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गुजरात : छिटपुट प्रदर्शन व आंशिक बंदी, पीड़ित दलित परिवारों से मिलीं CM

अहमदाबाद: गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल बुधवार को उन चार दलित युवकों के उना स्थित गांव पहुंची, जिनके साथ बीते दिनों गोकशी के आरोप में बुरी तरह मारपीट की गई थी। गिर-सोमनाथ जिले के उना के रहने वाले दलित युवकों की 11 जुलाई को हुई पिटाई के खिलाफ गुरुवार को राज्य के कई हिस्सों में छिटपुट प्रदर्शन हुए और कुछ जगहों पर आंशिक बंदी भी रही।

कई दलित संगठनों ने ‘गुजरात बंद’ का आह्वान किया था, हालांकि इस दौरान कहीं से किसी तरह की अप्रिय घटना या दलितों द्वारा आत्महत्या की कोशिशों की खबर नहीं है।

राज्य परिवहन की कई बसें या तो रद्द कर दी गईं या उनके मार्ग में परिवर्तन कर दिया गया। कई विद्यालय बंद रहे, खासकर सौराष्ट्र में।

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सुबह कुछ घंटों के लिए दुकानें और सरकारी कार्यालय खुले और इस बीच पूरे इलाके में धरना-प्रदर्शन हुए।

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दलित युवकों की पिटाई के विरोध में मंगलवार को सौराष्ट्र में 12 दलित युवकों ने आत्महत्या की कोशिश की और उनमें से एक की मौत हो गई।

प्रदर्शन के दौरान भीड़ द्वारा किए गए पथराव में घायल एक हेड कांस्टेबल की भी मंगलवार को मौत हो गई। उसके सिर में गंभीर चोट आई थी।

मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल बुधवार की सुबह दीव हवाईअड्डे पर उतरीं और वहां से उना तालुका के मोटा समाधियाला गांव के लिए रवाना हुईं, जहां उन्होंने पीड़ित चार दलित युवकों के परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री को देख दलित युवकों के परिजन रो पड़े।

दलित परिवारों के साथ आनंदीबेन ने बातचीत की और दावा किया कि गांव के 25 दलित परिवार मामले में सरकार की तरफ से उठाए गए कदम से संतुष्ट हैं।

मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित दलित परिवारों को घर और शौचालय बनवाने के लिए आर्थिक मदद देगी। उन्हें सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष शिविर लगाया जाएगा।

कक्षा पांच और उससे ऊपर की कक्षाओं में पढ़ रहे दलित परिवारों के बच्चों को सरकारी मॉडल स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन को यह सारे कार्य एक महीने में पूरे करने का आदेश दिया है और दो महीने के बाद वह कार्य की प्रगति देखने के लिए दोबारा आएंगी।

आनंदीबेन ने कहा, “पीड़ित चार दलित युवकों के परिवारों को पुलिस सुरक्षा दिए जाने का आदेश दिया है, क्योंकि उन्होंने धमकी भरे फोन आने की शिकायत भी की है। इस तरह के फोन रिकॉर्ड किए जा रहे हैं और इसके लिए जो भी जिम्मेदार है, उसे गिरफ्तार किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि राज्य सरकार की योजनाएं इन दलित परिवारों तक अब तक क्यों नहीं पहुंचीं तो उन्होंने कहा कि यह स्थानीय विधायकों, प्रधानों और पंचायत स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और गुजरात के अन्य नेताओं के इन दलित परिवारों से मिलने आने के सवाल पर मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने कहा कि उन्हें इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

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