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गिरिडीह: उत्कर्ष छात्रावास से गायब बिरहोर जनजाति के पांचो बच्चे मिले, भागकर रिश्तेदार के यहां चले गये थे

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Giridih: जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बेड़ा स्थित उत्कर्ष छात्रावास से बुधवार को गायब हुये पांचो बच्चे मिल गये है. सभी बच्चे भागकर रिश्तेदार के यहां चले गए थे. बच्चों का पता चलते ही पुलिस और स्थानीय समिति के द्वारा सभी बच्चों को रिश्तेदार के यहां से वापस लाने की तैयारी की जा रही है. इस बात की जानकारी बिरहोर विकास समिति के सचिव डॉ रितेश सिन्हा ने दी.

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कौन-कौन हुए थे गायब

उल्लेखनीय है कि उत्कर्ष छात्रावास से आदिम जनजाति बिरहोर के पांच बच्चे गायब हो गये थे. गायब बच्चों में सोमल बिरहोर का 12 वर्षीय पुत्र छोटन बिरहोर, कमरू बिरहोर का 10 वर्षीय पुत्र महेश बिरहोर, डेबला बिरोहर का 10 वर्षीय पुत्र सिकन्दर बिरहोर, तिरजा बिरहोर का 8 वर्षीय पुत्र जितेंद्र बिरहोर व सरदार बिरहोर का 8 वर्षीय पुत्र विकास बिरहोर शामिल थे. गायब सभी बिरहोर बच्चे हजारीबाग जिला के इचाक थाना क्षेत्र स्थित तिरला भुसबाद के हैं. जिन्हें पढ़ाने के लिए उत्कर्ष छात्रावास में रखा गया था. लेकिन अचानक ये पांचों बिरहोर बच्चे गायब हो गये थे और इनकी खोजबीन की जा रही थी. जिसके बाद गुरुवार को बच्चों का पता चला.

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कैसे गायब हुए थे बच्चे

बच्चों के गायब होने को लेकर छात्रावास की वार्डन किरण कुमारी ने बताया कि, कुछ दिन से छात्रावास के बच्चे बीमार थे और सदर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. वार्डन ने बताया कि बुधवार को बीमार बच्चों को अस्पताल से रिलीज करवाने के लिए वह गयी थीं. इसी दौरान छात्रावास से बच्चे भाग गये. साथ ही वार्डन ने कहा कि, अन्य बच्चों ने उन्हें बताया कि पांचों बिरहोर बच्चे पहले से ही बोल रहे थे कि वह सभी यहां से भाग जायेंगे.

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बच्चों के गायब होने पर सचिव की सफाई

वहीं गायब हुए बिरहोर बच्चों के मामले पर छात्रावास के सचिव डॉ रितेश सिन्हा ने फोन पर बताया था कि छात्रावास में बच्चों के बीमार रहने का वजह से सभी अस्पताल और हॉस्टल में परेशान थे और इसी बात का फायदा उठाकर बच्चे भाग गए. साथ ही उन्होंने बताया कि गायब सभी बच्चे अक्टूबर महीने में छात्रावास आये थे और शुरू से ही उन्हें यहां मन नहीं लग रहा था. सचिव ने बताया कि छात्रावास में आने के पहले बच्चे ट्रैक्टर पर काम करने के अलावा, जंगलों में घूमने, मछली पकड़ने व खरगोश पकड़ने का काम किया करते थे. यही वजह थी कि उन्हें हॉस्टल में मन नहीं लगता था. लेकिन इस मामले में  लापरवाही को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने इससे साफतौर पर इनकार किया था और साथ ही सफाई देते हुए कहा था कि छात्रावास में मैन पावर की कमी की वजह से ऐसा हुआ है. उन्होंने कहा था कि चूंकि कुछ बच्चे बीमार थे और उनकी देखभाल में सभी लगे थे जिसकी वजह से यह मामला हुआ.

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विलुप्त हो रहे बिरहोर बच्चों के लिए ही बनाया गया हॉस्टल

बिरहोर बच्चों के गायब होने के मामले में छात्रावास ट्रस्ट के सदस्य सुरेश कुमार शक्ति ने बताया कि उत्कर्ष छात्रावास विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति के बिरहोर बच्चों के उत्थान के लिए बनाया गया है. इस छात्रवास का संचालन बिरहोर विकास समिति ही करती है. इसके संचालन में न तो राज्य सरकार कोई फंड देती है और ना ही केंद्र सरकार. इसका संचालन चैरिटी के जरिये किया जाता है. जबकि ट्रस्ट के संरक्षक जिला के उपायुक्त रहते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य है कि विलुप्त हो रहे बिरहोर के एक पीढ़ी को उच्च शिक्षा दिया जाये ताकि इनकी आने वाली पीढ़ी जागरूक हो.

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