार काम कर रही है : रघुवर दास

सीएम ने महोत्सव के दौरान कहा कि सीआरपीएफ और पुलिस ने अपनी जान की बाजी लगाकर राज्य से उग्रवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभायी है. फिलहाल उग्रवाद को झारखंड से पूरी तरह से खत्म करने की योजना पर सरकार काम कर रही है. रघुवर दास ने लोगों को धन्यवाद करते हुये यह भी कहा कि यहां की जनता उग्रवाद को लेकर काफी जागरूक है इसी वजह से यहां से उग्रवाद खत्म हुआ है. यहां की जनता ने उग्रवाद को रोकने का काम किया है.

सीएम रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय नक्सवाद खात्मे की बढ़ाते जा रहे हैं समय सीमा

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय लगातार यह दावा कर रहे हैं कि झारखंड से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा. एक के बाद एक करके सभी समय सीमा खत्म होते जा रहे हैं लेकिन झारखंड से नक्सवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य में नक्सली गतिविधि अब भी जारी है. यह दावा मुख्यमंत्री और डीजीपी डीके पांडेय दो-तीन सालों से करते आ रहे हैं. पहले कहा कि 2016 के अंत तक नक्सवाद को खत्म कर दिया जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. इसमें नाकाम रहने के बाद उन्होंने फिर कहा कि 31 दिसंबर 2017 में उग्रवाद मुक्त होगा झारखंड. यह समय सीमा भी समाप्त हो गयी लेकिन फिर भी झारखंड उग्रवाद मुक्त नहीं हुआ. 2017 के बाद जनवरी 2018 में डीजीपी डीके पांडेय ने फिर से नक्सवाद खात्मे की समय सीमा बढ़ा दी और इसे 2018 कर दिया है. साल पर साल बीतते जा रहे हैं. समय सीमा हर बार बढ़ायी जा रही है. फिर भी राज्य से उग्रवाद खत्म नहीं हो पा रहा है.

2016 में डीजीपी ने किया था दावा

झारखंड बनने के बाद 15 सालों में कई मुख्यमंत्रियों ने ऐसे बयान दिए थे कि राज्य को जल्द नक्सलमुक्त कर दिया जायेगा. लेकिन 2016 में पहली बार किसी सरकार के डीजीपी ने टाइम लाइन देकर यह दावा किया था कि झारखंड से नक्सलवाद को खत्म किया जायेगा. डीजीपी ने खुद सीएम और विधायकों के साथ एक वर्कशॉप में यह एलान किया. इसलिए इस एलान को काफी महत्वपूर्ण भी माना गया था. एक तरह से इसे सरकार का बयान ही माना गया था. डीजीपी ने कहा था कि नक्सल उन्मूलन अभियान में साल 2015 टर्निंग प्वाइंट रहा है और अब 2016 खात्मे का साल होगा. प्रोजेक्ट भवन में दिन भर चली वर्कशॉप में उन्होंने आंकड़े देकर इसे समझाया था. लेकिन 2016 के बाद यह समय सीमा 2017 हो गयी. और फिर 2017 से लेकर यह समय सीमा 2018 हो गया है. दावे के बाद दावे किये जा रहे से लेकिन फिर भी तब से लेकर आज तक झारखंड नक्सल मुक्त नहीं हो पाया है. 

डीजीपी डीके पांडेय

नक्सलवाद खात्मे का संकल्प दोहराते हुए जवानों का हौसला भी बढ़ाया था

19 फरवरी,2017 को डीजीपी डीके पांडेय ने फिर से यह दावा किया था कि साल 2017 में उग्रवाद पूरी तरह से खत्म कर दिया जायेगा. यह बातें उन्होंने झारखंड जगुवार के 9वें स्थापना दिवस समारोह के वक्त कही थी. खात्मे के संकल्प दोहराते हुए उन्होंने जवानों का हौसला भी बढ़ाया था. उन्होंने कहा था कि 2017 में सभी के सहयोग से राज्य को नक्सल मुक्त कराने में सफलता मिलेगी

एक जून 2017 को क्या वादा किया था

बोकारो के गोमिया में एक गोमिया जून 2017 को डीजीपी डीके पांडेय ने कहा था कि पुलिस-प्रशासन नेटवर्क को मजबूत कर नक्सलियों के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जायेगा. जब तक नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया नहीं हो जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा. उन्होंने कहा था कि नक्सली अजय महतो को खोज कर गोली मारेंगे. उसके साथ जो भी नक्सली है, एक-एक को चुन-चुन कर जल्द सफाया करेंगे.

60 दिन बीत गये और 2017 भी खत्म हो गया, लेकिन झारखंड से नक्सवाद का सफाया नहीं हुआ

2017 में डीजीपी डीके पांडेय ने लोहरदगा में अपराध नियंत्रण के लिये 12 सॉफ्टवेयर का शुभारंभ करते हुए नक्सलाद के खिलाफ एक बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि 60 दिनों के अंदर सूबे से नक्सलवाद को खत्म करेंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में गोली की कमी नहीं होगी. डीके पांडेय ने कहा कि झारखंड में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए हमने दिसंबर 2017 मुकर्रर किया है और इस दिशा में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं.

साल 2017 के अंत तक डीजीपी ने नक्लवाद को खत्म करने का किया था दावा

गौरतलब है कि नक्सली उग्रवाद की समस्या को देखते हुये झारखंड के डीजीपी डीके पाण्डेय ने साल 2017 में यह दावा किया था कि 31 दिसंबर 2017 तक राज्य से नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी समस्याओं को खत्म कर दिया जायेगा. हालांकि उनके इस दावे के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि राज्य में नक्सलियों की गतिविधियों पर रोक लगेगी. लेकिन फिर भी साल 2017 में कई बार यह देखने को मिला कि यहां के कई जिलों के लोग अब भी नक्सलवाद की वजह से खौफ में जी रहे हैं. यहां के कई जिलों में उग्रवादियों ने जमकर तांडव मचाया. उन्होंने पोस्टरबाजी की, आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया, लोगों की जानें ली. फिर भी डीजीपी यही कहते नजर आये कि 31 दिसंबर तक सब खत्म हो जायेगा. अगर दिसंबर महीने के अंत तक नक्सलवाद खत्म होने वाला था तो फिर उस महीने में लगातार नक्सली घटनायें देखने को कैसे मिली. जबकि वादे के अनुसार तो अंतिम महीने तक कम से कम ऐसी घटनायें होनी चाहिये थी. क्योंकि इसे रोकने के लिये कई अभियान चलाये जा रहे होंगे. फिर भी ये घटनायें घटी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नक्सलियों के खिलाफ अभियान सिर्फ वादों, दावों और कागजों तक ही सीमित थे. दिसंबर महीने में घटी कई ऐसी नक्सली घटनायें हैं जो नक्सलवाद के खात्मे पर सवाल खड़ी  करते हैं. साथ ही डीजीपी के उस बयान पर भी सवाल खड़ा करती है जिसमें उन्होंने कहा है कि कुछ इलाकों से नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया कर दिया गया है, और सुरक्षा बलों व पुलिस के शिविर लगाने की वजह से नक्सली मजबूर होकर उन इलाकों से भाग खड़े हुये हैं. क्योंकि अगर उनके दावों के अनुसार अगर नक्सली भाग खड़े हुये तो फिर घटनायें कैसे घटीं.

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SMILE
Anti Naxal Operation
एंटी नक्सल ऑपरेशन

साल 2017 में हुई कुछ घटनायें

•    23 दिसंबर 2017 को लोहरदगा में भाकपा माओवादी संगठन ने शुक्रवार की आधी रात को सेन्हा थाना क्षेत्र के कोराम्बे पुल के समीप खड़े 9 हाइवा ट्रक में आग लगा दी.
•    19 दिसंबर 2017 को गिरिडीह में माओवादियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी. जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित बजटो पंचायत के मिर्जाडीह गांव में देर रात मोबाइल टावर में लगी मशीन को माओवादियों द्वारा उड़ाये जाने का मामला सामने आया था.
•    20 दिसंबर 2017 को चतरा जिले में उग्रवादियों ने सदर थाना क्षेत्र से सटे धमनिया व ऊंटा मोड में संचालित विभिन्न क्रशरों में पर्चा फेंककर दहशत फैला दी थी. टीएसपीसी के अमित जी के नाम से फेंके गए पर्चे के माध्यम से क्रशर मालिकों के अलावा क्षेत्र में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में लगे ठेकेदारों को धमकी दी गयी थी. पर्चे के माध्यम से उग्रवादियों ने चेताया था कि धमनिया व ऊंटा मोड में मनमानी क्रशर चलाना बंद किया जाये.
•    08 दिसंबर 2017 को गुमला जिला में लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर उग्रवादी संगठन पीएलएफआई ने अपनी मौजूदगी दर्ज करायी थी. उग्रवादियों ने घाघरा थाना क्षेत्र के नौनी गांव में एक पत्थर क्रशर प्लांट में खड़ी दो पोकलेन मशीन व एक लोडर मशीन को आग के हवाले कर दिया था. दोनों मशीनों को मिलाकर लगभग तीन करोड़ रुपये की सम्पति की क्षति हुई थी. उग्रवादी आगजनी की घटना को अंजाम देकर फरार हो गये साथ ही एक हस्तलिखित पर्चा भी छोड़ा था. पर्चे में लिखा गया था कि जब तक क्रशर मालिक संगठन से बात नहीं कर लेता है तब तक क्रसर में काम नहीं होगा. साथ ही यह भी लिखा था कि कोई भी वाहन मालिक क्रशर प्लांट में काम के लिए अपने वाहन ना दें.
•    06 दिसंबर 2017 को गिरिडीह जिले के अलग-अलग प्रखण्डों में पोस्टर बैनर के माध्यम से लोगों से कई तरह की अपील की जा रही थी. डुमरी, मधुबन, पीरटांड़ आदि इलाकों के बाद मंगलवार को जिले के बगोदर में भाकपा माओवादी के नाम से बैनर, पोस्टर चिपके मिले थे. ये पोस्टर व बैनर थाना क्षेत्र के खेतको में चिपकाये गये थे. पोस्टर में पीएलजीए की 17 वीं वर्षगांठ को दो से आठ दिसंबर तक सफल बनाने, केन्द्रीय कर्तव्य को पूरा करने के लिए लक्ष्य से पीएलजीए में कमीशनों और कमानों को विकसित करने, पुलिसिया-कार्पोरेट नीति को ध्वस्त करने का आह्वान, ऑपरेशन ग्रीनहंट का विरोध किया था. वहीं बैनर में लिखा था कि नक्सलबाड़ी की आग देश के कोने-कोने में जल रही है.
•    10 नवंबर 2017 को लातेहार में सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन के जवान लाटू ग्राम के पास से गुजर रहे थे. रास्ते में घात लगा कर बैठे नक्सलियों ने जवानों पर अंधाधुन्ध फायरिंग शुरु कर दी थी. जवाबी कार्रवाई करते हुए सीआरपीएफ के जवानों ने भी मोरचा लेकर नक्सलियों पर फायरिंग की. करीब दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद नक्सली जंगल का लाभ उठा कर भाग निकले थे. जिसके बाद यहां कुछ दिनों तर लगातार ऐसी घटनायें घटती रही.
•    16 नवंबर 2017 को लातेहार व छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ के निकट पिपराढ़ाब में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की घटना हुई थी. यह इलाका छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में पड़ता है. मुठभेड़ में पुलिस के सात जवान घायल हो गये थे. घायलों में पांच सीआरपीएफ के जवान थे, जबकि एक झारखंड जगुआर के और एक जिला पुलिस का जवान. घायलों में दो की स्थिति गंभीर थी. वहीं पुलिस द्वारा चलाये गये अभियान के बाद भी यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि लातेहार जिला का बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त है. क्योंकि लातेहार जिले में आये दिन नक्सली घटनायें होती रहती हैं.

इन इलाकों से नक्सलवाद खत्म करने का किया दावा

 

डीजीपी डीके पाण्डेय ने 31 दिसंबर 2017 के बाद कहा था कि पिछले तीन सालों में राज्य की पुलिस पूरे प्रदेश में सुरक्षा का माहौल देने में सफल रही है. साथ ही पुलिस ने राज्य के 13

 

Naxalite
झारखंड में नहीं खत्म हुआ नक्सलवाद

नक्सल व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर साल 2017 के अंत तक वहां से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया कर दिया है. उन्होंने बताया कि झारखंड में सारण्डा, सरयू, पारसनाथ, चतरा, बानाताल, गिरिडीह-कोडरमा सीमावर्ती क्षेत्र, दुमका-गोड्डा सीमावर्ती क्षेत्र, खूंटी-चाईबासा सीमावर्ती क्षेत्र, खूंटी-सिमडेगा सीमावर्ती क्षेत्र, गढ़वा-लातेहार सीमावर्ती क्षेत्र, झुमरा पहाड़ी, जमशेदपुर, गुडाबंधा, डुमरिया एवं मुसाबनी और पलामू-चतरा सीमावर्ती क्षेत्र में कार्य योजना बनाकर पुलिस और सुरक्षा बलों ने एरिया डॉमिनेशन किया और वहां सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित किये गये. इसका यह फायदा हुआ कि इन इलाकों से नक्सली भागने के लिए मजबूर हो गये.

क्या साल 2018 के अंत तक नक्सलवाद-उग्रवाद मुक्त होगा झारखंड

झारखंड के डीजीपी डीके पाण्डेय ने 10 जनवरी को यह दावा किया कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. राज्य के डीजीपी पाण्डेय ने यह भी दावा किया कि कुछ सीमावर्ती इलाकों को छोड़कर राज्य से पूरी तरह नक्सलवाद का सफाया कर दिया गया है. वहीं डीजीपी के इस दावे के साथ झारखंड से उग्रवाद के खात्मे की डेडलाईन एक साल और बढ़ गयी है. वर्ष 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने अब दावा किया है कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सलवाद और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. अगर इस समस्या का सफाया करने के लिये एक और साल की जरूरत थी तो फिर पहले डीजीपी ने 2017 में ही इसे खत्म करने का दावा कैसे कर दिया था. क्या ये दावा महज एक दिखावा था, या फिर यूं कहें कि उनके पास यह अंदाजा ही नहीं था कि इसे खत्म करने के लिये कितने वक्त की जरूरत है. क्योंकि अगर बात एक या दो महीने आगे बढ़ाने की होती तो समझा जा सकता था. लेकिन पूर्व में किये गये दावे को यहां बात एक दो महीने बढ़ाने की नहीं बल्कि एक साल और बढ़ाने की बात की है. तो क्या और एक साल झारखंड के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ेगा, क्या एक और साल उन्हें खौफ में जीना पड़ेंगा.

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क्या डीके पांडेय और रघुवर दास के दावे होंगे सफल

गौरतलब है कि झारखंड से उग्रवाद को खत्म करने की कोशिश काफी पहले से की जा रही है. इसे लेकर आये दिन प्रशासन के पदाधिकारियों और सरकार के तरफ से कई दावे किये जाते है. लेकिन अब तक एक भी दावा सफल होता नजर नहीं आया है. झारखंड के डीजीपी डीके पाण्डेय ने 10 जनवरी को यह दावा किया कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. राज्य के डीजीपी पाण्डेय ने यह भी दावा किया कि कुछ सीमावर्ती इलाकों को छोड़कर राज्य से पूरी तरह नक्सलवाद का सफाया कर दिया गया है. वहीं डीजीपी के इस दावे के साथ झारखंड से उग्रवाद के खात्मे की डेडलाईन एक साल और बढ़ गयी है. वर्ष 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने अब दावा किया है कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सलवाद और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. अगर इस समस्या का सफाया करने के लिये एक और साल की जरूरत थी तो फिर पहले डीजीपी ने 2017 में ही इसे खत्म करने का दावा कैसे कर दिया था. क्या ये दावा महज एक दिखावा था, या फिर यूं कहें कि उनके पास यह अंदाजा ही नहीं था कि इसे खत्म करने के लिये कितने वक्त की जरूरत है. क्योंकि अगर बात एक या दो महीने आगे बढ़ाने की होती तो समझा जा सकता था. लेकिन पूर्व में किये गये दावे को यहां बात एक दो महीने बढ़ाने की नहीं बल्कि एक साल और बढ़ाने की बात की है. तो क्या और एक साल झारखंड के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ेगा, क्या एक और साल उन्हें खौफ में जीना पड़ेंगा. वहीं अब इसे लेकर रघुवर दास ने भी दावा किया है कि 2018 तक झारखंड से उग्रवाद को खत्म कर दिया जायेगा. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या झारखंड सच में 2018 तक उग्रवाद मुक्त होगा या फिर डीजीपी डीके पांडेय की तरह इनका दावा भी फेल होगा. और फिर बढ़ेगी इसकी समय सीमा.

कैंसर की तरह पूरे राज्य में फैलता नक्सलवाद

हालांकि झारखंड बनने के बाद से ही सरकार हमेशा इस प्रयास में रही है कि राज्य से उग्रवादी गतिविधियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाये. लेकिन

Jharkhand Police
झारखंड पुलिस

झारखंड निर्माण के 17 सालों के बाद यहां हजार से भी ज्यादा नक्सली घटनायें घट चुकी हैं. जिससे यह साबित होता है कि झारखंड से इसे खत्म करना कितना मुश्किल है. झारखंड जब अलग राज्य बना था तो यहां के सात जिले ही इससे प्रभावित थे लेकिन धीर-धीरे यह कैंसर की तरह पूरे राज्य में फैलता गया. और आज इसपर लगाम लगाना मुश्किल हो गया है. नक्सलियों-उग्रवादियों  की गतिविधियां वास्तव में घट रही हैं बढ़ रही हैं, यह भी तय करने में कई पेंच हैं. लेकिन यह तो स्पष्ट है कि देश-दुनिया में झारखंड की छवी एक नक्सली हिंसा से पीड़ित राज्य के रूप में बन गयी है. उद्योगपति यहां निवेश करने से डरते हैं. पर्यटक यहां आने से डरते हैं. यहां के लोग नक्सली-पुलिस हिंसा के बीच पिस रहे हैं. आये दिन नक्सली-उग्रवादी संगठन बंदी का आह्वान करते हैं. लोग घरों से निकलने में डरते हैं. ऐसे में जरूरत है कि इसके खिलाफ योजनाबद्ध कार्रवाई की जाये ना कि सिर्फ दावे किये जायें.

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