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चारा घोटाला: चार जनवरी को लालू को सजा का ऐलान, रघुवंश, तेजस्वी व मनोज झा को सीबीआई कोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस

Ranchi : चारा घोटाले में देवघर कोषागार (आरसी 64ए/96) से 89 लाख रुपये के  फर्जीवाड़ा मामले में 21 साल बाद विशेष सीबीआई कोर्ट, रांची के जज शिवपाल सिंह आज बुधवार को फैसला सुनाने वाले थे. लेकिन अब इस मामले में कल चार जनवरी को लालू यादव को सजा सुनायी जाएगी. सजा की सुनवाई को आज इसलिए टाला गया क्योंकि वकील बिंदेश्वरी प्रसाद के निधन के बाद कोर्ट में डेढ़ बजे शोक सभा रखी गयी है. इसी को लेकर वकिलों ने यह मांग की थी कि आज फैसला न सुनाया जाये, इसे कल यानी गुरुवार को सुनाया जाये. सीबीआई कोर्ट ने तेजस्वी यादव, रघुवंश प्रसाद और मनोज झा को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया है. साथ ही तीनों को 23 जनवरी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है.

ज्ञात हो कि लालू समेत सभी दोषी आज बुधवार की सुबह 10.30 बजे अदालत में हाजिर हुये. उनके हाजिर होने के बाद सजा की बिंदुओं पर सुनवाई की जानी थी लेकिन कोर्ट ने इसे चार जनवरी तक टाल दिया है. गौरतलब है कि इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व सांसद आरके राणा, जगदीश शर्मा और आईएएस अधिकारियों सहित 16 लोगों को दोषी पाया गया था. दोषी ठहराये गए सभी 16 लोगों को हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया था. 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख  27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में ये फैसला कोर्ट ने सुनाया था.

 पहले भी मिल चुकी है सजा

उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में इससे पहले भी बिहार के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा को सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी. तीन अक्तूबर 2013 को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने कांड संख्या आरसी 20 ए/96 चाईबासा कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में लालू को पांच साल की सुनाई थी. साथ ही अदालत ने 25 लाख का जुर्माना भी लगाया था. वहीं मामले में जगन्नाथ मिश्रा को चार साल की सजा और 21 लाख का जुर्माना लगाया था. फैसले के बाद लालू यादव को सांसद सदस्य की सदस्यता गवानी पड़ी थी. साथ ही वो बिहार विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़ पाए थे. इस मामले में 44 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था.

इसे भी पढ़ें: चारा घोटाला में लालू प्रसाद दोषी करार, सजा पर फैसला 3 जनवरी को, जगन्नाथ मिश्रा बरी

प्वाइंट्स में जाने क्या है मामला
–    वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की निकासी पशु चारे के नाम पर हुई थी.
–    निकासी के मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे.
–    मामले में सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा संख्या आरसी/64 ए/1996 दर्ज किया था.
–    सीबीआई ने लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा एवं ध्रुव भगत, आर के राणा, तीन आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद, कोषागार के अधिकारी एस के भट्टाचार्य, पशु चिकित्सक डा. के के प्रसाद तथा शेष अन्य चारा आपूर्तिकर्ता आरोपी बनाया था.
–    सभी 38 आरोपियों में से 11 की मौत हो चुकी है.
–    तीन सीबीआई के गवाह बन गये.
–    दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था. जिसके बाद उन्हें 2006-7 में ही सजा सुना दी गयी थी.
–    बचे 22 आरोपी पर चल रहा था मुकदमा.
–    सीबीआई के विशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने फैसला 13 दिसंबर को सुरक्षित रख लिया था.
–    आरोपियों पर सीबीआई ने आपराधिक षड्यन्त्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13:1:डीः एवं 13:2 के तहत मुकदमा दर्ज किया था.
–    गबन की धारा 409 में दस वर्ष तक की और धारा 467 के तहत तो आजीवन कारावास का प्रावधान है.

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