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क्या झारखंड पुलिस बूढ़ा पहाड़ इलाके में युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले 81एमएम मोर्टार का इस्तेमाल कर रही है !

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Manoj dutt dev

Ranchi, 27 November: खबर है कि झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के जवान बूढ़ा पहाड़ इलाके में 81एमएम मोर्टार का इस्तेमाल कर रही है. 81 एमएम मोर्टार का इस्तेमाल युद्ध क्षेत्र में अक्सर किया जाता है. सूत्र बताते हैं कि झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ इतने ज्यादा शक्तिशाली मोर्टार का इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है. 81 एमएम मोर्टार का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए झारखंड पुलिस के प्रवक्ता आइजी अभियान आशीष बत्रा से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन उनका मोबाइल बंद था और वह कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले. सीआरपीएफ के आइजी झारखंड सेक्टर संजय आनंद लाटकर से भी संपर्क नहीं हो सका है. बूढ़ा पहाड़ इलाका नक्सलियों की शरणस्थली है और यह पहाड़ी झारखंड के लातेहार व गढ़वा जिला को छत्तीसगढ़ से जोड़ती है. पिछले करीब एक माह से यहां नक्सलियों के खिलाफ पुलिस अभियान चला रही है. लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है. उल्टे दो घटनाओं में पुलिस को नुकसान ही उठाना पड़ा है. 

23 नवंबर से लगातार हो रहे धमाके, 20 किमी दूर तक सुनाई देते हैं आवाज

बूढ़ा पहाड़ इलाके में पिछले चार दिनों से लगातार धमाके हो रहे हैं. धमाकों की आवाज बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र से 20 किमी दूर तक सुनाई देती हैं. बूढ़ा पहाड़ इलाके में कई गांव भी हैं. जो बहुत ही पिछड़े हैं. ग्रामीणों को भोजन भी ठीक से नहीं मिल पाता है. सूत्रों ने बताया है कि पुलिस के जवान पहाड़ी क्षेत्र से करीब पांच किमी की दूरी से मोर्टार छोड़ रहे हैं. जिसकी आवाज 20 किमी तक सुनाई पड़ रही है. इस तरह के मोर्टार के इस्तेमाल से बूढ़ा पहाड़ इलाके में रहने वाले ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल में पड़ने का खतरा है. 

वर्ष 2013 में सरकार ने नहीं दी थी 81एमएम मोर्टार के इस्तेमाल की इजाजत

81एमएम मोर्टार का इस्तेमाल नक्सलियों के खिलाफ करने के लिए वर्ष 2013 में भी पुलिस ने सरकार से इजाजत मांगी थी. लेकिन सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. तब लातेहार के कुमंडीह में इसके इस्तेमाल की इजाजत मांगी गयी थी. पुलिस के सीनीयर अफसरों के मुताबिक देश के भीतर तैनात सुरक्षा बल के जवानों को एजीएल, सीजीआरएल, 51 एमएम मोर्टार आदि के इस्तेमाल की इजाजत है.  81एमएम मोर्टार के इस्तेमाल से पहले स्थानीय सरकार से इजाजत लेनी होती है. 

कोयल और बूढ़ा नदी के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल की तैनाती

बूढा पहाड़, लातेहार जिला के पूर्व से पक्षिम की दिशा में बहने वाली कोयल नदी और दक्षिण से उत्तर कि दिशा में बने वाली बूढा नदी के कारण बिल्कुल कटा हुआ इलाका है. लातेहार जिला से यदि सुरक्षा बल या नक्सली को बूढा पहाड़ जाना होता है तो उन्हें बूढा नदी या कोयल नदी को पार करना ही पड़ता है. यही स्थिति नक्सलियों के लिए भी है. बूढ़ा पहाड़ इलाके से बाहर निकलने के लिए दोनों में से एक नदी को उन्हें भी पार करना पड़ेगा. इस कारण पुलिस ने इन दोनों नदी पर पहरा लगा रखा है. चप्पे-चप्पे पर पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती की गयी है.

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