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क्या भाजपा उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए निगम ने 20 दिनों तक शहर में नि:शुल्क पानी बांटने की योजना बनाई !

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Ranchi: साफ-सुथरे चुनाव के दावों पर धनबल, तो कभी सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगना आम बात होती जा रही है. झारखंड में आयोजित नगर निकाय चुनाव के मेले में भी कुछ ऐसा हीं हो रहा है. रांची नगर निगम चुनाव में शुरुआत से ही आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होता आ रहा है. पोस्टर बैनर की शिकायत के बाद अब सरकार पर सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है. हालांकि इस मामले में अबतक छह केस दर्ज हो चुके हैं. जबकि 2013 में हुए निकाय चुनाव में 36 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन कोई कार्रवाई पांच साल के बाद भी नहीं हुई.

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सुविधा पर संशय

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दरअसल नया हंगामा रांची नगर निगम की तरफ शहर में निःशुल्क जलापूर्ति की गई व्यवस्था पर हो रहा है. विपक्ष इसे आदर्श चुनाव अचार सहिंता का उल्लंघन मान रहा है और इसे लेकर झारखंड राज्य मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है. इधर निगम की ओर से किए गए जलापूर्ति व्यवस्था को देखने पर कई सवाल खड़े होते हैं. रांची नगर निगम ने पत्र जारी कर कहा है कि शहर में पानी की समस्या को देखते हुए सभी वार्ड में 29 मार्च से 17 अप्रैल तक पानी टैंकर से निःशुल्क जलापूर्ति की जायेगी. इसके लिए निगम ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है. उधर 16 अप्रैल को रांची नगर निगम चुनाव के लिए मतदान किया जाना है, और इस बार का निकाय चुनाव दलीय आधार पर लड़ा जा रहा है. चुनाव मैदान में सभी पार्टियों ने मेयर और डिप्टी मेयर के लिए अपने उम्मीदार उतारे हैं. आपकों बता दें कि वर्तमान में रांची मेयर, डिप्टी मेयर दोनों ही भाजपा के नेता हैं, और इस बार भी पार्टी ने इन्हीं दोनों को मेयर और डिप्टी मेयर का उम्मीदवार बनाया है. इन्हीं परिस्थियों को देख विपक्ष को निगम की इस सुविधा पर संशय है.

हाहाकार पर क्यों नहीं जागा निगम

निगम के इस फैसले पर नेताओं का तर्क हैं कि रांची शहर में फरवरी से ही बर्तन-बासन लेकर सड़क पर लोग पानी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. बोर्ड की पिछली कई बैठक में पार्षदों ने भी पानी की समस्या पर हंगामा किया. जल संकट के इतने हाहाकार के बाद भी निगम की नींद नहीं खुली. अब चुनाव के दौरान सरकार अपने मेयर और डिप्टी मेयर के पक्ष में मौहाल बनाने के लिए निगम का दुरुपयोग कर रही है. इसपर झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव कहते हैं कि पानी बिना किसी रोक-टोक के मिले, ये बहुत आवश्यक है. लेकिन ऐसी व्यवस्था चुनाव की दृष्टिकोण से करना जांच का विषय है. क्योंकि निगम की तरफ जलापूर्ति के लिए किए इंतजाम सिर्फ 17 अप्रैल तक क्यों. इसे रेगुलर क्यों नहीं किया गया. ये चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और इसपर चुनाव आयोग को संज्ञान लेना चाहिए.

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सुविधा नहीं, प्रलोभन है

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निगम के इस फैसले पर एतराज जताते हुए चुनाव आयोग को लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य का कहना हैं कि सरकार या निगम का यह फैसला जनता को सुविधा नहीं, बल्कि प्रलोभन देने वाला है. जब चुनाव प्रक्रिया अपने आखरी पड़ाव पर है तो इस तरह की घोषणा का क्या मतलब होता है. पार्टी इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानती है. क्या शहरवासियों को 28 मार्च से पहले पानी की किल्लत नहीं थी, क्या शहर में पानी की समस्या सिर्फ 17 अप्रैल तक ही रहेगी. पार्टी की मांग है कि चुनाव आयोग इसपर संज्ञान में लेकर कार्रवाई करे. आजसू पार्टी से डिप्टी मेयर के उम्मीदवार मुनचुन राय भी इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बता रहे हैं. राय का कहना है कि सरकार अपने हताश उम्मीदारों के लिए जनता को लुभाने की कोशिश कर रही है. इस तरह की कोशिश सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग कर करना दूर्भाग्यपूर्ण है. चुनाव आयोग से इसकी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की जायेगी. वहीं कांग्रेस पार्टी से रांची नगर निगम चुनाव में डिप्टी मेयर के उम्मीदावर राजेश गुप्ता ने भी निगम के इस फैसले पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि रांची शहर से पानी की समस्या दूर हो, इसका मैं शुरु से ही पक्षधर हूं. लेकिन जिस तरह से चुनाव के दौरान यह फैसला लिया गया, इससे यही प्रतीत होता है कि सरकार निगम का दुरुपयोग कर लोगों को प्रभावित करना चाहती है. आयोग को इसपर संज्ञान लेना चाहिए.

आयोग का पक्ष

झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव ज्ञानेंद्र कुमार इस पूरे मामले पर कहना है कि इसकी शिकायत मिली है. पूरे वस्तुस्थिति को देखा जायेगा. अगर मामला चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में आता है नियमानुसार कार्रवाई होगी.

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