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क्या मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से कहीं खोते जा रहे हैं हमारे रिश्ते

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News Wing Desk : हमारी जिंदगी बहुत फास्ट हो गयी है. यानी तेज रफ्तार जिंदगी और मॉडर्न लाइफस्टाइल की ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं. अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागते हुए ना हमें खाने का फिक्र रहता है न रिश्तों की चिंता रहती है, न सेहत की सुध होती है और न अपनों को खोनेपाने की चिंता रहती है. इस लाइफ स्टाइल का नतीजा ये हो रहा है कि हम बहुत कुछ हासिल तो कर रहे हैं, लेकिन इसमें काफी कुछ पीछे छूटता भी जा रहा है. हमारे इस सो कॉल्ड मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रिश्तों को तो प्रभावित किया है साथ ही हमारे तनमन की शांति, सुकून को छीन लिया है.

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बदल गयी है प्राथमिकता

हमारी जिंदगी की पहली जरूरत अपनी और अपनों की खुशियां हुआ करती थी. सुबह की चाय और डिनर परिवार एक साथ किया करता था. फेवरेट टीवी शो भी पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता था. इच्छाएं सीमित थीं और ख्वाहिशें गिनतियों में थी. लेकिन अब कामयाब जिंदगी की चाहत और अधिक पैसा कमाने की चाह लोगों की जरूरत बन गयी है. अब ना अपनों के लिए टाइम है और ना ही इस बात की किसी को चिंता है कि परिवार के साथ टाइम बिताना भी जरूरी है. सुखसुविधाओं से घर भरा है लेकिन खुशियां और अपनापन नहीं है. लोग एक घर में ऐसे रहते हैं जैसे एक-दूसरे को पहचानते ही नहीं हैं. कितनी बार तो बिना बात किये सप्ताह-सप्ताह निकल जाते हैं. यहां मैं एक जोक का जिक्र करना चाहूंगी, कहने को तो जोक है पर आज की जिदंगी में यही सच्चाई है.

एक लड़का सुबह से बहुत परेशान सा था, क्योंकि घर में ना लाइट थी और ना इंटरनेट. वो परेशान था कि क्या करें! तब उसने देखा बाहर घर के लोग एक साथ बैठकर बात कर रहे हैं. वो भी उनलोगों के साथ बैठ गया. कुछ देर बाद लाइट आ गयी. वह उठकर अपने रूम में चला गया और अपने दोस्त को मैसेज किया. उसने लिखा यार आज अपने घर वालों के साथ बैठा था. सारे लोग अच्छे हैं यार, मुझे मालूम ही नहीं था. कहने को तो ये जोक है लेकिन यही जिंदगी की सच्चाई है.

 

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कम्युनिकेशन गैप

रिश्तों में खामोशी बढ़ रही है, सूनापन फैल रहा है. अपनापन सिमट रहा है. बिजी लाइफ, सुबह से शाम तक की भागदौड़, स्ट्रेस और तनाव ने रिश्तों को भी खामोश कर दिया है. मोबाइल और सोशल मीडिया पर घंटों चैटिंग करने को आज की लाइफस्टाइल की जरूरत माननेवाले लोग परिवार के बीच रहकर भी आपस में बातचीत करना जरूरी नहीं समझते. रिश्तों में ये खामोशी रिश्तों के लिए साइलेंट किलर की तरह साबित हो रही है.

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नो टाइम फॉर सेक्स

बदलती लाइफस्टाइल का सबसे ज्यादा असर सेक्स लाइफ पर पड़ा है. मॉडर्न लाइफस्टाइल यानी सारी सुविधाएं, ऐशोआराम, बिजी लाइफ, लेट नाइट तक काम करना, इन सबके बीच लोग भूलते ही जा रहे हैं कि वैवाहिक जीवन में सेक्स कितना महत्वपूर्ण है. नतीजा रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं. वैवाहिक जीवन के बाहर प्यार की तलाश बढ़ी है. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बढ़ रहे हैं. लाइफस्टाइल ने रिश्तों में कमिटमेंट की जरूरत को भी खत्म कर दिया है. एडजस्टमेंट अब लोग एक हद तक ही करना चाहते हैं और अगर एडजस्ट नहीं हो पाया, तो अलग हो जाना बेहतर समझते हैं.

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रिश्तों में भी बढ़ा है स्ट्रेस

इस फास्ट जिंदगी ने हमारे स्ट्रेस को इतना ज्यादा बढ़ा दिया है कि ये स्ट्रेस रिश्तों में भी नजर आने लगा है. लोग अपने लिए फाइनेंशियल सिक्योरिटी, कामयाबी जुटाने में इतने मशगूल हैं कि उन्हें रिश्तों की फिक्र ही नहीं रह गयी है. ये सब पाने की चाह स्ट्रेस में डाल देती है और इस स्ट्रेस का असर  गुस्सा और चिड़चिड़ापन के रूप में हमारे रिश्तों में भी नजर आने लगी है.

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सोशल रिलेशन को भी कर रहा है प्रभावित

मॉडर्न लाइफस्टाइल ने सोशल रिलेशनशिप को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. सुकून से बैठकर अपनों से बात करना अब लोगों को समय की बर्बादी लगती है. चाहे हालचाल पूछना हो या बर्थडेएनिवर्सरी विश करना हो, किसी को इन्वाइट करना हो या उनके बारे में और कुछ जानना हो, सब कुछ लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर निपटा देते हैं. उनका कहना है कि जो काम घर बैठे फोन पर किया जा सकता है, इसके लिए किसी के घर जाकर समय क्यों बर्बाद करें.

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