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चतरा: चोरी हुई चार स्कूलों में, कार्रवाई सिर्फ एक प्रिंसिपल पर, जहां बन रहा है दो करोड़ का भवन

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पिछले हफ्ते डीईओ ने प्रधानाध्यापक से मांगी थी एक लाख रुपये की रिश्वत.

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प्रधानाध्यापक ने डीईओ से कहा था ना खाएंगे, न खाने देंगे, मिली सजा.

Chatra : लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ना खाउंगा, ना खाने दूंगा. इस नीति पर चलना चतरा के एक शिक्षक देवकुमार मिश्र को महंगा पड़ा. दो करोड़ की लागत से उनके स्कूल का निर्माण चल रहा है. एक सप्ताह पहले चतरा के डीईओ ने उनसे एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी. तब प्रधानाध्यापक ने कहा था कि वह ना तो खाते हैं, न ही किसी को खाने देते हैं. इसके बाद से वह डीईओ के निशाने पर आ गए. इसी बीच अपराधकर्मियों  ने चतरा के चार स्कूलों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की चोरी कर ली. जिसके बाद डीईओ ने श्री मिश्र को निलंबित कर दिया. उल्लेखनीय है कि इन दिनों स्कूलों में बोर्ड की परीक्षा चल रही है. नकल को रोकने के लिए प्रशासन ने स्कूलों में सीसीटीवी लगाये हैं. इससे चोरी से पास होने वाले छात्रों को परेशानी हो रही है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से भी सीसीटीवी चोरी की खबरें मिली है. 

यहां उल्लेखनीय है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी शिव नारायण शाह पिछले कई महीनों से चर्चा में है. ऐसा नहीं है कि उनकी चर्चा उनके बेहतर कार्यशैली को लेकर हो रही है, बल्कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ीकरण की जिम्मेवारी के बोझ तले दबे डीईओ शिक्षण संस्थानों को विवादित करने के मामले में सुर्खियां बटोर रहे हैं. मंगलवार को बालक उच्च विद्यालय में लगये गये सीसीटीवी की चोरी के बाद वो एक बार फिर वो चर्चा में है. पूरे मामले को लेकर न्यूज विंग ने जब चतरा के डीईओ से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया, तब उन्होंने यह कह कर फोन काट दिया कि अभी वह बैठक में हैं. 

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तीन और परीक्षा केंद्रों पर हुयी थी चोरी

गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा मैट्रिक व इंटर की वार्षिक परीक्षा शांति व कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न कराने को लेकर विद्यालय में परीक्षा केंद्र बनाया गया है. परीक्षा में किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न ना हो इसे लेकर विद्यालय के सभी कमरों में सीसीटीवी लगाए गये हैं. मंगलवार की रात अज्ञात चोरों ने विद्यालय में परीक्षा संचालन को लेकर लगाये गये सीसीटीवी की चोरी कर ली. बस जिला शिक्षा पदाधिकारी महोदय को मिल गया विद्यालय में विवाद उत्पन्न करने का मौका. उन्होंने विद्यालय में हुए चोरी का जिम्मेदार प्रभारी प्रधानाध्यापक देव कुमार मिश्रा को मानते हुये निलंबित करने का फरमान जारी कर दिया. मजे की बात तो यह है कि मंगलवार की रात चोरों ने एक साथ बालक उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र के अलावे हंटरगंज प्रखंड के तीन परीक्षा केंद्रों में एक साथ चोरी की घटना को अंजाम देकर सीसीटीवी पर हाथ साफ कर लिया था. चोरों ने हंटरगंज के तीन परीक्षा केंद्रों से छह सीसीटीवी की चोरी कर ली थी. लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी महोदय को सिर्फ बालक उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक और कसूरवार दिखे. उन्होंने इस पूरे मामले में सिर्फ और सिर्फ बालक उच्च विद्यालय के प्रभारी  प्रधानाध्यापक को निलंबित किया. डीईओ की इस कार्रवाई ने भी उन्हें विवादों में ला खड़ा कर दिया है. अब सवाल उठने लगा है कि आखिर किन परिस्थितियों में जब चार विद्यालयों में सीसीटीवी की चोरी हुयी तो फिर एक ही विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई क्यों हुयी. बड़ा सवाल यह है कि जब सीसीटीवी चोरी मामले में बालक उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कसूरवार हो सकते हैं तो हंटरगंज प्रखंड के अन्य तीनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक क्यों नहीं.

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भवन जीर्णोद्धार कार्य में लग रहे पैसो पर थी डीइओ की नजर

सूत्रों की माने तो जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सेटिंग कर उनलोगों पर कार्रवाई नहीं की. जानकारी के अनुसार डीईओ की गिद्ध नजर बालक उच्च विद्यालय में लाखों रुपए खर्च कर कराये जा रहे भवन जीर्णोद्धार कार्य पर है. उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक से काम के बदले पीसी के तौर पर मोटी रकम की मांग की थी. जब प्रधानाध्यापक ने पीसी देने में असमर्थता जताते हुये संवेदक द्वारा कार्य कराये जाने की बात कहीं गयी तो डीईओ ने उन्हें अपने टारगेट में ले लिया. और यही कारण है कि पहले से घात लगाए डीईओ को विद्यालय में चोरी के बाद प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई का मौका मिल गया. 

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साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

बीना किसी जांच रिपोर्ट  के हुई कार्रवाई

साहब ने बीना कोई जांच पड़ताल के वरीय अधिकारियों को झांसे में रखकर कार्रवाई कर दी. इतना ही नहीं डीईओ ने प्रधानाध्यापक को दोपहर तीन बजे शोकॉज करते हुये एक घंटे के भीतर जवाब तलब करने का भी फरमान जारी कर दिया. जिसका जवाब प्रधानाध्यापक ने विभाग को दे दिया. आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रधानाध्यापक द्वारा डीईओ कार्यालय को उपलब्ध कराए गए शोकॉज का जवाब भी पढ़ना जिला शिक्षा पदाधिकारी को नागवार गुजरा. उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर प्रधानाध्यापक को अपने कार्यालय में बुलाकर खरी खोटी सुनाने के बाद परीक्षा अवधि तक निलंबित करने का निर्णय सुना दिया. जिला शिक्षा पदाधिकारी के ऐसे गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली से जिले भर के सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों के कर्मी परेशान है. सभी दबी जुबान में उपायुक्त व अन्य आलाधिकारियों से बेलगाम डीईओ पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं.

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पूर्व से ही दागदार रहा है डीइओ साहब का दामन

गौरतलब है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी शिवनारायण शाह का दामन पूर्व से ही दागदार रहा है. भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें कई महीनों तक जेल की हवा खानी पड़ी है. शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने ऐसे दागी शिक्षा पदाधिकारी पर नकेल कसने की मांग की है. शिक्षकों व कर्मियों के अनुसार जिला शिक्षा पदाधिकारी को कर्मियों के साथ बात करने तक की तमीज नहीं है.

हले भी विवादों में रह चुके है डीईओ

अगर बात डीईओ के विवादों की करें तो सबसे पहले सदर प्रखंड के ऊंटा मोड में संचालित सत्यानंद भोक्ता इंटर कॉलेज, उसके बाद शहर के दीभा मोहल्ला में संचालित जिले का  इकलौता महादेवी वर्मा महिला इंटर महाविद्यालय व पकरिया में संचालित उपेंद्र नाथ वर्मा इंटर महाविद्यालय में विवादों को जन्म देकर ना सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को चौपट किया, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है.और इस बार  डीईओ का  निशाना जिले के सबसे पुराने विद्यालयों में शुमार राज्य संपोषित प्लस टू बालक उच्च विद्यालय बना है.

बेदाग रहा है प्रभारी प्रधानाध्यापक का दामन

देव कुमार मिश्रा की नियुक्ति चतरा में 6 फरवरी 2017 को हुयी. इसके पूर्व वो प्रतापपुर उच्च विद्यालय में कार्यरत थे, जहां उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ काम किया. 33 साल की नौकरी में उनके ऊपर किसी भी तरह का आरोप नहीं लगा. उनके चतरा आने के पूर्व राज्य संपोषित प्लस टू बालक उच्च विद्यालय चतरा की स्थिति काफी दयनीय थी. स्कूल में नाम होने के बावजूद कोई भी छात्र कक्षा में उपस्थित नहीं रहता था, लेकिन जब से देव कुमार मिश्र को वहां का प्रभारी प्रधानाध्यापक  बनाया गया, तब से वहां की स्थिति में काफी सुधार हुआ. जिन छात्रों ने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी थी वो भी छात्र आज कक्षा में नजर आने लगे हैं. ईमानदारी की मिसाल बने देव कुमार मिश्र पर इसतरह की कार्रवाई करने के कारण ना सिर्फ चतरावासी आक्रोश में है बल्कि चतरा मुख्यालय के सभी स्कूल के शिक्षकों में भी नाराजगी है. लोगों का कहने है कि अगर निलंबिन आपस नहीं लिया गया तो चतरा में चक्का जाम कर दिया जायेगा. क्या ईमानदार होने की सजा मिल रही है देव कुमार मिश्र को.

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