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कैम्ब्रिज एनालिटिका की भारत इकाई OBI  का दो राज्यों के चुनाव में बीजेपी ने लिया था सहारा

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Newswing Desk: डेटा हैकिंग को लेकर बढ़ते विवादों के बीच विवादित फर्म की भारत इकाई के बीजेपी कनेक्शन का खुलासा हुआ है. खबर है कि डेटा स्कैंडल में घिरी कैम्ब्रिज एनालिटिका की मुख्य सेवा का इस्तेमाल बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नहीं किया था. लेकिन उसकी भारतीय इकाई का सहारा उसी साल हुए दो राज्यों के चुनाव में लिया था. दरअसल, कैम्ब्रिज एनालिटिका की मुख्य सेवा माइक्रो-वोटर टारगेटिंग की है. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि पार्टी ने कैम्ब्रिज एनालिटिका की भारतीय इकाई ओवलेनो बिजनस इंटेलिजेंस (OBI) की कुछ अन्य सेवाओं का सहारा उसी साल बाद में हुए दो विधानसभा चुनावों में लिया था. 

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इकनॉमिक टाइम्स ने बीजेपी के 2014 कैंपेन में शामिल रहे कई लोगों से बात की. उन सभी ने कहा कि कैम्ब्रिज एनालिटिका को उस साल बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के संबंध में हायर नहीं किया था. हालांकि उसी साल महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी ने OBI की सेवाएं ली थीं, जो न्यूयॉर्क बेस्ड सीए की भारतीय सहयोगी कंपनी है. यह सेवा रिसर्च,  स्ट्रैटिजी और संभवत: पोल डेटा कलेक्शनके मामले में ली गई थी. हालांकि इकनॉमिक टाइम्स पोल डेटा कलेक्शन वाली बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका. हालांकि ओबीआई की वेबसाइट पर बीजेपी, कांग्रेस और बिहार के चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार के जनता दल-यू को इसका क्लाइंट बताया गया है. ओवलेनो को जेडीयू के नेता केसी त्यागी के बेटे अमरीश त्यागी चलाते हैं. 

कानूनी प्रावधान का नहीं हुआ उल्लंघन: बीजेपी

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भले ही बीजेपी ने दो चुनावों में ओवलेनो का सहारा लिया था. लेकिन बीजेपी के टॉप सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने चार साल पहले दो विधानसभा चुनावों में ओवलेनो की ऐसी सेवाएं ली थीं, जो किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती थीं और जिनका मकसद अधिकृत स्रोतों से डेटा कलेक्शन था.‘  सूत्रों ने ये भी बताया कि ओवलेनो ने यूपी चुनाव से कुछ महीने पहले भी बीजेपी से संपर्क किया था, तब पार्टी नेतृत्व ने इसकी उपयोगिता पर गौर करने को कहा था, लेकिन बाद में इसकी सेवाएं लेने से मना कर दिया गया. बीजेपी के एक नेता का कहना है कि,  ‘हमें लग गया था कि भारत में सोशल मीडिया पर लोगों की राय के आधार पर राजनीतिक वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है. ओबीआई ने 2017 में गुजरात चुनाव के संबंध में भी बीजेपी से संपर्क किया था,  लेकिन इंटरनल रिसर्च के आधार पर बीजेपी नेतृत्व ने वह पेशकश भी ठुकरा दी थी.‘ 

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बीजेपी-कांग्रेस में छिड़ा है घमासान
गौरतलब है कि बुधवार को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस कैम्ब्रिज एनालिटिका कंपनी के संपर्क में रही है. उन्होंने कहा था, ‘हम प्रेस की आजादी का समर्थन करते हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को पसंद नहीं करते हैं.हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस बात से इनकार किया है कि पार्टी ने कैम्ब्रिज एनालिटिका की सेवाएं ली थीं. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कांग्रेस ने पिछले साल गुजरात चुनाव से पहले इस कंपनी के साथ मीटिंग्स की थीं. हालांकि ऊपर जिन सूत्रों ने जानकारी दी है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी इस कंपनी से बातचीत बंद कर दी थी और बीजेपी की तरह कांग्रेस को भी कंपनी की ओर से बहुत ज्यादा पैसे मांगा जाना ठीक नहीं लगा था. 

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