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कोयला घोटाला मामले में मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता समेत अन्य दोषी करार

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News Wing
Ranchi, 13 December:
सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज भरत पराशर ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता समेत  पूर्व झारखंड चीफ सेक्रेटरी एके बसु और प्राइवेट कंपनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) के खिलाफ दर्ज कोयला घोटाले के एक मामले में आज बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया है. धारा 120 के तहत इन्हें दोषी करार दिया गया है. हांलाकि कल 14 दिसंबर को सजा इस मामले में उन्हें सजा सुनायी जाएगी. राझरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को अनियमित तरीके से कोलकाता के वीआईएसयूएल को गलत तरीके से आवंटित करने में इन लोगों को आपराधिक षड्यंत्र रचने का भी दोषी पाया गया. इन सभी की सज़ा का ऐलान गुरुवार को किया जाएगा.

गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश भरत पराशर ने सभी आरोपियों को फैसला सुनाए जाने की तारीख पर अदालत में मौजूद रहने का आदेश दिया था. यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित अनियमिताओं से संबंधित है.

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कौन-कौन हैं घोटाले में शामिल

कोड़ा, गुप्ता और कंपनी के अलावा, मामले में अन्य आरोपी झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए के बसु, दो लोक सेवक बसंत कुमार भट्टाचार्य, बिपिन बिहारी सिंह, वीआईएसयूएल के निदेशक वैभव तुलस्यान, कोड़ा के कथित करीबी सहयोगी विजय जोशी और चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान शामिल हैं. आठ आरोपी उनके खिलाफ जारी समन के बाद अदालत में पेश हुए थे. इसके बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी.

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इन धाराओं के तहत लगे आरोप

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी ( आपराधिक साजिश), 420 ( धोखाधड़ी) 409 ( सरकारी कर्मियों द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार की रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज मामले का संज्ञान लिया था और इसके बाद उन्हें आरोपी के तौर समन किया गया था.

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झारखंड सरकार व इस्पात मंत्रालय ने आरोपित कंपनी को खंड आवंटित करने की सिफारिश की थी: सीबीआई

जिरह के दौरान सीबीआई ने कहा था कि कंपनी ने आठ जनवरी 2007 को राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन किया था. सीबीआई ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईएसयूएल को कोयला खंड आवंटन करने की अनुशंसा नहीं थी बल्कि 36वीं अनुवीक्षण समिति (स्क्रींनिग कमेटी) ने आरोपित कंपनी को खंड आवंटित करने की सिफारिश की थी. सीबीआई ने कहा था कि अनुवीक्षण समिति के अध्यक्ष गुप्ता ने कोयला मंत्रालय का प्रभार भी देख रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कथित तौर पर इन तथ्यों को छुपाया कि झारखंड सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी. एजेंसी ने कहा कि कोड़ा, बसु और दो आरोपी लोकसेवकों ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक आवंटित करने के पक्ष में साजिश रची. वहीं आरोपियों ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया था.

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