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खुद को जनता का दास बताने वाले मुख्यमंत्री के कथनी और करनी में अंतर: अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ

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News Wing Ranchi, 25 November: मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद को जनता का दास कहते हैं, लेकिन उनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है. बार-बार समझौता होने के बावजूद शिक्षकों के लंबित मांगों को सरकार नहीं मान रही है. उक्त बातें सरकार के खिलाफ अपने19 सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को राजभवन के सामने धरना दे रहे अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने कही. धरना में संघ के सलीम सहाय, रंजीत मोहन, कृष्ण शर्मा, मदन स्वांसी, अगम लाल महतो, योगेन्द्र कुमार, धनेष्वर राव, शैलेन्द्र कुमार शर्मा समेत कई शिक्षक मौजूद थे.

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19 सूत्री मांगों को लेकर दिया धरना

प्राथमिक शिक्षक संघ रांची इकाई के करीब 500 प्राथमिक शिक्षक राजभवन के सामने अपनी मांगों को लेकर धरना में शामिल हुए. 19 सूत्री मांग में प्रमुख रुप से सातवें वेतन पुनरीक्षण के तहत केंद्र के अनुरूप मकान भाड़ा भत्ता, दिव्यांग भत्ता सहित कई भत्तों पर स्वीकृति की मांग की. छठे वेतन उत्क्रमित वेतनमान में वेतन निर्धारण में लगी रोक को हटाने संबंधी मांग के साथ कई प्रमुख मांगे शामिल हैं.

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रिर्पोटिंग का होता है बोझ, ठीक से पढ़ा नहीं पाते

प्राथमिक शिक्षकों का कहना है की सरकार प्राथमिक शिक्षकों को जरुरत के अधिक फिल्ड रिर्पोटिंग करवाती है. कभी जनगणना, कभी वोटर कार्ड सहित कई अन्य कई चीजों के लिए पढाई से अलग कार्य करवाती है, जिस वजह से बच्चों की पढाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं.

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शिक्षा और शिक्षक दोनों की हो रही अवहेलना

शिक्षकों ने कहा कि सरकार शिक्षकों को दूसरे कामों में लगाकर और उनके मांगों को पूरा करने का भरोसा देकर उसे ठंडे बस्ते में डालकर उनकी उपेक्षा कर ही रही है, उसके अलावा सरकार को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं है की अगर शिक्षक रिर्पोटिंग करेंगे तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन, ऐसा करके सरकार शिक्षा और शिक्षक दोनों की अवहेलना कर रही है.

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