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क्या आपका बच्चा नहीं मानता आपकी बात, तो करें ये उपाय…….

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Ranchi : सारे पैरंट्स की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों को बेहतरीन परवरिश दें. वो कोशिश भी करते हैं, फिर भी ज्यादातर पैरंट्स बच्चों के बिहेवियर और परफॉर्मेंस से खुश नहीं होते. उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया… इसके लिए काफी हद तक पैरंट्स ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है, यह वो तय ही नहीं कर पाते. कितनी बार ऐसा होता है कि हम बच्चों को किसी काम को करने के लिए कहते रहते है पर उनपर हमारे बात का कोई असर नहीं होता है. कभी-कभी बच्चें हमारी बात को सुनकर भी अनसुना कर देते है. खासकर जब वो अपनी पंसद की कोई काम कर रहे हो. ऐसे स्थिति में कई बार हम चिड़चिड़े हो जाते है और बच्चे पर हाथ उठा देते है या डांट लगा देते है. पर हमें इस स्थिति से बचना चाहिए, क्योंकि एक समय के बाद उनपर हमारी बातों का असर खत्म होने लगता है. बच्चे अपनी मनमानी करने लगते है और जिद्दी हो जाते है. क्या आप चाहती हैं कि आपका बच्चा आपकी सुनें? तो करें ये काम….

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1-बच्चे का ध्यान खींचिए

सबसे पहले उनका अटेंशन पाने की कोशिश करिए. तब वो आप पर ध्यान देंगा और तभी वो आपकी बात भी सुनेगा. आपकी बात उनके लिए केवल एक आवाज है, आप क्या कहती हैं, उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है. तो अब सवाल उठता है कि आप अपने बच्चों का अटेंशन कैसे पाएंगी? जब आप अपने बच्चे से कुछ कह रही हों तो बैकग्राउंड में किसी भी तरह का शोर नहीं होना चाहिए. टीवी, म्यूजिक, वीडियो गेम्स, खिलौने आदि को हटा दें. बच्चों से दूर से नहीं बल्कि उनके पास जाकर अपनी बात कहें. दूसरे कमरे से अपनी बात ना कहें. बातचीत करने से पहले अपने बच्चे की हाइट के अनुसार झुक जाएं. अगर हो सकें तो बैठ जाएं और उनकी आंखों में आंखें डालकर बात करें. जब वे आपसे बात कर रहे हों तो आप जो काम कर रही हैं, उसे छोड़ दें और ध्यान से उनकी बात सुनें.

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2- बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल ना करें

आपको जो बात कहनी है, उसी पॉइंट पर रहकर बात करें. बहुत ज्यादा लंबे वाक्य और बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल ना करें. घुमा-फिराकर बात ना करें और सरल और सीधे शब्दों में उनसे अपनी बात कहें. कई बार बच्चों को इसलिए भी आपकी बातें याद नहीं रहती हैं क्योंकि आपने बहुत लंबा निर्देश दिया था और उनके दिमाग से आपकी बात निकल गई. जैसे- आप कई बार केवल एक शब्द में अपनी बात कह सकती हैं- बिस्तर पर जाने से पहले ब्रश कर लेना कहने के बजाए कहें- टीथ!.  तुम अपने कमरे में जाओ, यहां खड़े मत रहो कहने के बजाए रूम! कहें. एक समय पर एक ही निर्देश दें तभी वह आपकी हर बात को मानेगा. अगर आप एक ही बार में अपने बच्चों को कई सारे निर्देश देना चाहती हैं तो इंतजार करें कि वह पहले एक काम खत्म कर ले.अगर आपको सारे निर्देश एक बार में ही देने हैं तो नंबरों का इस्तेमाल करें जैसे- सबसे पहले डॉग को फीड कराएं, दूसरा उसे वॉक पर ले जाएं औऱ तीसरा घर आने पर अपने हाथ धो लें.

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3सब्र से लें काम

अधिकतर स्कूलों में टीचर्स वेट टाइम के कॉन्सेप्ट में यकीन रखते हैं. जब आप अपने बच्चे से कुछ कहें तो उन्हें कम से कम 7-8 सेकेंड का समय दें ताकि वे आपकी बात समझ सकें. इसी ट्रिक से बच्चे स्कूल में बातें मानते हैं. कुछ बच्चों को इससे ज्यादा समय लग सकता है. अगर आपका बच्चा तुरंत जवाब नहीं देता है तो जरूरी नहीं है कि वह आपकी बात को नजरअंदाज कर रहा है. वह यह सोच रहा होता है कि उसे क्या और कैसे जवाब देना है. इस वक्त में आप चिल्लाने ना लग जाएं, बल्कि उन्हें थोड़ा सा टाइम दें ताकि उनके दिमाग में डेटा प्रोसेस हो सकें!

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4बच्चों को विकल्प दें

सभी बच्चे हर निर्देश का पालन करने वाले नहीं होते हैं. जब आप उन्हें कुछ कहने के लिए कहती हैं तो वो आपकी बात मानने से इनकार कर देते हैं और विद्रोही हो जाते हैं. खासकर जब वे टीनेज में पहुंचते हैं. आप उन्हें चॉइस की ताकत दीजिए. उन्हें विकल्प दीजिए. जैसे- या तो रूम साफ करें या फिर अपनी बहनों के साथ मूवी ना देखने जाएं. या तो आप अपनी टेबल साफ कर लें या फिर बाद में बर्तन साफ कर लें.

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5अपनी एक्सपेक्टेशन तय करें

नियम और उम्मीदें एक बच्चे से अपनी बात मनवाने के लिए बहुत जरूरी हैं. आप अपने बच्चों से बात करते वक्त उन्हें दृढ़ तरीके से बताएं कि आप उनसे क्या उम्मीद करती हैं. आप अपनी उम्मीदों की एक लिस्ट बनाकर फ्रिज या दरवाजे पर चिपका सकती हैं. आप इसे समय-समय पर बदलते रहें लेकिन इन नियमों में ढील ना दें. आप बच्चों से इन पर बहस में कतई ना पड़ें.

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6उनकी तरह से महसूस करें

कई बार थोड़ा सा उनकी तरह से सोचना, उनकी जगह पर खुद को रखकर देखने से चीजें बहुत हद तक सुधर सकती हैं. जैसे- अगर आप कहती हैं कि अपनी बहन से मारपीट करना बंद करो की जगह कहें- मैं समझती हूं कि तुम्हारी बहन ने तुम्हारे खिलौने तोड़कर तुम्हें दुख पहुंचाया है लेकिन किसी को मारना भी अच्छी बात नहीं है. मान लीजिए आप उनसे कहती हैं कि टीवी तुरंत बंद करो तो इसके बजाए कहें- मुझे पता है कि तुम्हें यह शो देखना बहुत पसंद है लेकिन कल तुम्हें स्कूल जाना है और फिर तुम्हें सुबह उठने में मुश्किल होगी. जब भी आप अपने बच्चे पर चिल्लाना चाहती हैं, एक सेकेंड के लिए रुकें और गहरी सांस लें. सांस लें और छोड़ें. अपने बच्चे से बात करने से पहले फिर से खुद को कूल करने का वक्त लें. अगर आप उन पर चिल्लाना हैं तो आपका बच्चा भी अपना बचाव करने की कोशिश में बहस और लड़ाइयां करना सीख जाएगा जिससे स्थिति और खराब होती चली जाएगी.

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7बच्चों से एक मजबूत बॉन्ड बनाएं

आपके बच्चों के साथ आपका रिश्ता कितना मजबूत है, इससे भी यह निर्धारण होता है कि आपका बच्चा आपकी बात सुनेगा या नहीं. बच्चा अपने पैरेंट्स के नजदीक रहना चाहता है तो अपने बच्चे के साथ मजबूत बॉन्ड बनाएं. एक ऐसा रिश्ता जिसमें प्यार हो, दोस्ती हो और सम्मान हों. अगर आपका अपने बच्चे के साथ रिश्ता अच्छा है तो आपका बच्चा आपकी अधिकतर बातें मानेगा क्योंकि वह तब आपकी और आपकी बातों की परवाह करने लगता है.

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8उनके व्यवहार पर ध्यान दें

समस्या बच्चों में नहीं, उनके व्यवहार में है. इसलिए जब आप अपने बच्चे को कुछ समझाना या सिखाना चाहती हैं तो आप उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें सजा देने से बचें. चिल्लाने के बजाए आप उनसे धीमी आवाज में बार-बार कहें कि प्लीज इसे बंद करो. वो मत करो. जब वे आपकी बात सुन लेते हैं तो उन्हें शाबाशी दें और उन्हें गले लगाकर प्यार करें. कभी -कभी अच्छे काम करने पर उन्हें घुमाने ले जाएं या फिर कोई और छोटे-छोटे इनाम दें.

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9अगर फिर भी आपको गुस्सा आ जाए

अंत में आपको यह याद रखना होगा कि इस दुनिया में कोई परफेक्ट नहीं होता है. इसलिए अगर आपको अपने बच्चे पर गुस्सा आ जाता है और आप उन पर चिल्लाने को मजबूर हो जाती है तो इसमें दुखी होने की जरूरत नहीं है. आप खुद को इसके लिए दोषी करार ना दें. लेकिन आपको अपनी इस गलती को सुधार लेना चाहिए. जब गुस्सा शांत हो जाए तो अपने बच्चे से चिल्लाने के लिए माफी मांगें. लेकिन साथ ही आप अपने बच्चे को यह भी बताएं कि उन्हें अपने व्यवहार को सही करना होगा. उन्हें क्यों ऐसा नहीं करना चाहिए, इसके पीछे की वजह भी बताएं. 

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