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खबरें कोर्ट की : रिनपास नियुक्ति घोटाला : डॉ एके नाग की जमानत याचिका खारिज

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Ranchi : एसीबी के विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार की अदालत ने रिनपास नियुक्ति घोटाला मामले के आरोपी डॉ अशोक कुमार नाग की जमानत याचिका गुरुवार को खारिज कर दी. गौरतलब है कि बुधवार को विशेष अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से बहस सुनने के बाद फैसला को सुरक्षित रख लिया था. यह मामला रिनपास में वर्ष 2015 में अवैध तरीके से नियुक्ति घोटाले से जुड़ा है. इस मामले में डॉक्टर नाग के अलावा डॉ अमूल रंजन तथा तत्कालीन दो स्वास्थ्य मंत्रियों  हेमलाल मुर्मू और राजेंद्र प्रसाद सिंह सहित 14 आरोपी हैं. यह मामला 2015 से चल रहा हैजिसमें पूर्व डायरेक्टर डॉ अमूल रंजन की नियुक्ति गलत तरीके से की गई थी. साथ ही वित्तीय अनियमितता की भी जांच एसीबी की टीम कर रही है.

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क्या है मामला

रिनपास में हुए वित्तीय और नियुक्ति घोटाले के आरोपी डॉ. अमूल रंजन पूर्व निदेशक रिनपासडॉ. अशोक कुमार नाग पूर्व निदेशक रिनपासडॉ. मनीषा किरण असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ. मसरूर जहां असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ. कप्तान सिंग सेंगर असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ. पवन कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ. बलराम प्रसाद असिस्टेंट प्रोफेसरअनिल कुमार साहू स्टाफदिवाकर सिंह स्टाफरंजन कुमार दास स्टाफ और सुरेंद्र कुमार रोहिला के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने 11 दिसंबर 2017 को पत्र भेजकर विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया था. शिकायतकर्ता ने आयुक्त को जानकारी दी थी कि उक्त अधिकारियों ने इस परीक्षा में अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से ही गड़बड़ी की थी. लिखित परीक्षा में शून्य और माइनस 11 अंक लाने वाले विद्यार्थी को इंटरव्यू में बुला लिया गया था. परीक्षा के लिए कोई सही मापदंड का पालन नहीं किया गया है.

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डोरंडा कोषागार मामले में पूर्व मंत्री सहित तीन की गवाही दर्ज

चारा घोटाला के डोरंडा कोषागार  मामले में बिहार के पूर्व मत्स्य विभाग पशुपालन मंत्री रामजीवन सिंह और नागालैंड के दो अधिकारियों की गवाही दर्ज कराई गई. सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने गुरुवार को बताया कि मोकोकचुंग के आरटीओ अहितो अच्च्यूमितुगसंग नागालैंड  के डीटीओ सुकनुंग मेलचु की गवाही  कलमबद्ध किया गया. डोरण्डा से अवैध निकासी आरसी 47ए/96  मामले में बिहार के पूर्व पशुपालन मंत्री से सीबीआई ने आरसी 20ए/96 मामले को एडाप्ट किया गया. पूर्व मंत्री ने बताया कि वर्ष 88 से 89 में पशुपालन आपूर्ति के बिल पर एजी ने आपत्ति दर्ज कराई थी. आपूर्तिकर्ता के बिल के साथ संलग्न चालान पर वाहनों का गलत नंबर दर्शाया गया था. जिसमें जांच पशुपालन विभाग द्वारा  यह कहते हुए बंद करने की अनुशंसा की गयी थी कि वाहनों का नंबर संबंधित फाइल मेरे पास आया तो मैंने उसकी जांच सीबीआई से करने की अनुशंसा करते हुए फाइल को सील (बंद) कर  मुख्यमंत्री  लालू प्रसाद के पास भेज दिया था.

फिर वहां से फाइल मेरे पास लौट कर नहीं आयी. बाद में पशुपालन विभाग मेरे पास भी नहीं रहा. लालू की ओर से जिरह भी  एडाप्ट किया गया. वहीं मामले में नागालैंड के दो अधिकारियों की गवाही हुई. मोकोकचुंग के आरटीओ अहितो अच्च्यूमि द्वारा भेजे गये सूचना में  दो मोटरसाइकिल, एक बस, एक कार और तीन स्कूटर थे. जिसमें एक का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ था. इसके अलावा तुगसंग नागालैंड के डीटीओ सुकनुंग मेलचू ने  एक ही वाहन का नंबर दिया था, जो वहां रजिस्टर्ड ही नहीं था. इधर सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी आरोपियों की पेशी हुई. यह मामला डोरंडा कोषागार से 139. 35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी से जुड़ा है.

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