Uncategorized

गांगुली के खिलाफ हलफनामा सार्वजनिक करने पर मजबूर हुई : जयसिंह

कोलकाता: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने सोमवार को कहा कि जब उन्हें महसूस हुआ कि एक शक्तिशाली वर्ग पूर्व न्यायाधीश ए.के. गांगुली का समर्थन कर रहा है, तब उन्हें कानून की प्रशिक्षु युवती का हलफनामा सार्वजनिक करने पर मजबूर होना पड़ा। प्रशिक्षु ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गांगुली पर अशोभनीय आचरण करने का आरोप लगाया है। 

इंदिरा जयसिंह ने कानून की प्रशिक्षु का हलफनामा रविवार को सार्वजनिक किया था। इससे घटनाक्रम का क्रमवार ब्योरा मिलता है और गांगुली पर यौन प्रताड़ना के आरोप को बल मिलता है। गांगुली सेवानिवृत्ति के बाद इस वक्त पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। 

विभिन्न तबके से गांगुली के खिलाफ आवाज उठने, उनके इस्तीफे की मांग और सर्वोच्च न्यायालय की समिति द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद भी गांगुली ने पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। 

इंदिरा जयसिंह ने एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा, “जब हमें पता चला कि समाज का एक शक्तिशाली तबका गांगुली के समर्थन में खड़ा है और लोग पूछ रहे थे कि ‘उन्होंने किया क्या?’..उनके इस्तीफा देने से इंकार करने के बाद मैं युवती का हलफनामा सार्वजनिक करने पर मजबूर हुई।”

Sanjeevani

जयसिंह ने कहा कि हलफनामा सार्वजनिक करने की जानकारी युवती को थी। 

उन्होंने कहा कि अब यह मुद्दा एक युवती का नहीं रहा, बल्कि उस संगठन की सत्यनिष्ठा से भी जुड़ गया जिसके वे प्रमुख हैं। 

हलफनामा में कहा गया है कि युवती सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ शोध सहायक के रूप में काम कर रही थी। 24 दिसंबर, 2012 को उन्होंने युवती को अपने होटल के कक्ष में बुलाया और उसे शराब पीने के लिए तथा रात उनके साथ होटल में रहने के लिए कहा। 

जयसिंह ने कहा, “रात हो चुकी थी और उन्होंने भोजन मंगवाया और इस दौरान मौखिक और शारीरिक तौर पर अपनी हरकतें शुरू कर दी।” 

हलफनामा में कहा गया है कि युवती कमरे से बाहर भागी और सीधे घर पहुंची। गांगुली ने इसके बाद उसे संदेश भेजा और फोन कर क्षमा मांगी। 

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति ने गांगुली को पिछले दिसंबर में एक होटल के कमरे में कानून की एक प्रशिक्षु के साथ अशोभनीय आचरण करने का दोषी ठहराया है। 

न्यायाधीशों की समिति ने अपनी रिपोर्ट 28 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम को सौंप दी थी, और उसे सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया। 

रिपोर्ट पर विचार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्ण पीठ ने इस घटना में सर्वोच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई करने से इंकार कर दिया था। 

पूर्ण पीठ ने कहा, “इस तथ्य पर विचार करने के बाद कि प्रशिक्षु सर्वोच्च न्यायालय की अधिकृत प्रशिक्षु नहीं थी और संबंधित न्यायाधीश घटना के दिन तक सेवानिवृत्ति के कारण पदमुक्त हो चुके थे, लिहाजा इस न्यायालय की ओर से इस मामले में आगे कार्रवाई की जरूरत नहीं है।”

वकील ने सबसे पहले छह नवंबर को जर्नल ऑफ लॉ एंड सोसायटी के एक ब्लॉग पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उसके बाद उसने ‘लीगली इंडिया’ वेबसाइट के साथ एक साक्षात्कार में आरोप को दोहराया है।

गांगुली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा
कोलकाता: सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए.के. गांगुली पर यौन प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली प्रशिक्षु युवती का हलफनामा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने सार्वजनिक कर दिया है और उसके बाद से गांगुली पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। 

युवती ने यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति के समक्ष पेश किया था। समिति का गठन युवती के खिलाफ हुए अशोभनीय आचरण की जांच के लिए की गई थी। 

एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित गांगुली के नाम पत्र में इंदिरा जयसिंह ने पूछा, “मैं न्यायाधीश गांगुली से पूछना चाहती हूं कि अगर यह सच है तो वह अपनी बच्ची के साथ कैसा बर्ताव चाहेंगे?”

जयसिंह ने गांगुली के पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के वास्ते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है। हलफनामा सार्वजनिक करने के अपने फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मानवाधिकार आयोग की सत्यनिष्ठा और इसके सुचारु संचालन से जुड़ा है। 

जयसिंह के इस कदम के बाद केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने भी गांगुली के इस्तीफे की मांग की है। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मसले में कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दो बार पत्र लिखा है। 

इस बीच प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को कोलकाता स्थित मानवाधिकार आयोग के समक्ष एकत्र होकर गांगुली के इस्तीफे की मांग की। 

अब तक इस्तीफा देने से इंकार कर रहे गांगुली ने इस मसले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि हलफनामा का प्रकाशन उचित नहीं है। (आईएएनएस)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button