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गुमशुदगी के सात महीने बाद भी पुलिस ने नहीं दर्ज की FIR, मां की गुहार पर पुलिस उठाती है बेटी के चरित्र पर सवाल

मां कई बार पुंदाग ओपी का चक्कर लगा चुकी है. हर बार बिलकते हुए अपनी गुमशुदा बेटी को खोजने की गुहार लगाती रहती है. अब बेटी की गुमशुदगी को सात महीने बीत चुके हैं, फिर भी पुलिस की कार्रवाई सनहा तक ही सिमटी हुई है. मां की ममता तब हार मान जाती है, जब उसके सामने ही कानून के रक्षक बेटी के चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं. ये पूरी जानकारी एक गुमशुदा लड़की के बेबस परिवार की जुबानी है. मामला पुंदाग के इलाही नगर का है, जहां के रहने वाले सुहैल खान की 18 वर्षीय बेटी नाजिया प्रवीन 09 मई 2017 से घर से गायब है. परिवार वाले बताते हैं कि टीवी देखने को लेकर नाजिया की अपनी बड़ी बहन से नोकझोक हो गयी थी, जिसके बाद उसने मोबाइल और रिमोट गुस्से में आकर पटक दिया और खुद घर से बाहर निकल गयी लेकिन फिर वापस नहीं आयी.

Md. Asghar Khan

Ranchi : मां कई बार पुंदाग ओपी का चक्कर लगा चुकी है. हर बार बिलखते हुए अपनी गुमशुदा बेटी को खोजने की गुहार लगाती रही. अब बेटी की गुमशुदगी को सात महीने बीत चुके हैं, फिर भी पुलिस की कार्रवाई सनहा तक ही सिमटी हुई है. मां की ममता तब हार मान जाती है, जब उसके सामने ही कानून के रक्षक बेटी के चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं. ये कहानी उस गुमशुदा लड़की के बेबस परिवार की है.

लड़की का पता लगने के बाद भी पुलिस सुस्त

मामला पुंदाग के इलाही नगर का है, जहां के रहने वाले सुहैल खान की 18 वर्षीय बेटी नाजिया प्रवीन 09 मई 2017 से घर से गायब है. परिवार वाले बताते हैं कि टीवी देखने को लेकर नाजिया की अपनी बड़ी बहन से नोकझोक हो गयी थी, जिसके बाद उसने मोबाइल और रिमोट गुस्से में आकर पटक दिया और खुद घर से बाहर निकल गयी लेकिन फिर वापस नहीं आयी. उसके वापस नहीं आने पर हमलोगों ने अपने स्तर से 09, 10 और 11 मई तक मुहल्ले, पड़ोस और रिश्तेदारों के यहां खोजबीन की. जिसके बाद 12 मई को एक अपरिचित नंबर से कॉल आया. हमने पूछा कि ‘आपकों ये नंबर किसने दिया’ तो फोन करने वाले ने जवाब दिया कि “तुम्हारी लड़की ने” इतना कहकर कॉल काट दिया. फोन काटे जाने के बाद हमने वापस उस नंबर पर कॉल लगाया तो नंबर स्वीच ऑफ मिलने लगा. उसी वक्त हमलोग पुंदाग ओपी पहुंचे और अपरिचित नंबर और नाजिया की गुमशुदगी की पूरी जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने भी उस नंबर पर कॉल किया लेकिन उस वक्त भी नंबर बंद ही आया. पुलिस ने डिटेल्स निकाला, जिसमें पता चला कि नंबर आंध्राप्रदेश के विशाखापत्तनम का है, लेकिन मामला फिर भी सनहा के तौर पर ही दर्ज किया गया. हमलोगों ने कई बार कहा कि इस नंबर के व्यक्ति पर मामला दर्ज किया जाए, पर ओपी इंचार्ज ने हमारी एक भी नहीं सुनी.

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पुलिस ने परिवार को ही खोजने भेज दिया

पिता सुहैल ने बताया कि 12 मई 2017 को पहला कॉल आया था, जिसके कॉल डिटेल्स से पता चलता है कि नंबर भीम चारी सिमहदरी नाम के व्यक्ति का है. पता रेलवे न्यू कॉलनी विजाग, विशाखापत्तनम, आंध्रा प्रदेश है. उन्होंने कहा कि नाजिया को ढूंढने के लिए परिवार के लोग उस पते पर गये, लेकिन वहां पहुंचने के बाद ना ही हमें नाजिया का कोई पता चल पाया और न ही उस व्यक्ति का जिसके नंबर से हमें फोन आया था. उन्होंने कहा कि इस दौरान लगातार उस नंबर पर कॉल लगाते रहे, मगर स्वीच ऑफ बताता रहा. नाजिया की मां नईमा खातुन कहती हैं कि गुमशुदगी के 30 दिन बाद अचानक उस नंबर पर कॉल लगया तो रिंग हुआ, और मेरी नाजिया ने ही कॉल रिसीव किया. मैंने पूछा भी बेटी नाजिया, तो उसने कहा “हां मैं नाजिया अम्मी, मैं विशाखापत्तनम में हूं”  इतने में ही किसी लड़के ने मोबाईल ले लिया और स्वीच ऑफ कर लिया. हमने इस बात की सूचना भी फौरन पुलिस को दी, पर  इस बार भी पुलिस ने कोई मदद नहीं की. पुलिस ने फिर कॉल डिटेल्स निकाल कर हमलोगों को ही वहां जाने को कहा. हमने उस नंबर के व्यक्ति के नाम पर एफआईआर दर्ज कर खोजबीन करने  के लिए भी पुलिस से कई बार गुहार लगायी, लेकिन ओपी इंचार्ज पर इसका कोई असर नहीं हुआ.

आंध्र प्रदेश पुलिस ने भी खड़े किये हाथ

पिता सुहैल ने बताया कि हमलोग दोबारा उस पते पर पहुंचे. स्थानीय थाना और कुछ हिंदी भाषी लोगों की मदद से उस नंबर वाले व्यक्ति का पता लगाया. व्यक्ति का पता चलने के बाद हम उसके पास पहुंचे और उसे हमने हमारी बेटी की फोटो दिखायी. उसने फोटो देखते ही नाजिया को पहचान लिया. उसने कहा कि मैंने उसे तीन दिन अपने पास रखा, खाना-पिना खिलाया, लेकिन उसके बाद वह लड़की कहीं चली गई. जिसके बाद हमलोग वहां के स्थानीय पुलिस के पास पहुंचे और पूरा मामला बताया. हमने बताया कि इस नंबर से पहला फोन 12 मई को आता है. इसके 30 दिन के बाद दोबरा इसी नंबर पर नाजिया से उसकी मां की बात हुई. नाजिया ने यह भी बताया भी कि वह विशाखापत्तनम में है. अगर, भीम चारी के मुताबिक मेरी लड़की तीन दिन ही उनके पास रही, तो फिर 30 दिन के बाद उसी नंबर पर नाजिया से कैसे बात हुयी. सुहैल ने कहा कि हमलोगों ने जब स्थानीय पुलिस को ये सब बताया तो उन्होंने यह कहकर अपना हाछ झाड़ लिया कि तबतक कुछ नहीं कर सकते हैं, जबतक रांची पुंदाग थाना का एफआईआर या वहां की पुलिस यहां खुद आकर जांच पड़ताल नहीं करनी है तबतक हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं.

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पुलिस खोजने के बजाय बेटी को ही गलत बताती है : नईमा खातुन

नईमा खातुन ने बताया कि पुलिस के बर्ताव से हमलोग बहुत निराश हुए हैं. पुलिस ने मदद किया होता तो मेरी बेटी अबतक मिल जाती. इतना कुछ पता चल जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं किया. जब एफआईआर दर्ज करने को कहते हैं तो जवाब में कहा जाता कि ठीक है, एसपी-डीएसपी से इजाजत ले लेते हैं, फिर एफआईआर दर्ज कर लेंगे. नईमा खातुन ने कहा कि पुलिस हमारी बेटी के कैरेक्टर पर सवाल खड़ा करती है. टीओपी इंचार्ज कहते हैं कि आपकी बेटी विशाखापत्तनम ही क्यों भागी, पटना दिल्ली क्यों नहीं भागी. वहीं इलाही नगर मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मो अफजल खान का कहना है कि पुलिस की तरफ से लड़की को खोजनी की कोशिश नहीं की गयी. अगर पुलिस मुस्तैदी दिखाती तो लड़की को खोजा जा सकता था.

लड़की नाबालिग होती या कोई भगाकर ले जाता तब ही एफआईआर दर्ज होताः ओपी इंचार्ज

इधर, पुंदाग ओपी के इंचार्ज मो फारुक का कहना है कि लड़की को खोजा जा रहा है. सीआईजी प्रकाशन के तहत देश भर के जिलों में लड़की की फोटो और उसका पता दे दिया गया है. पुलिस अपने स्तर से लगी हुयी है. अधिकारियों की कमी के कारण हमलोग आंध्र प्रदेश नहीं जा सके. नंबर का कॉल डिडेल्स निकाल कर लड़की के पिता के साथ पुलिस जल्द वहां खोजबीन करने जायेगी. रही बात अबतक एफआईआर नहीं दर्ज करने की, तो उसमें ना ही लड़की नाबालिग है और ना कोई उसे भगाकर ले गया है. वह खुद ही भागी इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं हो सकता है.

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2 Comments

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