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गोरखालैंड आन्दोलन को कुचलने के लिए झूठे मामले दर्ज किये गये : गुरूंग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

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New Delhi, 28 November :गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता बिमल गुरूंग ने आज उच्चतम न्यायालय में दावा किया कि उनके संगठन के सदस्यों पर दबाव डालने और अलग गोरखालैंड राज्य के आन्दोलन को कुचलने के इरादे से ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किये हैं. हालांकि, राज्य पुलिस का कहना था कि गुरूंग फरार हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. उसका कहना था कि वह ‘राजनीति’ कर रहे हैं.
न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि न्यायालय राजनीतिक मामले में गौर नहीं कर सकता है परंतु वह मामले के कानूनी पहलू पर गौर करेगा. पीठ ने कहा, ‘‘हम राजनीतिक रूप से इसमें गौर नहीं कर सकते. हमें इनके कानूनी बिन्दुओं को देखना होगा. हम उस मामले में कुछ नहीं कह सकते जो उन्होंने (गुरूंग ने ) राजनीतिक रूप से उठाये हैं.’’ राज्य पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने कहा कि गुरूंग पर 23 मामलों में मुकदमा चल रहा है और उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने दावा किया कि गुरूंग के नेतृत्व में अनेक गंभीर घटनायें हुयी हैं और हाल के गोरखालैंड आन्दोलन के दौरान 26युवा पुलिस अधिकारी की हत्या भी कर दी गयी थी.

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स्वतंत्र एजेन्सी से जांच की मांग
सिंघवी ने कहा, ‘‘ वह अपने बचाव में कह रहे हैं कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किये गये. उनके खिलाफ बहुत अधिक मामले हैं. 53 प्राथमिकी तो फर्जी नहीं हो सकतीं.’’ गुरूंग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने इन दलीलों का प्रतिवाद करते हुये कहा कि उनके और मोर्चा के अन्य सदस्यों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने 104 प्राथमिकी दर्ज की हैं और राज्य सरकार ने उन्हें भगोडा बना दिया है. उन्होंने कहा कि उसे अपनी जान का खतरा है. पटवालिया ने कहा, ‘‘गुरूंग इन मामलों की जांच सीबीआई या एनआईए जैसी किसी स्वतंत्र एजेन्सी को सौंपने की मांग कर रहे हैं.’’ शीर्ष अदालत का 20 नवंबर का आदेश वापस लेने के लिये पुलिस की अर्जी का जिक्र करते हुये उन्होंने दावा किया कि इस अर्जी में गलत बयान दिये गये हैं. इस आदेश में न्यायालय ने गुरूंग के खिलाफ कोई भी दण्डात्मक कदम उठाने से पुलिस को रोक दिया है.

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सुनवाई 30 नवंबर तक के लिये स्थगित
उन्होने कहा, ‘‘गुरूंग को कैबिनेट मंत्री का दर्जा और पुलिस सुरक्षा प्रदान की गयी है. क्या कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कोई व्यक्ति इस तरह की हिंसा कर सकता है और फरार हो सकता है.’’ उन्होंने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा पश्चिम बंगाल के स्कूलों में बांग्ला भाषा को दूसरी अनिवार्य भाषा बनाने की राज्य सरकार की पहल का विरोध कर रहा है. सुनवाई के अंतिम क्षणों में अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस मामले में शीर्ष अदालत के आदेश का केन्द्र पालन करेगा. इसके बाद, न्यायालय ने इस प्रकरण की सुनवाई 30 नवंबर तक के लिये स्थगित कर दी. गुरूंग ने पहले दावा किया था कि राज्य सरकार उनका राजनीतिक रूप से उत्पीडन कर रही है. उन्होंने अलग राज्य के लिये हाल ही में हुये आन्दोलन के दौरान अनेक गोरखालैंड कार्यकर्ताओं के मारे जाने की घटनाओं की एनआईए या सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया है.

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