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गिरिडीह: नर्सिंग होम में उड़ाई जा रही थी नियमों की धज्जियां, एसडीओ ने की कार्रवाई, पांच क्लिनिक सील

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Giridih, 10 December : शहर में संचालित क्लिनिकों की एसडीओ विजया जाधव ने रविवार को जांच की. सुबह से ही कार्रवाई करते हुए एसडीओ ने शहरी क्षेत्र के बोड़ो स्थित साहिल हॉस्पिटल, जगजीवन सेवा सदन, स्टार हॉस्पिटल, मोहनपुर स्थित बाबा क्लिनिक व सिरसिया स्थित वर्मा क्लिनिक में छापा मारा. मौके पर यहां कई तरह की गड़बड़ी पायी गयी. सभी पांच नर्सिंग होम को सील कर दिया गया. वहीं एक डॉक्टर समेत छह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

चिट्ठी के जरिये मिली थी एसडीओ को शिकायत

इस कार्रवाई के बाबत एसडीओ जाधव ने बताया कि एक चिट्ठी मिली थी जिसमें एक नर्सिंग होम में कुछ अवैध काम चल रहा है करके शिकायत थी. पत्र में लिखा था कि उक्त क्लिनिक के पास रजिस्ट्रेशन नहीं है. ये मरीजों से काफी पैसे लेते हैं और बहुत सारी असुविधाओं का हमें सामना करना पर रह है. पत्र में आगे लिखा था कि जब तक पैसे नहीं देते, तब तक छोड़ा नहीं जाता है. कई झोला छाप डॉक्टर्स हैं जो जिन्होंने हर गली-नुक्कड़ में अपना दुकान खोल के रखा है. मरीजों का पैसा लेकर ठगने वाला काम हो रहा है.

सिविल सर्जन को साथ लेकर चलाया छापामारी अभियान

इसी चिट्ठी के तहत सिविल सर्जन कमलेश्वर प्रसाद को साथ लेकर एक अभियान चलाया गया. एसडीओ ने बताया कि क्लिनिकल स्टेब्लिसमेन्ट एक्ट के तहत जो रजिस्ट्रेशन लेना होता है, जिसमें नर्सिंग होम कैसे स्टेबलिश करना चाहिए, क्या बेसिक फैसिलिटी इसमें होनी चाहिए, इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई 24 घण्टे होना चाहिए, सपोर्टिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ की क्या क्वालिफिकेशन होनी चाहिए ये सारी नियम है, लेकिन जांच के दौरान किसी क्लिनिक में क्लिनिकल स्टेब्लिसमेन्ट का अनुपालन होता नहीं मिला. एसडीओ की इस कार्रवाई से अवैध रूप संचालित हो रहे नर्सिंग होम संचालकों में हड़कम्प मचा हुआ है.

फ्लैट के बेडरूम में ही बेड लगाकर मरीजों का हो रहा इलाज

एसडीओ ने कहा कि नर्सिंग होम संचालक अपने घर में फ्लैट के बेडरूम में ही बेड लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. मरीजों को जानकारी नहीं है कि उनका क्या ईलाज़ किया जा रहा है. छोटी-छोटी ईलाज़ के लिए मोटी रकम की वसूली की जाने की बात भी सामने आ रही है.

शैलेश वर्मा के क्लिनिक में होता है कांन्ट्रैक्ट बेसिस पर ईलाज

सिहोडीह स्थित शैलेश वर्मा के क्लिनिक बारे में एसडीओ ने कहा कि ये अपने आप को लकवा स्पेशलिस्ट बोलते हैं. ये कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर मरीज लेते हैं. इनकी बोली चढ़ती है कि हम एक लाख में ठीक करेंगे, 3 महीने, 2 महीने में, इस तरह से पेसेंट यहां भर्ती होते हैं. बताया कि लोग ज़मीन जायदाद बेच कर डॉक्टरों के पास रह कर ईलाज़ करवा रहे है. इसके साथ ही यहां एक युवक और युवती मिले हैं. वहीं कुछ आपत्तिजनक सामान भी क्लिनिक से मिला है. इनको पुलिस के हवाले किया जा रहा है. डॉ वर्मा के यहां मौजूद लड़की ने कहा कि वह यहां सीखने के लिए है.

डॉक्टरों के पास नहीं है MBBS की डिग्री

इधर मेडिसिन की जांच में देखा गया तो बहुत लोगों ने एक कमरा फार्मशिष्ट को दिया है. किसी ने भाड़े पर दिया है, तो कोई खुद से चला रहे हैं. बहुत सारे मेडिसिन की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है. एसडीओ जाधव ने कहा कि जनता से अपील करूंगी की ऐसे नर्सिंग होम जहां चल रहे हैं उनकी जानकारी दें. गोपनीय रूप से भी सूचना दें. नाम को गुप्त रखा जाएगा. कहा कि जांच के एक दो डॉक्टर्स हैं वो कोलकाता की डिग्री लेकर यहां प्रैक्टिस रह रहे हैं. इसकी मोरल पॉलिसी ये है कि मरीजों को बोला जाता है रांची से डॉक्टर आएंगे पर डॉक्टर यहीं के होते हैं. जिनके पास एमबीबीएस की डिग्री भी नहीं है.

बाबा क्लिनिक के पास है सिर्फ पारा मेडिसिन की डिग्री

एसडीओ ने कहा कि सिर्फ बाबा क्लिनिक के पास पारामेडिसिन की डिग्री है. पर पारा मेडिसिन की डिग्री होते हुए भी कोई एमबीबीएस या एमडी का इस्तेमाल नहीं कर सकता. ये डिग्रीधारी  डॉक्टर होते ही नहीं है. जाली, चीटिंग का धंधा लोगों ने खोल कर रखा है. उन्होंने कहा कि सभी को सील करके उसमें मौजूद पेसेंट को सदर अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा है. बताया कि सभी पर प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

खुले में फेंका जाता है मेडिकल वेस्ट

एसडीओ ने बड़ी लापरवाही बताते हुए कहा कि नर्सिंग होम में जो सुई दी जाती है उसके जो छोटे छोटे टुकड़े होते है, या खून लगे बैंडेज, रुई आदि को लोग लोग खुले में फेंक रहे हैं. इसके डिपोसल का किसी के पास कोई व्यवस्था नहीं है. जिससे पर्यावरण को तो खतरा है ही, साथ में इंफेक्शन का भी डर है. इन सारे पहलुओं की जांच करेंगे. वहीं काफी जगह में मार्च, अप्रैल, मई में एक्सपायर हो गई दवाएं मिली है. कहा कि इनसब गड़बड़ियों को लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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