Uncategorized

गावों में 67 करोड़ लोगों की दैनिक आय 33 रुपये

|| सौम्या तिवारी ||

नई दिल्ली : देश के 75 प्रतिशत ग्रामीण घरों की मासिक आय 79 डॉलर यानी 5,000 रुपये से भी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों के 51 प्रतिशत घर आजीविका के लिए मेहनत-मजदूरी करते हैं। 28 प्रतिशत के पास कोई मोबाइल फोन या अन्य संचार सुविधा नहीं है।

सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) सर्वेक्षण के जारी आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों के सात करोड़ से अधिक घर या तो परिसंपत्तियों या फिर सामाजिक-आर्थिक लाभों से वंचित हैं। 83 करोड़ भारतीय या 69 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

एसईसीसी की यह रपट ऐसे समय में आई है, जब मूडीज जैसे अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ग्रामीण भारत का धीमा विकास देश की पूरी अर्थव्यवस्था की रफ्तार रोक सकता है।

ग्रामीण भारत के गरीब और उनकी आय के स्रोत :-

ग्रामीण भारत के आधे से अधिक परिवार जीविकोपार्जन के लिए दिहाड़ी पर आश्रित हैं और ग्रामीण आबादी की 75 प्रतिशत यानी 13.35 लाख परिवारों की मासिक आय 5,000 रुपये से भी कम है।

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री हिमांशु ने अर्जुन सेनगुप्ता समिति (2007) के निष्कर्षो का हवाला देते हुए समाचार पत्र ‘मिंट’ में लिखा है, “एक प्राथमिक विश्लेषण से ग्रामीण भारत की दयनीय स्थिति का पता चलता है, जहां चार में से तीन ग्रामीण परिवार प्रतिमाह 5,000 से भी कम कमाते हैं और लगभग 90 प्रतिशत परिवारों की आय प्रतिमाह 10,000 से भी कम है।” इस समिति ने अपनी रपट में भारत की 77 प्रतिशत आबादी को गरीब बताया है।

हिमांशु ने ‘मिंट’ में लिखा है, “ये आंकड़े राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के खपत सर्वेक्षण पर आधारित गरीबों और वंचितों के अन्य अनुमानों के लगभग समान ही हैं, जिसकी मीडिया ने अनदेखी की है।”

हालांकि, गरीबी के अनुमानों से इसकी तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि एसईसीसी के आंकड़ों से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 67 करोड़ लोग प्रतिदिन 33 रुपये की आजीविका पर निर्भर हैं।

खराब आवासीय गुणवत्ता :-

ग्रामीण भारत के आधे से कम घर कच्चे हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में पक्के मकान होना उच्च जीवन जीने का मानदंड है।

गरीबी और जीवन जीने के कमतर मानदंड परिसंपत्ति स्वामित्व में झलकते हैं। ग्रामीण भारत के 71 प्रतिशत घरों में मोबाइल फोन, रेफ्रिजरेटर और वाहन नहीं हैं।

शिक्षा का स्तर :-

इंडियास्पैंड ने हाल ही में बताया था कि इंडोनेशिया की आबादी की तुलना में ग्रामीण भारत में अधिक अशिक्षित लोग हैं।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजन (पीएमजीएसवाई) और स्वच्छ भारत मिशन जैसी परियोजनाएं ग्रामीण भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
(आईएएनएस/इंडियास्पैंड)

(आंकड़ा आधारित, गैर लाभकारी, जनहित पत्रकारिता मंच इंडियास्पेंड के साथ एक व्यवस्था के तहत। लेखक इंडियास्पेंड में एक नीति विश्लेषक हैं। लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।)

Advt

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button