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कौन बनेगा कोल इंडिया का चैयरमैन !

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: देश की 80 फीसदी उर्जा की जरूरत को पूरा करने वाली भारत सरकार की इकाई कोल इंडिया की सबसे ताकतवर कुर्सी पर कौन बैठेगा? आज के समय में यह सवाल कोल इंडिया से जुड़े लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल है. फिलहाल कोल इंडिया की कमान सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह के पास है. कोल इंडिया के कोल चेयरमैन के लिए एक सर्च कमेटी बनायी गयी थी. कमेटी में कोल इंडिया और पीएमओ की तरफ से अधिकारी सदस्य थे. 35 आवेदनों में नौ अधिकारियों को कमेटी ने शॉटलिस्ट किया. शॉट लिस्ट होने के बाद 16 फरवरी 2018 को सभी नौ अधिकारियों को फिर से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. पुष्ट सूत्रों की बात माने तो कमेटी ने इन नौ उम्मीदवारों में से तीन उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर पीएमओ को भेज दिया गया है. इसी बीच कार्यवाहक कोल इंडिया के चेयरमैन गोपाल सिंह के कार्यकाल को तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया. इस एक्सटेंशन के बाद एक बार फिर से कोल इंडिया में चर्चा का बाजार गर्म है कि आखिर कौन होगा कोल इंडिया का चेयरमैन ?

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कौन हैं वो तीन जिनके नाम कमेटी ने पीएमओ को भेजा है

कोल इंडिया के चेयरमैन के लिए सर्च कमेटी ने तीन नामों को आगे बढ़ाया है. आने वाले दिनों में जो भी कोल इंडिया का चेयरमैन बनेगा, इन्हीं तीनों में से एक होगा. इन तीनों में डब्लयूसीएल के सीएमडी आरआर मिश्रा हैं. सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह हैं और एससीसीएल (सिंगरैनी कोलियरिज कंपनी) के सीएमडी एस श्रीधर हैं. तीनों अधिकारी अपनी दावेदारी को पुख्ता मान कर चल रहे हैं. लेकिन सरकार को किसी एक ही नाम पर मुहर लगानी है. इधर इस बीच वर्तमान कार्यवाहक चेयरमैन गोपल सिंह को एक्सटेंशन देने से सस्पेंस और बढ़ गया है.

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क्यों पुख्ता है आरआर मिश्रा की दावेदारी

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आरआर मिश्रा डब्यूसीएल के सीएमडी हैं. डब्ल्यूसीएल यानि वेस्ट कोल फील्ड लिमिटेड का कार्यक्षेत्र भी भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में है. कोल इंडिया के इस इकाई का मुख्य कार्यालय नागपुर है. यहां बताना जरूरी है कि आरएसएस का कार्यालय भी नागरपुर में स्थित है. बताया जा रहा है कि डब्ल्यूसीएल के सीएमडी होने के नाते नागपुर में आरआर मिश्रा काफी दिनों से हैं. साथ ही आरएसएस कार्यालय के बड़े पदधारियों के साथ इनका उठना-बैठना भी काफी है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि नागपुर में कार्यालय होने का फायदा इन्हें मिल सकता है.

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क्यों पुख्ता है गोपाल सिंह की दावेदारी

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गोपाल सिंह एक सिंतबर से पहले सिर्फ सीसीएल (सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड) के सीएमडी थे. एक सितंबर 2017 को इन्हें कोल इंडिया का कार्यवाहक चेयरमैन बना दिया गया. एक सितंबर से अभी तक वो ही कार्यवाहक चेयरमैन हैं. 28 फरवरी से उन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन भी मिला है. कोल इंडिया का 2017-18 का कोयला प्रोडक्शन का टारगेट 600 मिलियन टन है. अप्रैल से सितंबर तक यानि छह महीने में कोल इंडिया का प्रोडक्शन 232 मिलियन टन था. सितंबर यानि गोपाल सिंह के कार्यवाहक चेयरमैन बनने के बाद फरवरी तक यह उत्पादन 495 मिलियन टन पहुंच गया है. यानि पांच महीने में हर महीने करीब 53 मिलियन टन के उत्पादन दर से 263 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ. 2017-18 वित्त वर्ष के लिए हर महीने का औसतन उत्पादन 50 मिलियन टन रखा गया था. ऐसे में गोपाल सिंह के पांच महीने का कार्यकाल काफी अच्छा माना जा रहा है. अच्छे उत्पादन की वजह से मंत्रालय में इन्हें काफी अच्छे टेक्नोक्रैट के तौर पर देखा जा रहा है. टारगेट की ओर तेजी से बढ़ रहे गोपाल सिंह मंत्री पियूष गोयल के भी चहेते हो गये हैं. ऐसे में इनकी दावेदारी काफी पुख्ता मानी जा रही है.

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क्यों पुख्ता है एन श्रीधर की दावेदारी

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एससीसीएल (सिंगरैनी कोलियरिज कंपनी) के सीएमडी एन श्रीधर की दावेदारी भी पुख्ता मानी जा रही है. देखा गया है कि जहां एक टेक्नोक्रैट को बढ़ावा देने का मौका मिलता है, वहां टेनक्नीशियन लॉबी पीछे नहीं हटते. वैसे ही आईएएस लॉबी भी किसी आईएएस को खूब स्पोर्ट करती है. एससीसीएल (सिंगरैनी कोलियरिज कंपनी) के सीएमडी एन श्रीधर 1997 बैच के आईएएस हैं. बताया जा रहा है कि कोल इंडिया समेत पीएमओ की आईएएस लॉबी भी इन्हें अपना पूरा समर्थन दे रही है. लेकिन असली मुहर पीएमओ की लगनी है. फैसला पीएम नरेंद्र मोदी को करना है. लेकिन  इतना तय माना जा रहा है कि कोल इंडिया के चेयरमैन पर इन्हीं तीनों में से कोई एक विराजमान होंगे.

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