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गिरिडीहः आजादी के 70 साल बाद भी नहीं बनी बरांय में सड़क, दलित समुदाय के लोगों ने चंदा कर शुरू कराया सड़क निर्माण कार्य

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News Wing Giridih, 25 November: भले ही सरकार मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि के नारे बुलंद कर भारत को एक विकसित देश की श्रेणी में लाकर खड़ा करने का प्रयास कर रही हो, राज्य सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन आज भी देश के सुदूरवर्ती इलाक़ों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है. वर्तमान समय मे भी राज्य के कई ऐसे इलाके हैं जिनका विकास शून्य के बराबर हुआ है, और उन स्थानों पर बुनियादी समस्याओं का अंबार है. ऐसा ही एक इलाका है गिरिडीह जिला के बिरनी प्रखंड स्थित केशोडीह पंचायत का बराय गांव. जहां आज़ादी के सात दशक बाद भी विकास का कोई काम नहीं हुआ है. गांव में न तो जाने के लिए कोई रास्ता है और न ही यहां बिजली-पानी जैसी कोई सुविधा है. वर्षों इंतजार के बाद जब यहां के ग्रामीणों के सब्र का बांध टुटा तो ग्रामीणों ने खुद आपसी सहयोग से सड़क निर्माण का काम शुरू करवाया है. लगभग दो सौ घरों की दलित आबादी वाला यह गांव बराकर नदी के तट पर बसा है, जहां जाने के लिए कोई सड़क या रास्ता नहीं है. पगडंडी के सहारे अपना रास्ता तय करनेवाले ग्रामीणों ने अपनी मदद का बीड़ा खुद उठाया और चंदा इकट्ठा कर सड़क निर्माण कार्य शुरू करवाया है.

गांव में एक भी सरकारी योजना संचालित नहीं    

इस बाबत गांव के इंद्रदेव रविदास, लखन दास, बलदेव दास, वचन दास, सुनील दास, मथुरा दास समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक भी सरकारी योजना संचालित नहीं हुई है. कई बार लोग विधायक, सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधियों के पास फरियाद लगा चुके हैं, लेकिन आज तक किसी ने इस क्षेत्र के विकास की पहल नहीं की. बताया कि दलित परिवार के ये लोग काफी गरीब हैं और इनकी अपनी जमीन तक नहीं है, ये लोग सरकार की जमीन पर नदी के तट पर अपना आशियाना बनाकर जैसे-तैसे जिंदगी गुजार रहे हैं.

गांव जाने के लिए कोई सर्वे रास्ता नहीं

स्थानीय मुखिया पति रणधीर मंडल ने कहा कि गांव जाने के लिए कोई सर्वे रास्ता नहीं है और न ही सरकारी जमीन ही है, जिस कारण सड़क निर्माण में बाधा पहुंचती रही है. ग्रामीणों ने अपने स्तर से दो किलोमीटर तक सड़क बनाने का काम शुरू करवाया है.

विधायक ने कहा नेतृत्व के अभाव में पिछड़ा है गांव

इस मामले को लेकर जब विधायक नागेंद्र महतो से बात की गई तो उन्होंने फोन पर कहा कि दलित समुदाय के लोगों के पास नेतृत्व का अभाव है, जिस कारण उस गांव में कोई विकास योजना धरातल पर नहीं उतारी जा सकी है, जबकि उसी पंचायत अंतर्गत कई गांवों में सरकारी योजनाएं संचालित हैं. टाल-मटोल की स्थिति के बाद उन्होंने जल्द ही मामले पर ठोस पहल करने की बात भी कही.

सरकारी स्तर से ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने का किया जा रहा प्रयासः बीडीओ

वहीं इस संबंध में बिरनी प्रखंड के बीडीओ पप्पू रजक ने कहा कि दलित समुदाय की यह आबादी गरीब है और इनके पास खुद का जमीन तक नहीं है. सरकार से जमीन का पट्टा दिलाने के संबंध में पहल किया जा रहा है, साथ ही क्षेत्र के विकास और बुनियादी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने का काम किया जाएगा.

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