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ग्रेच्यूटी से संबंधित उपदान संदाय विधेयक लोकसभा में पास, 20 लाख तक ग्रेच्युटी होगी टैक्स फ्री

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NewDelhi : लोकसभा ने गुरूवार को उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2017 को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसमें निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्वायत्तन संगठनों के कर्मचारियों के उपदान यानि कि ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि होगी, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं. इसे लेकर राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने ट्वीट करके खुशी जाहिर की. उन्होंने ट्वीट किया कि, सांतवे वेतन आयोग के लागू होने के बाद यह दूसरी खुशखबरी है कि, अब 20 लाख तक की ग्रेच्युटी हो सकती है टैक्स फ्री.

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20 लाख तक टैक्स फ्री ग्रेच्युटी

लोकसभा में आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग और पीएनबी धोखाधड़ी मामले समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के बीच सदन ने इस विधेयक को ध्वनि मत से मंजूरी प्रदान कर दी. इसके तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर प्रसूति छुट्टी की अवधिको अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है. लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2017 को पारित करने के लिये पेश किया. उल्लेखनीय है कि अभी दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए उपदान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है, जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं. जिन्होंने पांच वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है. इसी के तहत उपदान यानि कि ग्रेच्यूटी संदाय की योजना अधिनियमित की गई थी. अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रूपये रखी गई थी.

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क्या है ग्रेच्युटी ?

सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रूपये से बढ़ाकर 20 लाख रूपये कर दिया गया, इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगायी और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि, उपदान भुगतान अधिनियम,1972 के अधीन शामिल कर्मचारियों के ग्रेच्यूटी की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिये.

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क्या है विधेयक का उद्देश्य?

इस अधिनियम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य है – सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो अथवा शरीर के महत्वमपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो. विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन(ग्रेच्यूटी) विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ-साथ अधिनियम की धारा 2 का संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है. जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर प्रसूति छुट्टी की अवधिको अधिसूचित किया जाये. ऐसा इसलिये किया गया है क्योंकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था. ऐसे में केंद्र सरकार को वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को ऐसी अन्य अवधि के लिये अधिसूचित करने की बात कही गयी है. इसके तहत दस लाख रूपये के स्थान पर एक ऐसी रकम जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित की जाये, शब्द रखने के लिये अधिनियम की धारा 4 का संशोधन करने का प्रस्ताव है.

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